13 जून 2026

इंसाफ के लिए डर को गले लगा लें।

आईए अब मिलकर
नाकामियों को गले लगा लें।
अपने उन्हीं साथियों से आंखें चुरा लें।
लड़ने की हिम्मत नहीं है।
इंसाफ के लिए।
डर को गले लगा लें।
शोहरत अपनी बढ़ा लें।
नफरत को भी छुपा लें।
हिंदू मुसलमान के बीच।
कल तक यही थे ?
मेरे इतने अपने और अजीज।
आज उनसे इतनी दूरी
क्यों बढ़ा लें।
ऐसा क्यों कर रहे हो।
दूरी क्यों बढ़ा रहे हो।
यह मुल्क सब ने बनाया है।
यह क्यों भूल रहे हो।
मनुष्यता का दुश्मन ।
वो सदियों से रहा है।
सब में फूट डालकर जो लूट रहा है।
लोकतंत्र के लिए !
संविधान ने सब कुछ समझाया है।
यह मंत्र बताया है।
इसीलिए संविधान ही धर्म हमारा है।
यह तय करना होगा।
हिंदू मुस्लिम सभी बचेंगे।
जब यह नारा होगा।
और बहुजन की आवाज उठेगी।
भागेगा दुश्मन।
यह बिल्कुल माकूल दवा है।
हमें यही आवाज उठाना है।
यदि मुल्क बचाना है।
सबको यही समझाना है।

-डा.लाल रत्नाकर

भारत में जिस तरह का राजनितिक परिवर्तन हो रहा है वह कहाँ ले जा रहा है :
भारत में हो रहा राजनीतिक परिवर्तन मुख्य रूप से 2014 से शुरू हुए ‘मोदी युग’ की निरंतरता और कुछ नई वास्तविकताओं की ओर इशारा कर रहा है। यह एक स्पष्ट दिशा की तरफ ले जा रहा है: सांस्कृतिक-राष्ट्रीयवादी (हिंदुत्व-केंद्रित) शासन, मजबूत केंद्र सरकार, आर्थिक सुधारों और विकसित भारत (Viksit Bharat 2047) के लक्ष्य के साथ, लेकिन गठबंधन की मजबूरियों और विपक्षी पुनरुत्थान के साथ।
मुख्य परिवर्तन और उनकी दिशा:
1 BJP की प्रभुत्व वाली लेकिन पूर्ण बहुमत-रहित राजनीति:
2024 लोकसभा चुनाव में BJP को 240 सीटें मिलीं (2019 में 303), NDA को 293। मोदी तीसरी बार PM बने, लेकिन अब गठबंधन सहयोगियों (TDP, JD(U) आदि) पर निर्भरता बढ़ गई है। यह 1989 के बाद वाले गठबंधन युग की ओर वापसी जैसा है, लेकिन BJP अब भी सबसे मजबूत पार्टी बनी हुई है।3
परिणाम: सुधारों (जैसे One Nation One Election, CAA-NRC संबंधित कदम) में गति धीमी पड़ सकती है, लेकिन हिंदुत्व एजेंडा (सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, संस्थागत बदलाव) जारी है। 2025-26 में राज्य चुनावों (बिहार आदि) और 2029 के आम चुनावों में यह टेस्ट होगा।
2 संस्थागत और लोकतांत्रिक बदलाव:
कुछ रिपोर्ट्स (जैसे BTI 2026) में democratic backsliding (लोकतंत्र में गिरावट) का जिक्र है — मीडिया, संस्थाओं, ध्रुवीकरण और मुस्लिम समुदाय पर असर वाले कदमों के जरिए। लेकिन उच्च मतदान दर और चुनावी प्रक्रिया की मजबूती भी दिखती है।23
दिशा: अधिक मेजॉरिटेरियन (बहुसंख्यकवादी) राज्य की ओर, जहां विकास (labharthi vikas) और राष्ट्रवाद को जोड़ा जा रहा है। विपक्ष (कांग्रेस 99 सीटें 2024 में) मजबूत हुआ है, लेकिन अभी केंद्र में चुनौतीपूर्ण नहीं।
3 आर्थिक और विकासात्मक दिशा:
फोकस Viksit Bharat 2047 पर: इंफ्रास्ट्रक्चर, टैक्स सुधार (नया इनकम टैक्स लॉ 2026), GST 2.0, MSME, AI, न्यूक्लियर एनर्जी, urban development। GDP ग्रोथ 6.5-7.5% के आसपास रहने का अनुमान, घरेलू मांग और सुधारों से।25
यह परिवर्तन समावेशी विकास + राष्ट्रवादी गौरव की तरफ ले जा रहा है — डिजिटल गवर्नेंस, आत्मनिर्भर भारत, और वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका बढ़ाना।
4 विदेश नीति और वैश्विक भूमिका:
निरंतरता: US (ट्रंप 2.0 के साथ भी), QUAD, EU ट्रेड डील्स, चीन काउंटर। आर्थिक सुरक्षा (critical minerals, AI) पर जोर।29
भारत मध्य शक्ति से उभरते वैश्विक खिलाड़ी की ओर जा रहा है, जहां घरेलू राजनीति और विदेश नीति ज्यादा जुड़ रही है।
संभावित परिणाम (कहाँ ले जा रहा है?):
सकारात्मक: स्थिरता, तेज विकास, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, और वैश्विक महत्व बढ़ना। अगर सुधार सफल रहे तो 2047 तक उच्च-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था संभव।
चुनौतियां: ध्रुवीकरण बढ़ना, गठबंधन की अस्थिरता, संस्थागत स्वायत्तता का सवाल, और क्षेत्रीय असमानताएं (दक्षिण vs उत्तर)। 2026-29 में राज्य चुनाव और नेतृत्व परिवर्तन (मोदी के बाद) बड़े टर्निंग पॉइंट होंगे।28
कुल मिलाकर, यह ‘नई भारत’ की ओर ले जा रहा है — कम सेकुलर (जैसा पहले था), ज्यादा राष्ट्रवादी और केंद्र-केंद्रित, लेकिन लोकतांत्रिक चुनावी प्रतिस्पर्धा बरकरार।
यह दिशा जनता की पसंद पर निर्भर करती है। 2024 का चुनाव दिखाता है कि पूर्ण बहुमत हमेशा नहीं मिलता, और विकास + रोजगार जैसे मुद्दे निर्णायक रहते हैं। भविष्य अनिश्चित है, लेकिन वर्तमान ट्रेंड मजबूत BJP-led शासन + आर्थिक महत्वाकांक्षा की तरफ है।


 

कोई टिप्पणी नहीं:

फ़ॉलोअर