भाई श्री भागीरथ जी की श्रद्धांजलि समारोह में उनके लिए श्री सीताराम यादव द्वारा भेजा गया
आज की इस श्रद्धांजलि सभा समारोह में मैं व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पा रहा हूं इसका मुझे बहुत अफसोस है। फिर भी मैं भाई भागीरथ जी के विस्मर्णीय क्षणों को याद कर अपने अश्रुपूर्ण नेत्रों से उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
भाई भागीरथ जी और मैं बचपन से साथ-साथ रहा हूं साथ ही प्राईमरी में भी रहे लेकिन हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, बीकॉम (1955 -1964) तक एक साथ शिक्षा ग्रहण किया। बी.काम. करने के पश्चात मैं मुंबई आ गया, भाई साहब इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.काम. (1965 -1966 ) करने के बाद मुंबई आए। तब फिर से हम लोग एक साथ हो गए। वह मुंबई के गवर्नमेंट ला कॉलेज में दाखिला लिए और मुझे भी प्रेरित करके एलएलबी में दाखिला कराये, एलएलबी (1969 -1970 ) करने के बाद मेरा ट्रांसफर भोपाल हो गया और हम लोग फिर बिछड़ गए लेकिन हम लोगों का संपर्क बना रहा।
भाई साहब ने एलएलबी के बाद उसी कॉलेज से एलएलएम (1971 -1972 ) की पढ़ाई की। तत्पश्चात अपनी एमबीए की पढ़ाई के लिए अमेरिका (1974) में चले गए वहां पढ़ाई पूरी करने के बाद आपने जाब किया, परंतु उनका मन जाब में नहीं लगा । उन्होंने अपने मित्र स्मृतिशेष सरदार श्री मनोहर सिंह जी के साथ बहुत बड़ी कांट्रैक्टिंग कंपनी (च्ंतंउवनदज ब्वदजतंबजपदह ब्वउचंदल ।जसंदजं न्ै।) स्थापित किये, जिसमें आधुनिक मशीनें तथा इंजीनियर और कुशल कारीगरों एवं स्टाफ अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ लगभग 300 कर्मचारियों के साथ बड़े-बड़े निर्माण कार्य किये। जिसमें एटलांटा एयरपोर्ट का निर्माण कार्य सराहनीय है।
भाई भागीरथ जी एक कुशल उद्योगपति होने के साथ-साथ बड़े मृदुल स्वभाव के धनी थे उनका राजनीतिक जीवन भी अमेरिका में बहुत सराहनीय और अनेकों राजनीतिज्ञों से काफी संपर्क था इसके साथ सामाजिक कार्य में भी बढ़-चढ़कर रूचि थी और उनका योगदान था। उनके सौजन्य से एटलांटा में कई सामाजिक कार्य किए गए जिसमें सबसे महत्वपूर्ण भारतीय अमेरिकन सांस्कृतिक समिति की स्थापना और उसका भवन निर्माण है।
अपने जन्म स्थान बिठुआ कला में भी भव्य आवासीय भवन के साथ-साथ इंटरमीडिएट कॉलेज की स्थापना और उसके लिए भव्य भवन प्रयोगशाला एवं खेल का मैदान सराहनीय कार्य है.
आशा है कि उनके वंशज इसमें उत्तरोत्तर वृद्धि करते रहेंगे।
उनके सहयोग से भारत से कई शिक्षित बच्चे अमेरिका गए उसमें अपने घर से भतीजे रिश्तेदार और मेरा भी पुत्र भी अमेरिका गए हैं इस प्रकार लगभग 30 परिवार उनके सहयोग से वहां अच्छे जाब कर अपना मर्यादापूर्ण जीवनयापन सब प्रकार की सुविधाओ से खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
भाई समाज सुधारक भी रहे हैं भारतीय धार्मिक रुढ़िवादिता, अन्धविश्वास एवं पाखण्ड से वह बहुत खिन्न रहते थे तथा वैज्ञानिक सोच रखने की प्रेरणा देते थे।
उनकी पत्नी स्मृतिशेष श्रीमती कमला यादव जी बहुत ही ममतामई थी और हर स्तर पर उनका सहयोग करती थीं और पारिवारिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करने में भाई साहब के साथ उनके मूल्यों के अनुरूप हमेशा खड़ी रहीं। वैसे तो इनका परिवार बहुत बड़ा था परन्तु दो पुत्र और दो पुत्रिया एवं उनका भरा पूरा फलता फूलता परिवार अमेरिका में है।
जब से मैं अमेरिका में रहने लगा (2000) तभी से पुराना साथ फिर ताजा हो गया और प्रत्येक वर्ष महीनों हम उनके साथ रहते थे। जब भी उनका मन होता था वह मिलने आ जाया करते थे और हमलोग उस समय को बहुत ही यादगार ढंग से बिताते थे।
वैसे तो अमेरिका में सभी बच्चे उनको अपना अभिभावक मानते हैं परंतु भाई के दो पुत्र एवं दो पुत्रिया हैं सभी बाल बच्चेदार हैं और मर्यादा पूर्ण जीवन यापन कर रहे हैं । भाई का वर्णन करना एवं शब्दों में बांधना मुश्किल ही नहीं अपितु असंभव है।
भाई को अश्रुपूरित नैनों से पुनः श्रद्धांजलि ।।

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