उत्तर प्रदेश

लखनऊ में डबल मर्डर से सनसनी, रिटायर्ड सूबेदार की बेटियों की दिनदहाड़े हत्या :

लखनऊ में पत्नी को लेकर अस्पताल गए ‌र‌िटायर्ड सूबेदार के दो बेट‌ियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। घटना की वजह अभी तक पता नहीं चल सकी है, पुल‌िस अध‌िकारी मौके पर जांच कर रहे हैं। जानकारी के मुता‌ब‌िक, पारा के रामव‌िहार में रहने वाले र‌िटायर्ड सूबेदार लालबहादुर सिंह मंगलवार सुबह अपनी पत्नी रेनू स‌िंह को लेकर कमांड अस्पताल गए थे। लौटे तो उनकी 24 साल की बेटी आरती और बेटी सोनम (16) क‌िचन में खून से लथपथ म‌िलीं। दोनों को कमांड अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोष‌ित कर द‌िया। 
हत्या की वजह अभी तक पता नहीं चल सकी है। क‌िचन और बरामदे में खून ब‌िखरा था। छोटी बेटी के कपड़े अस्त-व्यस्त थे वहीं बड़ी बेटी के हाथ में बाल म‌िले हैं ज‌िससे अनुमान लगाया जा रहा है क‌ि मरने से पहले संघर्ष हुआ होगा। दोनों बेट‌ियों के गले में घाव हैं, माना जा रहा है क‌ि क‌िसी ब्लंट चीज से वार क‌िया गया है। लड़की के कमरे मे बेड पर कपड़ों का बक्सा ब‌िखरा म‌िला है।


आरती बड़ी और सोनम छोटी थी। आरती से छोटा भाई आशुतोष है जो बाराबंकी में रहता है।  पुल‌िस मामले की जांच पड़ताल कर रही है.
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यूपी में बीजेपी नेताओं और पुलिस के बीच बढ़ता टकराव


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उत्तर प्रदेश में पिछली सरकार को क़ानून-व्यवस्था के नाम पर घेरने वाली भारतीय जनता पार्टी अब राज्य में अपनी सरकार होने के बावजूद क़ानून-व्यवस्था के नाम पर ख़ुद घिरती चली जा रही है.
सरकार बने अभी दो दिन महीने भी नहीं हुए हैं और खादी (बीजेपी और संघ परिवार के नेताओं) और खाकी (पुलिस) के बीच ज़ुबानी संघर्ष ही नहीं बल्कि कई बार हिंसक संघर्ष तक की नौबत आ चुकी है.
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खाकी पर ग़ुस्सा

गोरखपुर में आईपीएस अधिकारी चारु निगम और स्थानीय विधायक राधा मोहन अग्रवाल के बीच जो कुछ हुआ, वो उसी संघर्ष का एक हिस्सा है.
राज्य में नई सरकार बनने के बाद से ऐसे तमाम उदाहरण सामने आए हैं जिनमें बीजेपी नेताओं ने क़ानून-व्यवस्था संभाल रहे पुलिस अधिकारियों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की है.
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मेरठ

घटना आठ अप्रैल की है. आरोप है कि मेरठ में बीजेपी नेता संजय त्यागी पुलिस से सिर्फ़ इसलिए उलझ गए क्योंकि उनके बेटे को गाड़ी में हूटर लगाने से मना किया गया और बेटे को थाने से ज़बरन छुड़ाने के लिए थाने पर भी जमकर हंगामा किया गया.
बीजेपी नेता के बेटे को छोड़ दिया गया और पुलिस अधिकारी को वहां से हटा दिया गया.
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सहारनपुर

22 अप्रैल को सहारनपुर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानी एसएसपी की ग़ैरमौजूदगी में उनके आवास पर क़रीब चार-पांच सौ लोगों ने हमला कर दिया. एसएसपी लव कुमार की पत्नी ने बताया कि उनके दोनों बच्चे ख़ौफ़ में कई घंटे बंधक बने रहे.
मामले में सहारनपुर के सांसद राघव लखनपाल, उनके भाई और देवबंद से बीजेपी विधायक ब्रजेश समेत तमाम लोगों को नामज़द किया गया था लेकिन इनमें से किसी नेता के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.
हां, राघव लखनपाल लगातार आरोप लगा रहे थे कि एसएसपी लव कुमार पिछली सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं. इसका नतीजा ये हुआ कि लव कुमार को एसएसपी सहारनपुर के पद से हटा दिया गया.
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फ़तेहपुर सीकरी

22 अप्रैल को आगरा के पास फ़तेहपुर सीकरी में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमा वापस लेने और इंस्पेक्टर को हटाने की मांग को लेकर थाने पर प्रदर्शन हुआ. बाद में पुलिस के साथ जमकर संघर्ष हुआ. इस दौरान एक नेता ने सीओ पर भी हाथ छोड़ दिया और एक दारोगा की मोटर साइकिल में आग लगा दी गई.
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बाराबंकी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से लोकसभा सांसद प्रियंका सिंह रावत ने पिछले दिनों पुलिस अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया. पुलिसवालों का व्यवहार उन्हें जब पसंद नहीं आया तो मीडिया के सामने ही धमकी दे डाली और कहा, ''मैं सारी मलाई बाहर निकाल लूंगी और खाल भी खिंचवा लूंगी.''
प्रियंका रावत जब ये बयान दे रही थीं, उस समय पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद थे.
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शाहजहांपुर

शाहजहांपुर ज़िले में बीजेपी नेता मनोज कश्यप समर्थकों के साथ पुलिस वालों को थाने में चूड़ियां पहनाने पहुंच गए. कश्यप ने थाने के कोतवाल को चूड़ियां पहनाने की कोशिश भी की.
इससे पहले मनोज कश्यप द्वारा कोतवाल को जान से मारने की धमकी का कथित वीडियो भी वायरल हुआ था. इन सबके बावजूद इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
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गोरखपुर

ताज़ा मामला गोरखपुर का है जहां बीजेपी के वरिष्ठ नेता और स्थानीय विधायक राधा मोहन अग्रवाल ने आईपीएस अधिकारी और गोरखनाथ इलाक़े की क्षेत्राधिकारी चारु निगम को इस क़दर डांटा कि उनकी आंख से आँसू निकल पड़े.
ये वीडियो न सिर्फ़ ज़बर्दस्त वायरल हुआ बल्कि चारू निगम ने इस बाबत फ़ेसबुक पर टिप्पणी भी की कि उनके आँसुओं को उनकी कमज़ोरी न समझा जाए.

आईपीएस एसोसिएशन को आपत्ति

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यहां तक कि आईपीएस एसोसिएशन ने भी इसे गंभीरता से लिया है और सरकार से इस बारे में आपत्ति दर्ज करा चुका है.
उत्तर प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन के महासचिव प्रकाश डी ने बीबीसी को बताया, "हम लोगों ने मुख्य सचिव से मुलाक़ात की है और उन्हें इस बात से अवगत कराया है कि अधिकारियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को गंभीरता से लिया जाए और ऐसा करने वालों को दंडित किया जाए."
हालांकि प्रकाश डी ने इस सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की कि कथित दुर्व्यवहार के बावजूद अधिकारियों का ही तबादला क्यों हो रहा है?

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