16/06/2015

बेबाक समाजवादी या समाजवाद पर बेबाक !

चंद्रभूषण जी पर मैं लिखना चाहता हूँ मुश्किल यह है की उनपर लिखा क्या जाय उनके आयाम इतने हैं की किसको केंद्रित किया जाय मुझे लगा वो जो खुद लिखते हैं उसे ही संकलित किया जाय और उसमें भी जो समाजोपयोगी हो इसीलिए क्रमश ; इस पर डाल रहा हूँ।
चंद्रभूषण जी पर यह आलेख उन्ही के पोस्ट से यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ।
(यह समजवादी परिवार पर बहुत ही बेबाकी से लिखते रहते हैं यहाँ पर उनकी टिप्पणियां लगा रहा हूँ  इस आशा में की लोग इनसे सीखें और नेताओं की चापलूसी बंद करें अन्यथा सारा वैचारिक स्तर मर जाएगा और हमारे बुजर्गों की लड़ी गयी लड़ाई ये चापलूस राजनीतिज्ञ बर्बाद कर देंगे)
'इससे अलग ये बात भी है कि राजनीति का मतलब केवल जनता को बेवक़ूफ़ बनाना और राजा की तरह अपने चहेतों / चहेतियों को लूट की छूट देना मात्र तो नहीं रह गया है। जब भी इनसे मेरी बात हुई है यादव जी इस पीड़ा को महसूस किये हैं।'
-डा.लाल रत्नाकर


भाई चन्द्र भूषण जी !

इससे एक विचार और मन में आता है वह यह कि यह समाजवादी अनुशासन की चरम पराकाष्ठा तो नहीं है। समरथ को नहीं दोष गुसाँई। 
प्रेस की ज़िम्मेदारी किसी पार्टी के लिये अतिशय महत्वपूर्ण कार्य है, राजेन्द्र चौधरी के पास यह दायित्व सम्भवत: अब तक था, उनके ऊपर यह व्यवस्था अनिवार्यत: पार्टी की छवि के लिये ज़रूरी रही होगी।
आपने जितनी तारिफ़ की है नये प्रवक्ता की इस नयी व्यवस्था में आपके लिखे नेताजी के पत्र का प्रभाव भी नज़र आता है।
यह उक्ति कितनी सार्थक है-
समाजवाद बबुआ धीरे धीरे आई..............

समाजवाद बबुआ पहिले घर में............

समाजवाद बबुआ धीरे धीरे आई.......................................


शिवपाल जी को एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी.....

"बधाई!!!!!!


प्रदेश के कबीना मंत्री और समाजवादी पार्टी के गम्भीर नेता श्री शिवपाल सिंह यादव जी को उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है।

निःसन्देह शिवपाल जी इस सरकार के एकमात्र ऐसे मिनिस्टर हैं जिनकी कार्यशैली उम्दा है,तीब्र और त्वरित है।

शिवपाल जी जिन-जिन मन्त्रालयों को संभाले है वे सभी अच्छे से चल रहे हैं।पार्टी के वे गम्भीर नेता हैं।उनकी सोच उत्तम है।वे पार्टी और सरकार पर प्रभाव भी रख रहे हैं।पार्टी की रीति-नीति की अच्छी समझ है इसलिए उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्य प्रवक्ता बनाया जाना उत्तम है।

शिवपाल जी को समाजवादी पार्टी का मुख्य प्रवक्ता बनाये जाने से प्रदेश में समाजवादी पार्टी को प्रेस में फेस करने या पार्टी की तरफ से बहस में हिस्सा लेने में सुविधा रहेगी तथा वे आधिकारिक बयान देकर पार्टी को मजबूत बनाएंगे।

शिवपाल जी को पुनः-पुनः बधाई,कोटिशः धन्यवाद पार्टी का प्रदेश का मुख्य प्रवक्ता बनने पर।"




कुछ इस तरह भी 


फ्रैंक हुजूर??..बाप रे यह तो अलकायदा का है.....


अलकायदा से जोड़ने के किये फ्रैंक हुजूर 
नाम ही काफी है।मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी द्वारा "सोशलिस्ट फैक्टर" पत्रिका के विमोचन के बाद भोजन का कार्यक्रम था।मैं,श्री एच एल दुसाध जी,श्री डा लालजी निर्मल जी व डा प्रमोद यादव जी साथ ही खाने हेतु मुख्यमन्त्री आवास में गए।भोजन के दौरान एक पत्रकार ने टिप्पड़ी की कि यह फ्रैंक हुजूर अलकायदा का आदमी है।इसे अलकायदा ने यहां लांच किया है।डा निर्मल सर यह बात सुन रहे थे,उन्होंने दुसाध जी से कहा और दुसाध जी ने मुझसे।मैं जब यह टिप्पड़ी सुना तो हतप्रभ रह गया इस देश के तथाकथित बुद्धिजीवियो पर जिनके दिमाग में इतना जहर भरा है।
फ्रैंक हुजूर साहित्यिक नाम है जबकि फ्रैंक साहब का मूल नाम मनोज कुमार है।आपके पिताजी बिहार सी आई डी में कार्यरत हैं जिनका नाम श्री बब्बन सिंह(यादव) है।बब्बन जी फ़िलहाल पटना में रहते हैं जबकि आपका गृह जनपद बक्सर है।फ्रैंक साहब की माताजी का नाम श्रीमती प्रेमलता है।फ्रैंक जी की पत्नी श्रीमती मिस फेमिना मुक्ता सिंह जी है जो सी आई डी धारावाहिक की कलाकार है और नाट्य मंचो पर आपकी दमदार उपस्थिति है।
पढाई के समय दिल्ली के हिन्दू कालेज में फ्रैंक साहब ने पुस्तकालय मंत्री का चुनाव लड़ा।फ्रैंक उर्फ़ मनोज कुमार(यादव)को पिछड़ा होने के नाते सवर्ण छात्रों ने चुनाव लड़ने से मना किया,जब विद्यार्थी मनोज कुमार नही माने तो बाहरी गुंडों से पिटाई करायी।यह अलग बात है कि चुनावी लड़ाई में फ्रैंक साहब ने अपने विरोधी को जबाब देने में कोई कसर नही छोड़ा और चुनाव भी जीते।
फ्रैंक हुजूर ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर और पाकिस्तानी राजनेता श्री इमरान खान की जीवनी लिखी है।श्री मुलायम सिंह यादव पर लिखी गयी आपकी किताब प्रेस में है।अखिलेश जी पर भी लिख रहे हैं।पोर्न वुड पर आपने सोहो नामक किताब लिखी है।एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का लेखक जब जाति में जीता है तो पिटता है और जब जाति छोड़ता है तो अलकायदा का हो जाता है।अजीब स्थिति है।ये यथास्थितिवादी,मनुवादी,घोर जातिवादी कहीं भी जीने नही देंगे।
इन मनुवादियों के लिए समाजवाद तो पोटैशियम सायनाइट है।इन्हें समता,समानता,बराबरी,सामाजिक न्याय,विशेष अवसर से घिन है।इन्हें अपनी सुपरमेसी पसन्द है।दूसरों को निम्न बनाये रखने में प्रसन्नता है।यदि कोई इनके इस इंतजाम को तोड़ता है तो वह पूर्व में राक्षस,दैत्य,असुर,दानव,अनार्य,शूद्र आदि था और आज अलकायदा है ,धर्मद्रोही है,बाबर की औलाद है,हरामी है,रामद्रोही है आदि-आदि।
आज मुख्यमन्त्री आवास में फ्रैंक हुजूर जैसे अंतर्राष्ट्रीय सोशलिस्ट साहित्यकार,सोशल जस्टिस के अलमबरदार और सेक्युलरिज्म के झण्डावरदार के बारे में एक स्वनाम धन्य सवर्ण बुद्धिजीवी की टिप्पड़ी सुना तो लगा कि हम चाहे जितनी प्रगति कर ले पर जाति-धर्म मुर्दाहट्टी तक दौड़ायेगा।हमारी हड्डी के अंदर मज्जा तक में घुसे हुए ब्राह्मणवाद से लड़ने के लिए हमे ऐसा चिकित्सक बनना पड़ेगा जो अपने शरीर की हड्डी के मज्जा से इसे अलग कर डस्टबिन में डालने की युक्ति निकाल सके।
"सोशलिस्ट फैक्टर"के जरिये सोशल जस्टिस और सेक्युलरिज्म की बात करने वाला यह फ्रैंक हुजूर अलकायदा का है....होशियार.....ब्रह्मवादियो सावधान! वैसे मैं फ्रैंक हुजूर के जनक श्री बब्बन सिंह(यादव)को सलाम करता हूँ कि 36-37 वर्ष के इस सोशलिस्ट लड़ाके में क्या कुछ नही भरा है उन्होंने।फादर्स डे पर बाबूजी बब्बन सिंह(यादव)को सलाम! 
मनुवादियों इस अलकायदा से सावधान!

*ताकि सनद रहे !
समाजवादी परिवार की सरकार में माना की सभी जगह होती है पर घर घर होता है घर में वही होना या रहना चाहिए जिसे उस घर के भले बुरे का पता हो, जहाँ तक हमने देखा है यह खामी इस तरह के परिवारों में होती ही है, शायद इन लोगों को ज्यादा समझ की जरुरत नहीं होती क्योंकि ये हमेशा यही मानकर चलते हैं की वे ज्यादा समझदार है। 
यही कारण है की घर में अच्छे लोगों का बॉस हो ! 


समाजवादी कार्यक्रमों की खामियां ;


पिछड़ी बच्चियां कहाँ दफन हो गयीं?????????

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समाजवादी पार्टी का मूलाधार पिछड़ा है और कन्या विद्या धन योजना में यही गायब?
नेताजी! आवां से नाद ही गोल? कन्या विद्या धन योजना में 21% अंनुसूचित जाति/जन जाति और 20% अल्पसंख्यक का आरक्षण है लेकिन पिछड़ा गायब?
क्या समाजवादी पार्टी ऐसा महसूस करने लगी है कि पिछडो को अब आरक्षण की जरूरत नही है?आखिर अल्पसंख्यक आरक्षण आप देकर भाजपा को बैठे-बिठाये कम्युनल मुद्दा नही दे रहे है?क्या मण्डल कमीशन जो संवैधानिक आयोग है में 85% मुसलमान नही हैं?
नेताजी!क्या इस तरह के इंतजामात से भाजपा मजबूत नही होगी?क्या हिन्दू पिछड़ा आपके इस निर्णय से भाजपा की तरफ मुखातिब नही होगा?क्या हम obc आरक्षण देकर अघोषित रूप में बहुतायत मुस्लिम बच्चियो का भला नही कर सकते थे?
नेताजी!आखिर ऐसा क्या हो गया है कि पिछडो की सरकार में पिछड़ा बिलकुल पीछे होता जा रहा है।पिछडो के संवैधानिक हक से उन्हें महरूम क्यों किया जा रहा है?उनके आरक्षण की ऐसी की तैसी क्यों हो रही है?
नेताजी!पिछड़ा भी जाग गया है।चट्टी-चौराहो पर अब वह भी चर्चा कर रहा है जो सकारात्मक नही है।मेरा अनुरोध है कि पार्टी हित में लाइन-लेंथ सटीक करिये वरना आसार अच्छे नही दिख रहे।
नेताजी!मुझे आपसे कोई पद नही चाहिए इसलिए भाँट गिरी की बजाय यथार्थ बताने की कोशिश करता रहता हूँ।पार्टी का नुकसान मैं खुद का निजी नुकसान समझता हूँ क्योकि समाजवाद को समर्पित मेरी दूसरी पीढ़ी है इसलिए पार्टी का कमजोर होना खलता है।पार्टी सुधारिये वरना हम सभी बैठकर हाथ मलेंगे।


नेताजी ! लम्बी दूरी विचारो से तय होती है.....
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आदरणीय श्री मुलायम सिंह यादव जी!!आप आज(12-6-2015) का अख़बार पढ़े होंगे। खबर है कि जिस आर एस एस को शाखा लगाने के लिए युवाओ के टोटे थे उसे अब आपके गढ़ में सर्वाधिक नौजवान मिल रहे हैं।
नेताजी जब दिशा भ्रम हो जाता है तो दुर्घटना होती है।आदमी भटक जाता है,खो जाता है।समाजवादी पार्टी वर्तमान समय में दिशा भ्रम की शिकार जैसी स्थिति में है।मण्डल आंदोलन,सामाजिक न्याय की अवधारणा बेहोशी की स्थिति में है।प्रोन्नति में आरक्षण,पी सी एस में ओवर लैपिंग आरक्षण की वापसी,ठेके में पिछडो को आरक्षण न देना,कन्या विद्या धन में पिछडो का आरक्षण न होना आदि सवाल पिछडो/उपेक्षितों को उद्वेलित कर रखा है।नेताजी!समाजवादी पार्टी प्रबुद्ध सम्मेलन कर सवर्ण वोट साध रही थी।चन्द्रशेखर जयंती,महाराणा प्रताप जयंती पर अवकाश भी अदूरदर्शिता ही कहा जाएगा।
पिछड़े वर्ग के लोग समाजवादी पार्टी से जब असन्तुष्ट होंगे तो वे पार्टी से हटेंगे।यदि वे एक बार हट गए तो उन्हें वापस लाना मुश्किल होगा।लोकसभा चुनाव में पिछड़ों को तो छोड़िये 20 से 40 प्रतिशत यादव भाजपा को वोट कर गया लेकिन डैमेज कण्ट्रोल की कोशिश के बजाय कुम्भकर्णी निद्रा जारी है।
अब देखिये ये भाजपाई आपके नाक के नीचे ही आर एस एस का कैम्प लगाकर बड़ी संख्या में वैलेंटियर प्रशिक्षित कर रहे हैं।यह चिंताजनक है कि आपके लोससभा क्षेत्र में संघ की पकड़ मजबूत हो रही है।जब धर्मनिरपेक्षता के अलमबरदार के क्षेत्र में हालात ऐसी है तो शेष जगह कैसी होगी।
नेताजी!आपने सत्ता में आने के तीन वर्षो में कोई कैडर कैम्प,प्रशिक्षण शिविर लगाया है क्या?हवा-हवाई राजनीति लम्बी नही होती।काठ की हांड़ी बार-बार नही चढ़ती।
नेताजी भाजपा का प्रभाव रोकने के लिए केवल सेकुलर ताकतों का गठबन्धन ही मत कीजिये ,सेक्युलरिज्म की पढ़ाई,नई पीढ़ी में इसके सुपरिणाम/दुष्परिणाम पर गहन चर्चा और ट्रेनिग होनी चाहिए।

समाजवादी सरकार के शासन की खामियां ;

मुख्यमन्त्री जी स्थिति संभालें....
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मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी!
आपकी महिला हेल्पलाइन चालू है।आपका आदेश जारी है कि बलात्कार होने या ऐसी घटनाओं पर यदि समुचित कार्यवाही नही होती है तो सम्बंधित अधिकारी बख्शे नही जाएंगे लेकिन एक-एक साल तक अधिकारी कार्यवाही नही कर रहे और न्याय के लिए पानी की टँकी पर चढ़ना पड़ रहा है।
मुख्यमन्त्री जी!आपकी नेकनियती पर कोई सन्देह नही है लेकिन आपके अधिकारी बंटाधार कर रहे हैं।वे बेलगाम हैं।उन्हें आपके चाबुक का तनिक भय नही दिख रहा है जो निरंकुशता का कारण है।
एक लड़की से कई लोग बलात्कार करते हैं।एक के घर रखवाया जाता है।गर्भपात होता है।विवाद होता है।पुलिस सुलह की फ़िराक में रहती है।दुबारा बच्चा होने को रहता है।अगर लड़की से सब कुछ जबरन होता है तो उसके गर्भस्थ शिशु का डी एन ए टेस्ट हो सकता था और बच्चे का पिता ज्ञात हो सकता था।आखिर पुलिस क्यों इस तरीके से काम कर रही है कि न्याय के लिए आत्महत्या की तरफ अग्रसर होना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री जी स्थिति संभाले।

......


माननीय अखिलेश जी पूरे सूबे में कार्यकर्ताओं का ऐसे ही बुरा हाल है.....
अधिकारी सुनते नही,लूटने में मस्त हैं।
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क्या देवरिया,क्या पीलीभीत;सब जगह एक ही हाल है।कार्यकर्ता बेहाल है और अधिकारी मालामाल है।पीलीभीत भ्रमण के दौरान यहां भी कार्यकर्ताओं में असन्तोष देखा।कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं,लेकिन उनकी अधिकारी क्या कोई नही सुन रहा।
सरकार रहते कार्यकर्ताओं का रोना रोना और अधिकारी,विधायक तथा पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियो का एकमत हो लूटना अगले दिनों के लिए अशुभ संकेत ही दे रहे हैं।सरकार में प्रभावशाली विधायक/मंत्री/पार्टी पदाधिकारी अफसरों से मिलकर कमाने में मस्त हैं और कार्यकर्ता खुद की उपेक्षा और उत्पीड़न से पस्त हैं।
विगत दिनों फिरोजाबाद से डिम्पल यादव जी लोकसभा चुनाव हार गयी थीं।मैं काफी उधेड़बुन में था कि ऐसा कैसे हो गया। 2012 के विधानसभा चुनाव में मैं फिरोजाबाद गया था।फिरोजाबाद,एत्मादपुर,टूंडला आदि क्षेत्रो में घूमा।टूंडला में अखिलेश जी की सभा थी जिसमे मैंने भी अपने भाषण में पूर्वांचल में सपा की चल रही लहर से अवगत कराया।चुनाव प्रचार में मुझे लोगों में गजब का उत्साह दिखा।मैं खुद को अब रोक नही पा रहा था लिहाजा कई जगहों पर पूछ पड़ा कि जब आपलोग इतने जागरूक और मजबूत हैं तो डिम्पल जी हारी कैसी?लोगो का एक ही जबाब था कि हमलोग पार्टी से खफा थे इसलिए बूथ पर वोट डालने गए और घर चले आये।हमलोगों ने उस चुनाव में बूथ पर खड़े होने का काम नही किया।
आज परिस्थितियां फिर बिगड़ रही हैं।कार्यकर्ता हतोत्साहित है।भ्रष्ट अधिकारी बेलगाम जिलो को लूट रहे हैं।विधायक और पदाधिकारी खुद उस लूट में सहभागी हैं।अकेले मुख्यमन्त्री के ईमानदार रहने के बावजूद सजा मुख्यमन्त्री ही पाएंगे क्योकि कार्यकर्ता नाराजगी में जब अपने विधायक को हराएगा,बूथ पर नही जाएगा तो उसमे हार विधायक की तो होगी ही हमारे प्रिय मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश जी की भी हार हो जायेगी क्योकि जब विधायक हारेगा तो सरकार नही बनेगी।मेरा अनुरोध है कि अभी लगभग दो वर्ष हैं,लगाम कसी जाय वरना..........
गईल-गईल भैंसिया पानी में।

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क्या तानाशाही की आहट है मोदी साहब के कार्यों में?
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अब तो समीक्षक यह समीक्षा करने लगे हैं कि मोदी साहब तानाशाह बनने की तरफ तो अग्रसर नही हैं?लोकतान्त्रिक तौर- तरीके ताक पर रखके अध्यक्षीय प्रणाली की तरफ मोदी जी देश को ले जाने की फ़िराक में हैं क्या?
वैसे भारत इस मामले में बड़ा अजीब देश है।यहां की जनता जीभ की तरह सेंसेटिव है।यदि दांत में कही भी कुछ फंस जाय तो जीभ वहां तब तक रगड़ मारती रहती है जब तक वह कूड़े के ढेर में न चला जाय,ठीक ऐसे ही भारतीय लोकतन्त्र और यहां की लोकतान्त्रिक जनता है जो लोकतांत्रिक दांत में तानाशाही का खूज्जा फंसते ही सक्रिय हो जाती है। यह जनता रूपी नरम जीभ तब तक दाँत में फंसे खूज्जे को टारगेट किये रहती है जब तक वह वेस्ट मैटेरियल के रूप में वाश न हो जाय।इंदिरा जी और उनकी इमरजेंसी इसका प्रत्यक्ष गवाह है।
मोदी साहब विदेश मंत्री का काम खुद संभाले हैं।पूरी दुनिया खुद घूम रहे हैं।फिर विदेश मंत्री का क्या मतलब?जिस राजनाथ सिंह जी ने इन्हे प्रधानमन्त्री का उम्मीदवार घोषित किया उस राजनाथ सिंह जी को बुलाकर ऐसे डांटा कि उनकी बन्धी घिघ्घी अब भी नही खुल रही है।अपने गुरु आडवानी जी,मुरली मनोहर जोशी जी,यशवंत सिंह जी आदि को ऐसे फेंक रखा है जैसे अब उनकी कोई जरूरत ही नही है।
मोदी साहब का पूरा कार्य व्यवहार तानाशाहीपूर्ण है लेकिन मोदी जी सावधान रहिएगा भारत की जनता तानाशाही बर्दाश्त नही करती है।

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हिंदी को सम्मान दिलाने के लिए मुलायम का कठोर संकल्प...

साधुवाद नेताजी!

"निज भाषा उन्नति अहै,सब भाषा के मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के,मिटै न हिय के शूल।।"
-भारतेंदु हरिश्चंद्र
मातृभाषा का सम्मान जरूरी है।मुलायम सिंह यादव जी का इस दिशा में प्रयास सराहनीय रहा है।डा लोहिया ने पूरे देश में अंग्रेजी के विरुद्ध अभियान चलाया था।अंग्रेजी हटाओ का नारा दिया था।वे कहते थे अंग्रेजी में गिटपिट बात करने वाले अत्यंत अल्प हैं।देश का आदमी यह जान ही नही पाता है कि अंग्रेजी में बोलने वाला क्या कह रहा है।अंग्रेजी को वे गुलामी की भाषा मानते थे और दुनिया के उन तमाम मुल्को की नजीर देते थे जो अपनी खुद की भाषा में ज्ञान-विज्ञान में तरक्की किये हैं।वे अंग्रेजी की बदौलत खुद की सुपरमेसी जताने वालो की खिल्ली भी उड़ाते थे जबकि वे खुद अंग्रेजी के प्रकांड विद्वान थे।डा लोहिया ने मातृ भाषा को तवज्जो देने की सदैव वकालत किया।उन्हें कहा कि देश की भाषा हिंदी हो लेकिन प्रदेशों में उनकी खुद की भाषा में या हिंदी में काम हो।देशी भाषाओँ में व्यक्ति की प्रतिभा में तीब्र निखार आता है।
मुलायम सिंह यादव जी के उत्तर प्रदेश में मुख्यमन्त्री बनने से पूर्व(1989 के पूर्व) लोक सेवा आयोग में अंग्रेजी अनिवार्य थी जिससे गरीब,किसान,पिछड़ा,दलित थोड़ी मात्रा में पी सी एस बन पाते थे।अभिजात्य वर्गों का ही इस पर कब्जा था लेकिन जब 1989 में सत्ता में आने के बाद मुलायम सिंह यादव जी ने अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म की तो पीसीएस में भारी तादात में इन वर्गो के लोग आने लगे।
मुलायम सिंह यादव जी ने रक्षा मंत्री रहते हुए रक्षा विभाग का कामकाज हिंदी में शुरू करवाया जो एक ऐतिहासिक घटना है।देश के ऐसे विभाग में जहां हिंदी किसी कोने में भी नही थी वहां हिंदी का प्रयोग शानदार काम था।
हिंदी को प्रतिष्ठित करने में निश्चय ही मुलायम सिंह यादव जी का अतुलनीय योगदान है।हम इसके लिए मुलायम सिंह यादव जी को साधुवाद देते हैं तथा हिंदी के प्रख्यात कवि श्री गोपाल दास नीरज जी और श्री उदय प्रताप सिंह यादव जी जो अंग्रेजी प्रवक्ता रहने के वावजूद हिंदी के कवि है उन्हें सम्मानित करने के लिए आदरणीय मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी का अभिनन्दन व अभिवादन करते हैं।

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इधर उधर की ;

मोदी साहब ने किया ऐतिहासिक समझौता।बधाई!!वाह मोदी साहब!गजब का ऐतिहासिक समझौता!!
यही काम यदि कांग्रेसियो या तीसरे मोर्चा ने किया होता तो वे मुस्लिम परस्त,देशद्रोही और ना जाने क्या-क्या हो गए होते पर आपने किया तो समझौता ऐतिहासिक हो गया।कितने गजब हैं आपलोग मोदी साहब और गजब है आपकी जमात भी।
गांधी जी ने भारत -पाक बंटवारे में तय कुछ करोड़ रूपये वापस करने हेतु नेहरू जी की सरकार पर दबाव बनाया,जब नेहरू जी अनसुना किये तो उन्होंने अनशन कर दिया जिस कारण से भारत को वे लगभग 56 करोड़ रूपये पाकिस्तान को देने पड़े।गांधी जी का यही बर्ताव परम् श्रद्धेय देशभक्त नाथू राम गोंडसे जी को खल गया और उन्होंने बस इत्ती सी बात पर गांधी जी का बध कर दिया और नाथू राम गोंडसे जी के भाई साहब गोपाल गोंडसे जी ने "गांधी बध क्यों और कैसे" लिख डाली।
डा लोहिया साहब ने जब कहा कि भारत-पाक में युद्ध नही बल्कि इनका महासंघ बनना चाहिए और इन्हें अपनी तरक्की के लिए मिलजुल कर काम करना चाहिए तो वे मुस्लिम परस्त हो गए।
मुलायम सिंह यादव जी ने जब कहा कि भारत-पाक-बंगला देश का महासंघ बनना चाहिए तो वे मुल्ला मुलायम कहे जाते हैं।स्मृति शेष बाल ठाकरे साहब कहते हैं कि मुलायम सिंह के लिए एक और नाथू राम गोंडसे पैदा करना पड़ेगा लेकिन जब.....
मोदी साहब आप बंगला देश को 10000 एकड़ जमीन देकर 500 एकड़ जमीन लेते हैं तो वह ऐतिहासिक समझौता होता है।आपके गुरु परम् श्रद्धेय अटल जी नवाज शरीफ जी और पाकिस्तानी सेना के चीनी मिल से हजारो करोड़ रूपये की चीनी खरीदते हैं तो वह राष्ट्रभक्ति होती है।नवाज शरीफ जी और परवेज मुसर्रफ जी को आपलोग बुलाकर गंगा-जमुना-सरस्वती नामक मेज पर तरह-तरह का मांस परोसकर खातिरदारी करते हैं तो वह राष्ट्रप्रेम होता है।वाह भाजपाइयों,अभिजात्य वर्गीय मानसिकता के प्रेस वालों आप भी खूब हैं।
अब जिलानी साहब को कश्मीर देकर ऐतिहासिक समझौता कर ही डालिये मोदी जी जिससे रोज-रोज की किचकिच खत्म हो जाय।न कश्मीर रहेगा न आपको मुफ़्ती मोहम्मद सईद को झेलना पड़ेगा इसलिए कश्मीर का भी झमेला खत्म कर दीजिये।केवल जम्मू रहेगा तो आपकी सरकार भी बन जायेगी।इसी तरह से अरुणांचल को चीन को दे दीजिये,वह भी आपसे खुश हो जाएगा।बिना मतलब विवाद का क्या मतलब?भारत को ठोस बनाइये।विवादित हिस्सों को दे डालिये विवाद पैदा करने वाले देशों को।
56 इंच का सीना ऐसे ही आपके पास थोड़े है।आप निःसंकोच वह सब कुछ कर डालिये जो 30-32 इंच के सीना वाले डरपोक राष्ट्राध्यक्षों ने नही किया।डरपोक थे सब...........
वाह मोदी जी!ऐसे ही ऐतिहासिक समझौते करते रहिये।

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कमिश्नर और डी एम को सस्पेंड कर मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी ने सख्त रुख का परिचय देकर सराहनीय कार्य किया है....ऐसे ही सत्ता की हनक दिखे वरना ये बेलगाम घोड़े सब चर जाएंगे..... 
मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी ने प्रशासनिक अधिकारियो पर रुख कड़ा कर जो संकेत दिया है वह सकारात्मक है।
उत्तर प्रदेश सरकार के जन हितोपयोगी कार्य सराहनीय है लेकिन इम्पीमेन्ट निहायत ही लचर और भ्रष्टाचार युक्त है।प्रशासनिक अमला तय किये बैठा है कि अखिलेश सरकार चाहे जितना भी अच्छा कार्य करे लेकिन वे अपने तईं उसमे खोट पैदा कर सरकार को लोकप्रिय बनाने की बजाय अलोकप्रिय बनाने का इंतजाम जरूर करेंगे।
पूरे प्रदेश में अधिकारियो की कार्यप्रणाली सन्तोषजनक नही है।समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता अपने नेतृत्व या सरकार के कार्यों से बेहद सन्तुष्ट है लेकिन प्रशासनिक अमलो द्वारा उनकी की जा रही अनदेखी और उत्पीडनात्मक कार्यवाही उन्हें हताशा के गर्त में ढकेल रही है।समाजवादी पार्टी का जो कार्यकर्ता पार्टी और पार्टी नेतृत्व के लिए तन-मन-धन लगाकर जान न्यौछावर करने को तैयार रहता था आज अजीब कसमकश में फंसा हुआ है।
पूरे प्रदेश का बहुतायत अधिकारी वर्ग लूट में तल्लीन है,सरकार का कोई भय नही है,कार्यकर्ताओ की कोई परवाह नही है,ऐसे में लगाम कसना जरूरी है।
मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी द्वारा इलाहाबाद के कमिश्नर से यह पूछना कि"क्या पैसा देकर पोस्टिंग कराई है" यह सिद्ध करता है कि अधिकारियो की ट्रांसफर -पोस्टिंग में मुख्यमन्त्री द्वारा कहीं भी पैसा नही लिया जाता है फिर भी अधिकारियो का बेलगाम होना उनकी बिगड़ैल मानसिकता को दर्शाता है।इन बिगड़ैल अधिकारीयों के पेंच कसे जाने जरूरी हैं जिसकी शुरुवात मुख्यमन्त्री जी ने इलाहबाद और फतेहपुर से कर दिया है।
पूरे प्रदेश में यह मुहिम चलनी चाहिए।जनता में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को आत्मविश्वास से लबरेज करने और अधिकारियो की कार्य संस्कृति को सकारात्मक बनाने के लिए सख्ती जरूरी है जिसकी शुरुवात कर मुख्यमन्त्री जी ने सराहनीय कार्य किया है।यह कार्य अनवरत जारी रहना चाहिए नही तो सन्देश और संकेत बेहतर नही हैं।
****अम्बेडकर विरोधियों में अम्बेडकर समर्थक होने की मची जंग...

"दुकानदार तो मेले में लुट गए यारों,
रहजन दुकाने सजा के बैठ गए।।"
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हम घर खुला छोड़ दिए हैं और राहजनी करने वाले सब कुछ लूटने पर आमादा हैं।हम बेफिक्र हैं,राहजनो की खुशामद में संलिप्त हैं।हम यह समझ रहे हैं कि ये हकमार हमे हमारा हक दिलाएंगे।हम यह नही समझ रहे कि आजादी के बाद मिली थोड़ी-बहुत सहूलियतों से इकट्ठा हुयी हमारी पूंजी इन हजार साल से लूट में सन्नद्ध लुटेरों को अंदर तक साल रही है।ये लुटेरे हमारे पास हमारा हक देने या दिलाने नही अपितु लूटने और लुटवाने आ रहे हैं।
जिस अम्बेडकर साहब को घड़े से पानी नही पीने दिया गया,बारजा के नीचे बारिस से भीगने से बचने के लिए खड़ा नही होने दिया गया,क्लासरूम के अंदर बैठकर पढ़ने नही दिया गया,कुएं से पानी पी लेने पर बुरी तरह पीटा गया,गेंद से खेलने नही दिया गया,घूरे से खेलना पड़ा,तालाब का पानी पीने से रोका और मारा गया,रहने के लिए क्वार्टर नही दिया गया,कचहरी में कुर्सी पर बैठने नही दिया गया,दफ्तर में चपरासी हाथ से फ़ाइल नही दिया,पंढरपुर मन्दिर में घुसने नही दिया गया,लन्दन में एक भारत रत्न पण्डित मदन मोहन मालवीय जी ने दूसरे भारत रत्न बाबा साहब अम्बेडकर को अपनी गिलास में पानी पीने को नही दिया,गांधी जी द्वारा अधिकार छीनने के लिए आमरण अनशन कर दिया गया और अम्बेडकर साहब को पूना पैक्ट के लिये मजबूर किया गया,आज वही कांग्रेस और हिन्दू महासभा/जनसंघ/भारतीय जनता पार्टी अम्बेडकर साहब के सबसे बड़े अलमबरदार बनने की कुचेष्टा में लगे हुए हैं परन्तु हम बेपरवाह सो रहे हैं।
बाबा साहब हम पिछड़ों और दलितों के हैं लेकिन हमे इसकी चिंता नही है कि बाबा साहब का नाम लेकर कोई हमारे घर में घुसने की फ़िराक में है।ठीक वैसे ही जैसे आर्य यूरेशिया से आकर हम पर छा गए।हम न सतर्क हो रहे हैं और न सचेष्ट,हम बिलकुल निद्राग्रस्त हैं और हमारे जगते-जगते वे हमे हमारे घर से बाहर कर चुके होंगे,ठीक वैसे ही जैसे यहां का मूलनिवासी आज असुर,राक्षस,अनार्य,अछूत,शूद्र,पिछड़ा,दलित,आदिवासी,जंगली बन हजार वर्ष से अधिकारविहीन मारा-मारा फिर रहा है।इसलिए ऐ अम्बेडकर साहब के कुल-परम्परा के लोगो!सतर्क हो जाओ,अपने पूर्वज को सहेजो,उनकी सुनो,उनके बताये रास्ते पर चलो,उन्हें आत्मसात करो वरना बेड़ा गर्क ही है

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"भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाय"-स्वरूपानन्द सरस्वती.....
बहुजनो!साजिश समझो।हिन्दू राष्ट्र 85%की गुलामी की जंजीर और हथकड़ी है*****
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इस कथित शँकराचार्य ने फिर चोंच खोला।
स्वयंभू शँकराचार्य श्री स्वरूपानन्द सरस्वती महोदय ने भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग अपने शिष्य माननीय मोदी साहब से कर दी है।
कुछ बहुजन साथी भी हिन्दू और हिन्दू राष्ट्र के लिए परेशान रहते हैं।ये स्वरूपानन्द जी महाराज परेशान हों तो हमे कोई दिक्कत नही है लेकिन जब हमारा बहुजन भाई इसके लिए परेशान होता है और अल्पसंख्तक के खिलाफ जहर उगलता है तो बड़ी पीड़ा होती है और उसकी नासमझी पर कोफ़्त भी होता है।
आखिर भारत के अहिंदू राष्ट्र रहने या धर्मनिरपेक्ष देश होने से दिक्कत क्या है?क्या मन्दिर बनने बन्द हैं,बहुजनो की धर्म के नाम पर ठगी बन्द है,इन कथित सन्तों की मुफ्तखोरी समाप्त है,कथा,ब्रत,पूजा,हवन,यज्ञ,दान-स्नान पर रोक है,इनके भूसुर बने रहने में कोई कठिनाई है,इनकी प्रेमपूर्ण लूट पर पाबन्दी है,इनके वैदिक इंतजामो में कोई खलल है?सब कुछ तो सनातन परम्परा के अनुसार हो रहा है।हाँ ,केवल एक बुनियादी चीज बदली है,वह है सबको शिक्षा का अधिकार,समता,समानता,विशेष अवसर का जो सिद्धांत उन्हें हजारों वर्ष से प्राप्त था वह उलटकर बहुजनो को मिल गया है।
ये शँकराचार्य,भाजपाई,दक्षिणपंथी,हिंदूवादी,अभिजात्यवर्गीय लोग हिन्दू राष्ट्र की बात इसी होशियारी में करते हैं कि हम वर्तमान धर्म निरपेक्ष भारतीय ढांचा के रहते बहुजनो से उनको मिला यह विशेष अवसर का परमाणु बम वापस नही ले सकते हैं।इसे वापस लेने का सीधा-सरल उपाय हिन्दू-हिन्दू कहके,बहुजनो को गैर हिंदुओं (अल्पसंख्यको)के विरुद्ध भड़का के, हिन्दू राष्ट्र को इसका सरल उपाय समझा के ही आसानी से वापस ले सकते हैं।
बहुजन समाज के 85% दलित-पिछड़े कथित हिंदुओं!आप सोचो कि आखिर हिन्दू राष्ट्र बनने से आपको क्या लाभ मिल जाएगा?आखिर किस मुसलमान,सिख,ईसाई,पारसी ने आपके पढ़ने,लिखने,रोजगार पाने,आरक्षण पाने,सामाजिक सम्मान पाने का विरोध किया है?यदि आपके विशेष अवसर या अधिकार का विरोध किसी अल्पसंख्यक समाज ने नही किया है तो आपका दुश्मन देश का धर्मनिरपेक्ष स्वरुप है या हिन्दू ,हिंदुत्व या हिन्दू राष्ट्र की कल्पना?
हिन्दू राष्ट्र इस देश के बहुजनो के लिए गहरे अंधे सुरंग में ढकेलने की गहरी साजिश का हिस्सा है।इसलिए सावधान बहुजनो!हमे हिन्दू राष्ट्र नही ,धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र चाहिए,हमे हिंदुत्व नही बन्धुत्व चाहिए,हमे शँकराचार्य नही सद्भावचार्य चाहिए।यह हिन्दू राष्ट्र हम 85% वालो को मनुवाद के काल के गाल में ढकेलने की साजिश का हिस्सा है।
बहुजनो!सावधान रहो इस हिन्दू और हिंदुत्व के मोहपाश से।

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नकली समाजवादी ;

स्वयंभू ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष श्री के सी पाण्डेय जी के लिए अब (सपा) अंगूर खट्टे हैं......

आइये आपको ब्राह्मण महासभा के स्वयंभू राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के सी पाण्डेय जी से मिलवाते हैं जो हमारे बगल के जनपद गोरखपुर के रहने वाले हैं।इनकी महत्वाकांक्षा ऐसी हिलोरे मारती है कि पूछिये मत।ये खुद को ब्राह्मण समाज का अगुवा,स्वयंभू राष्ट्रीय अध्यक्ष बने फिरते हैं।कुशीनगर पडरौना में ये एक बार इसी तरह ब्राह्मण समाज को अपने स्वार्थ में उपयोग करने की मृग मरीचका में चले गए जहां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री विजय दीक्षित जी ने इन्हें खदेड़ लिया लेकिन इन्हें मान-अपमान का कोई भय या लाज नही है।ये अपने मिशन में लगे हुए हैं कि किस तरीके से ये सांसद/विधायक बन जांय।ऐसे लोग सफल भी हो जाते हैं।नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी को ऐसे लोग तिलक-चन्दन लगा के,पीला दुपट्टा ओढ़ाके,प्रसाद खिलाके अपना उल्लू सीधा भी कर लेते हैं क्योकि बहुजन समाज बहुत सीधा और दानी प्रबृत्ति का होता है।
गोरखपुर के चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से हमलोग श्री केशव यादव या राम नक्षत्र यादव को टिकट देने की सिफारिश किये थे तथा चाहते थे लेकिन इस के सी पाण्डेय जी की इस चालाकी के सामने हम बहुजनो की एक न चली और अपने बिलकुल लभुआ बेटे को ये टिकट दिलाने में कामयाब हो गए भले ही ब्राह्मणों के साथ बहुजनो ने उसे नकार दिया।
2012 में सरकार बनने के बाद ये स्वयंभू ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंत्री का ओहदा और दारुल शफा में फ़्लैट/कार्यालय पाने में कामयाब हो गए लेकिन पार्टी को इसका लाभ न मिलना था न मिलेगा।हाँ इनकी गणेश परिक्रमा से इन्हें तत्कालीन लाभ जरूर मिल गया।
विधान परिषद के मनोनीत सदस्यों की सूची जारी होने के बाद इनकी इच्छाएं धाराशायी होती दिखीं हैं तो ये अब बगावत का झंडा उठा रहे हैं या प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे हैं।इन्हें अब समाजवादी पार्टी की वादाखिलाफी नजर आने लगी है।इन्हें मंत्री रहते या बेटे को टिकट दिलवाते वक्त नेताजी और सपा अच्छी लग रही थी लेकिन अभी पैदल हैं तो इन्हें गाय,गंगा,ब्राह्मण याद आ रहे हैं।जब ये जनाब मंत्री थे तो गो तस्करी में इनका नाम उछला था।गोंडा के एस पी ने गो तस्करो की सिफारिश का इनका टेप सुनाया था लेकिन बेचारे अब मंत्री नही हैं इसलिए गो रक्षा की बड़ी याद आ रही है।
बेचारे के सी पाण्डेय जी! मुझे भी सहानुभूति है इस स्वयंभू ब्राह्मण नेता से।ऐसे फर्श से अर्श पर और अर्श से फर्श पर लाना ठीक नहीं।नेताजी! इन पर ध्यान जरूरी है।

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समाजवादी सरकार की खामियां ;

आदरणीय मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी!
देवरिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध जाँच हेतु आप द्वारा निर्देशित किये जाने के बाद संयुक्त सचिव जाँच अधिकारी बेसिक शिक्षा श्री अमिताभ त्रिपाठी जी ने उत्तर प्रदेश शासन ,बेसिक शिक्षा विभाग संख्या-11/संस(अ)-2015,लखनऊ:दिनांक 08 मई 2015 द्वारा जाँच हेतु साक्ष्य उपलब्ध करने के लिए शिकायत कर्ता श्रीमती सीता भूषण यादव को 22 मई 2015 को लखनऊ सचिवालय में बुलाया था।
महोदय!श्रीमती सीता भूषण ,उपाध्यक्ष दी देवरिया-कसया जिला सहकारी बैंक ने करीब 60 पन्ने का साक्ष्य मय नोटरी बयान हलफी के संयुक्त सचिव महोदय को उपलब्ध करा दिया।
विगत पांच माह से आप द्वारा दिए जा रहे निर्देशों पर अधिकारी केवल साक्ष्य मांग रहे हैं जबकि साक्ष्य देने के बाद वे उस साक्ष्य और जाँच पर कुंडली मारकर बैठ जा रहे हैं।
इस जाँच का हश्र क्या होता है यह तो पता नही लेकिन विगत के सारे जाँच मृतप्राय ही कर दिए गए हैं।
प्रमोशन,सस्पेंशन,बैड इंट्री का खेल खेलकर यह बी एस ए करोड़ो रूपये का वारा-न्यारा कर रहा है और उसी में से ऊपर चटा रहा है।
माननीय मुख्यमन्त्री जी! हम धैर्य रखे हुए है लेकिन आपके अधिकारी बेलगाम होते जा रहे हैं।

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माननीय मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी!
15 जून 2015 को जिलाधिकारी देवरिया के
कार्यालय पर धरना
तथा
24 जून 2015 को लखनऊ समाजवादी पार्टी के
प्रदेश कार्यालय पर सपाइयों का धरना
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माननीय मुख्यमन्त्री जी!जब आप किसी भ्रष्ट अधिकारी के विरुद्ध जाँच के आदेश दें और आपके अधिकारी उन आदेशों को 5-5 महीने तक लटकाये रखें तो आपके कार्यकर्ताओं के समक्ष रास्ता क्या बचता है?
आपके हुक्म को न मानने वाले इन अधिकारियो को बेनकाब करने के लिए सिर्फ और सिर्फ "आंदोलन" ही एकमात्र रास्ता बच जाता है।इसलिए समाजवादी पार्टी रामपुर कारखाना क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने तय किया है कि वे अपने सक्रिय सदस्यता की रसीदें गले में लटका कर 15 जून को देवरिया जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना देकर देवरिया के भ्रष्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी के काले कारनामो को सार्वजनिक तौर पर उजागर करेंगे तथा अधिकारियो को इस बात के लिए चेतायेंगे कि वे यदि हमारे माननीय मुख्यमन्त्री के आदेशों को नही मानेगे तो सपाई आंदोलन का भी रास्ता अख्तियार कर सकते हैं।
24 जून 2015 को सपाई देवरिया से बस में भरकर लखनऊ पहुंचकर हाथों में सपा का झंडा और बी एस ए के विरुद्ध तख्ती लेकर और गले में सक्रिय सदस्यता की रसीदें टांगकर विक्रमदित्य मार्ग स्थित कार्यालय पर प्रदर्शन कर बीएसए की मनमानी और भ्रष्ट आचरण की जानकारी पार्टी को मुहैया कराएंगे।पार्टी कार्यकर्ता यह बताने के लिए पार्टी कार्यालय पर धरना देंगे कि प्रदेश में अधिकारी भ्रष्ट हो रहे हैं।मुख्यमन्त्री जी की सहृदयता का बेजा लाभ उठा रहे अधिकारियो के प्रति हद से अधिक लिबरल रहना उचित नही है।
15 जून को देवरिया के डी एम और जिला प्रशासनके विरुद्ध सपा कार्यकर्ता धरना देंगे और फिर 24 जून को लखनऊ कूच करेंगे।मुख्यमन्त्री जी आप तक सही बात पहुंचाने की कार्यवाही जारी है।उम्मीद है की परिणाम बेहतर आएंगे।

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माननीय मुख्यमन्त्री श्री अखिलेश यादव जी!
भ्रष्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी देवरिया श्री मनोज कुमार मिश्र आपके आदेशो को ठेंगा दिखाते हुए जमकर लूटपाट मचाये हुए है।आपने सहकारी बैंक देवरिया की उपाध्यक्ष श्रीमती सीता भूषण के शिकायतों पर सात जाँच आदेश दे रखे हैं लेकिन अधिकारी कान में तेल डाले पडे हुए है।
इस बी एस ए श्री मनोज कुमार मिश्र पर गोरखपुर में बसपा राज में तत्कालीन कमिश्नर ने आपराधिक मुकदमा लिखा रखा है जिसमे ये जेल जा चुके हैं।एक ऐसा व्यक्ति जिस पर भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा दर्ज हो और जेल यात्रा कर चुका है उसे कौन सी मजबूरी है कि बी एस ए बनाये रखा गया है?क्या ईमानदार या निष्कलंक अधिकारियो की कमी हो गयी है?माननीय बेसिक विभाग के आला पदाधिकारियों को ये क्यों पसन्द है जबकि इनके भ्रष्टाचार के पुख्ता साक्ष्य शिकायतों के साथ सीता भूषण जी ने संलग्न कर रखे हैं।
महोदय आपने जनवरी से मई तक सात जाँच आदेश दे रखे हैं किन्तु इनके मैनेजमेंट के समक्ष आपके आदेश-निर्देश बेअसर हैं।
एक भ्रष्ट अधिकारी ऐसे डंके के चोट पर जिले को लूटता रहेगा और आपके अधिकारी आपकी अनिच्छा और आप द्वारा कार्यवाही व जाँच के आदेश के वावजूद उसे संरक्षित करते रहेंगे ,यह अत्यंत आश्चर्यजनक है।
महोदय!इस भ्रष्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री मनोज कुमार मिश्र के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित कर भ्रष्ट अधिकारियो को यह सन्देश देने की महती कृपा करेंगे की वे आपकी सहृदयता का बेजा लाभ न उठायें।

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सामाजिक सरोकार और राजनीती ;

लैपटाप वितरण में पिछड़ों का आरक्षण न होना दुखद निर्णय......
¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢¢
उत्तर प्रदेश सरकार के एक निर्णय ने मुझे मर्माहत किया है।आज उस सवर्ण वी पी सिंह जी का जन्मदिन (25 जून1931)है जिन्होंने पिछडो के लिए मण्डल कमीशन लागू किया जबकि कल (26 जून 1874) छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती है जिन्होंने पिछडो/वंचितो के लिए राजा होने के वावजूद आरक्षण की अवधारणा दी तथा ब्राह्मणों को दरकिनार कऱ इन उपेक्षित लोगो को सम्मान प्रदान किया पर संवैधानिक प्रविधानो,सुप्रीम कोर्ट से विजय के बावजूद उत्तर प्रदेश में पहले कन्या विद्याधन में तथा अब लैपटाप में पिछड़ों के लिए कोई आरक्षण नही दिया गया हैं जो अत्यंत सोचनीय है।
मैं समझता हूँ कि यह समाजवादी पार्टी के लिए नुकसान देह निर्णय है।इस निर्णय से भारतीय जनता पार्टी जैसी धर्मवादी पार्टियो को ही लाभ होगा।मेरी समझ से यह फैसला पिछडो को पार्टी से दूर करेगा तो वही हिंदुत्व वादी शक्तियों को मजबूत करेगा।
अखबारो में सरकार के फैसले को पढ़कर बड़ी निराशा हुयी कि आखिर समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार किस परिकल्पना पर काम कर रहे है?वे नेतृत्व को कौन सी रणनीति समझा रहे हैं?पिछड़ा वर्ग सरकार और पार्टी के एजेंडा से बाहर क्यों होता जा रहा है?
हम इधर लखनऊ में बड़े-बड़े होर्डिंग देख रहे हैं जिसमे आजमगढ़ अनुसूचित सम्मेलन में चलने की अपील की गयी है।मैं सोच रहा हूँ कि इस सम्मेलन की जरूरत क्या है?इस सम्मेलन में बोला क्या जाएगा?इस सम्मेलन में क्या यह सवाल नही उठेगा कि आज आप अनुसूचित सम्मेलन कर रहे हैं तो ये बताएंगे कि पिछले विधानसभा में धोबी,धुसाध,पासी,गोंड,धरिकार आदि sc जातियों ने जो वोट दिया था उसके बदले में आपने प्रमोशन में आरक्षण का विरोध किया,ठेकेदारी में sc आरक्षण का खात्मा कर हमे हमारे वोट देने का अच्छा सिला दिया है क्या?
2017 का चुनाव जब नजदीक आएगा तो पिछड़ा वर्ग सम्मेलन भी होंगा ही फिर क्या वहां ये सवाल नही उठेंगा कि पिछड़ा नेतृत्व ,पिछड़ों की पार्टी और पिछड़ों की सरकार ने संघलोकसेवा आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षण रहने के बावजूद उत्तर प्रदेश में लोकसेवा आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षन क्यों वापस लिया?पिछड़ों को ठेके में आरक्षण क्यों नही दिया?पिछडो को प्रोन्नति में आरक्षण क्यों नही दिया?पिछड़ों को कन्या विद्याधन व लैपटाप में आरक्षण क्यों नही दिया? क्या ये सवाल और इनके दुष्परिणाम पार्टी समझ नही रही है?
मैं समाजवादी पार्टी का दूसरी पीढ़ी का कार्यकर्ता हूँ।मेरे पिताजी डा लोहिया के अनन्य सहयोगी थे और मैं भी समाजवाद को आत्मसात करने की कोशिश करता हूँ पर तब निराशा होती है जब अपना नेतृत्व निर्णय में चूक कर बैठता है।मैं बड़ा निराश हूँ इन चीजो को देखकर???
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पुराने समाजवादी नेता श्री उमेश सिंह रौतेला जी से मिलना हुआ।
अद्भुत व्यक्तित्व के धनी हैं रौतेला जी......
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खटीमा के अमर उजाला कार्यालय में पुराने समाजवादी नेता श्री उमेश सिंह रौतेला जी से मुलाक़ात हुयी।रौतेला जी लगभग 70 की उम्र में भी बड़े जीवंत हैं।फिलवक्त वे प्रदेश विभाजन के बाद कांग्रेस में सक्रिय हैं लेकिन ठाकुर होने के बावजूद उपेक्षित समाज की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने वाले रौतेला जी "राजी"जनजाति के उत्थान के लिए लम्बे समय तक सक्रिय रहे हैं।
रौतेला जी 1994 में श्री मुलायम सिंह यादव जी द्वारा समाज कल्याण विभाग में सलाहकार बनाये गए थे जिन्हें राज्यमन्त्री का दर्जा था।पूरे उत्तराखण्ड से रौतेला जी अकेले दर्जा प्राप्त मंत्री थे।
रौतेला जी ने बताया कि उत्तराखण्ड के इतिहास में मुलायम सिंह यादव जी पहले और अब तक के आखिरी मुख्यमन्त्री हैं जिन्होंने पिथौरागढ़ में पूरे 24 घण्टे गुजारे और 200 करोड़ रूपये की योजनाये तत्काल दिए।
रौतेला जी ने बताया कि मुझे कैबिनेट मंत्री श्री राजबहादुर जी के साथ राज्य मंत्री का दर्जा देकर लगाया गया था।उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश एक था तो मैं समाजवादी पार्टी में उत्तराखण्ड से महत्वपूर्ण नेता था जिसे नेताजी बहुत सम्मान देते थे।रौतेला जी से अल्प समय में बहुत ही गूढ़ और बृहद चर्चा हो गयी।मुझे पहली मुलाक़ात में ही लगा कि रौतेला जी जैसे राजनैतिक/सामाजिक कार्यकर्ता बिरले होंगे।
रौतेला जी को अभिवादन!
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प्रीम कोर्ट से विजय के बावजूद उत्तर प्रदेश में पहले कन्या विद्याधन में तथा अब लैपटाप में पिछड़ों के लिए कोई आरक्षण नही दिया गया हैं जो अत्यंत सोचनीय है।
मैं समझता हूँ कि यह समाजवादी पार्टी के लिए नुकसान देह निर्णय है।इस निर्णय से भारतीय जनता पार्टी जैसी धर्मवादी पार्टियो को ही लाभ होगा।मेरी समझ से यह फैसला पिछडो को पार्टी से दूर करेगा तो वही हिंदुत्व वादी शक्तियों को मजबूत करेगा।
अखबारो में सरकार के फैसले को पढ़कर बड़ी निराशा हुयी कि आखिर समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार किस परिकल्पना पर काम कर रहे है?वे नेतृत्व को कौन सी रणनीति समझा रहे हैं?पिछड़ा वर्ग सरकार और पार्टी के एजेंडा से बाहर क्यों होता जा रहा है?
हम इधर लखनऊ में बड़े-बड़े होर्डिंग देख रहे हैं जिसमे आजमगढ़ अनुसूचित सम्मेलन में चलने की अपील की गयी है।मैं सोच रहा हूँ कि इस सम्मेलन की जरूरत क्या है?इस सम्मेलन में बोला क्या जाएगा?इस सम्मेलन में क्या यह सवाल नही उठेगा कि आज आप अनुसूचित सम्मेलन कर रहे हैं तो ये बताएंगे कि पिछले विधानसभा में धोबी,धुसाध,पासी,गोंड,धरिकार आदि sc जातियों ने जो वोट दिया था उसके बदले में आपने प्रमोशन में आरक्षण का विरोध किया,ठेकेदारी में sc आरक्षण का खात्मा कर हमे हमारे वोट देने का अच्छा सिला दिया है क्या?
2017 का चुनाव जब नजदीक आएगा तो पिछड़ा वर्ग सम्मेलन भी होंगा ही फिर क्या वहां ये सवाल नही उठेंगा कि पिछड़ा नेतृत्व ,पिछड़ों की पार्टी और पिछड़ों की सरकार ने संघलोकसेवा आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षण रहने के बावजूद उत्तर प्रदेश में लोकसेवा आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षन क्यों वापस लिया?पिछड़ों को ठेके में आरक्षण क्यों नही दिया?पिछडो को प्रोन्नति में आरक्षण क्यों नही दिया?पिछड़ों को कन्या विद्याधन व लैपटाप में आरक्षण क्यों नही दिया? क्या ये सवाल और इनके दुष्परिणाम पार्टी समझ नही रही है?
मैं समाजवादी पार्टी का दूसरी पीढ़ी का कार्यकर्ता हूँ।मेरे पिताजी डा लोहिया के अनन्य सहयोगी थे और मैं भी समाजवाद को आत्मसात करने की कोशिश करता हूँ पर तब निराशा होती है जब अपना नेतृत्व निर्णय में चूक कर बैठता है।मैं बड़ा निराश हूँ इन चीजो को देखकर???
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"जिसे मिस्री समझता था वो निकला नून(नमक) का रोड़ा।"
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वाह माझी जी सत्ता हाथ से निकलते ही सिद्धांतो का अंत हो गया।क्या ऐसे ही होंगे हम दलितों /पिछड़ों के महानायक?क्या रामविलास पासवान जी,उदित राज जी,रामदास आठवले जी,हुकुमदेव नारायण यादव जी आदि की तरह ही हमारे माझी साहब भी अब मनुवाद की गोद में बैठकर पूरे उपेक्षित समाज को उपेक्षा का दंश दे जाएंगे?

मैंने मांझी जी में अपने महानायक की छबि देखी थी।मैं यह सोच रहा था कि यह गरीब का बेटा जैसा बोल रहा है आजन्म वैसा ही आचरण करता रहेगा पर......

मांझी जी आप सवर्णों को विदेशी बोले।आपके मन्दिर प्रवेश पर मन्दिर धोया गया।आप ने चुनौती दिया कि क्या मोदी जी दलितों के साथ बैठकर चूहा खा सकते हैं?माझी जी आपने जितना बोला वह इस देश के मूलनिवासियो के दिल को छू गया।आप रातोरात इनके महानायक हो गए पर.....

मांझी जी हम उनसे न शिकायत करेंगे ,न उनसे कोई उम्मीद रखते हैं जो आरपार बोल नही सकते लेकिन आपने आरपार बोलकर एक उम्मीद की किरण जगाई थी बहुजन वादी सोचके लोगों में पर...........

मांझी जी आप तो बड़बोले और ऐन मौके पर नाड़ा खोले दिख रहे हैं।आप मूलनिवासी-मूलनिवासी कहते-कहते "हिंदुस्तान आवाम मोर्चा"नाम से दल बना बैठे।भारत की जगह आपको हिंदुस्तान नाम भाया और फिर हिंदूवादी दल भी भा गया।मांझी जी आपतो भाजपा से मिलकर विधायक बन जाएंगे पर आपके कथनानुसार एक गलत आदमी नितीश कुमार ने आपको अपना ताज दे दिया था,क्या भाजपा आपको सीएम उम्मीदवार घोषित कर चुनाव लड़ेगी?यदि हाँ तो आप उन्हें विदेशी कहने की क्षमता रख पाएंगे?यदि नही तो मांझी जी आपने एम एल ए बनने के लिए क्यों पूरे बहुजन समाज को गिरवी रख दिया।मांझी जी आपतो विधायक बन जाएंगे पर......
माझी जी अब मूलनिवासियों का क्या होगा?मांझी जी अब विदेशियो का क्या होगा?मांझी जी अब उपेक्षित जमातों का क्या होगा?आप तो उनकी गोद में बैठ गए पर........
मांझी जी आज भाजपा आप पर डोरे डाल रही है।इस लायक आपको किसने बनाया?आपकी पूछ क्यों विदेशी लोग कर रहे हैं?आपके साथ जो चूहा नही खा सकता वह आपको गोद उठाने को तैयार क्यों है?मांझी जी आज आप की जो पूछ है वह नितीश कुमार द्वारा दिया गया आपको मुख्यमन्त्री पद है।आपने कहा था कि आपके घर में कोई-देवता नही है,केवल नितीश का फोटो है?आखिर वह श्रद्धा अमित शाह के प्रति क्यों हो गयी?क्या बहुजन समाज मान ले कि आप कुर्सी के लिए कितनी भी बार केंचुल बदलते रहेंगे?
मांझी जी अपने महानायक के दुर्घटना में मारे जाने से आहत हूँ और मूलनिवासी मांझी के मनुवादी मांझी बनने के बाद मूलनिवासी मांझी की दुखद मौत से मर्माहत होते हुए अपने उस मूलनिवासी मांझी की मौत पर आज श्रद्धांजली अर्पित करता हूँ।


माझी जी ने सत्ता के लिए मनुवादियों की गुलामी स्वीकारी....
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वाह माझी जी!आह माझी जी!!
नमो!नमो!!बोलें ...अब नमो!नमो!! बोलेँ.......
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(माझी साहब की क्षमा याचना।)
आदरणीय विप्र जन!भूसुर गण!!आर्य विदेशी सज्जन!!!
तन समर्पित,मन समर्पित,धन समर्पित,आप सबके चरणों में सारा वतन समर्पित।अब मैं जीतन राम माझी अपना यह जी अपना यह तन आपके पुष्यमित्र शुंग यानि राम यानि मोदी जी और अमित शाह जी को समर्पित करता हूँ।जीतन का यह जी और तन अब राम के काम आएगा।
हे भूसुर विप्र जन!आपलोग मुझे विभीषण की तरह समझें।मैंने कुलद्रोह कर आपके चरणों में सर नवा दिया है।जैसे विभीषण ने कुलद्रोह कर अपने भाई रावण की कमजोरियों को बता कर त्रेता के राम को विजय श्री दिलाया था वैसे ही मैं भी बिहार में लालू-नितीश के नाश हेतु आपको अपना सर्वस्व समर्पित कर बलिदान देने का प्रण कर लिया है।रावण के नाश की तरह नितीश का नाश ही मेरा लक्ष्य है।इसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ।
मेरे पुराने वचन अगर आपलोगो को टीसते हों तो क्षमा करेंगे।मैंने आपलोगो को जो आर्य विदेशी कहा वह मेरी बचपना थी।मैंने जो मोदी जी को चूहा खाने को कहा वह मेरी नीचता थी।मेरे मन्दिर प्रवेश पर आपलोगो का मन्दिर धुलना सर्वथा उचित था क्योकि मैं हूँ ही उसी लायक।चरणों का धूल शूल न बन जाय इसके लिए आपलोगो द्वारा समय-समय पर मेरे जैसे क्षुद्र लोगों को औकात बताना जरूरी होता है जो आप विप्र गण ने मन्दिर धुलकर किया।
हे!मर्यादा पुरुषोत्तम राम के समर्थको!मुझे भी उसी माँझी की तरह समझो जिसने नदी पार कराया और उसके बदले में चरण धुल कर चरणामृत का पान कर इहलोक सुधार लिया और उहलोक तार लिया।मुझे भी अब मुख्यमन्त्री पद नही चाहिए।वह नितीश बावला मुझे मुख्यमन्त्री बना अपना दुश्मन बना ही लिया है,आपलोग मुझे मुख्यमन्त्री मत बनाइये,आपके पास तो अनेक भूसुर मुख्यमन्त्री बनने लायक हैं ही,आपलोग नितीश की तरह नालायक थोड़े ही हैं,हमारे जैसे तुच्छ लोगो की पहचान आपके पास है क्योकि आपलोग त्रिकालदर्शी हैं इसलिए हे!भूसुरों!मनुवादियों!मुझे बस नमो,नमो कहने देना और मोदी जी और अमित शाह जी के चरणामृत का पान करने देना,हम भी अपने पुरखों की तरह आपकी छांव में तर जायेगे।
अब यह मांझी अपना जी और तन लेकर राम की शरण में शरणागत है।अब शेष जीवन नमो-नमो कहते कट जाएगा।मुझे ज्ञान हो गया है क्योकि जय भीम से भवसागर से मुक्ति नही मिलनी।यदि भवसागर पार होना है तो जय श्रीराम बोलना होगा इसलिए अब अंत समय में भवसागर पार पाने के लिये यह माझी अपने जी और तन(जीतन) से जय श्रीराम बोलता है।
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सराहनीय है राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री रामआसरे विश्वकर्मा जी का कार्य...
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राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री श्री रामआसरे विश्वकर्मा जी एक ख्याति प्राप्त वकील भी हैं।आप इंदिरा भवन स्थित अपने कार्यालय में नित्य बैठकर सैकड़ों फाइलो को निबटाते हैं।पिछड़े वर्गो के उत्पीड़न,उनके विरुद्ध की जा रही जातिगत भेद/विद्वेष से कार्यवाहियो पर आपकी कलम पैनी और मारक रूप में चलती है।
मैं 9 जून 15 को रात में पूर्व सपाध्यक्ष श्री गेंदालाल यादव जी के साथ श्री रामआसरे विश्वकर्मा जी से उनके पार्क रोड लखनऊ स्थित आवास पर मिला।बहुत देर तक पिछड़े वर्गों की समस्याओ पर वार्ता हुयी।मैंने जब उन्हें यह प्रकरण बताया कि मेरे अवकाश पर रहने के वावजूद मेरा बेसिक शिक्षा अधिकारी जातिगत विद्वेष से मेरा तनख्वाह काट दिया है तो उन्होंने कहा कि इसे आप मेरे आयोग में दाखिल करिये।
10 जून को इसी सन्दर्भ में जब मैं उनके कार्यालय गया तो पिछड़ों के आवेदन और उनके सक्रियता के साथ निस्तारण की क्रिया देखकर आनन्दित हुआ कि श्री रामआसरे विश्वकर्मा जी अपने मिशन को बखूबी अंजाम दे रहे हैं।
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(स्मरण होगा आपको की ये शिक्षामंत्री रहते ये लूट के लिए जाने जाते थे और घूम घूम कर वसूली करते थे इनका आचरण जितना गिरा उसकी दाद देनी ही पड़ेगी-रत्नाकर )


लखनऊ का अम्बेडकर पार्क- अद्भुत,अनोखा,अतुलनीय,शानदार,जीवंत,ऐतिहासिक,अविस्मरणीय,आश्चर्यजनक,रोम-रोम पुलकित करने वाला।
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सुश्री मायावती जी ने गोमती तट पर कूड़े के ढेरों को खत्म कर बोधिसत्व बाबा साहब डा भीम राव आंबेडकर जी के नाम से इस ऐतिहासिक अम्बेडकर पार्क को बनवाके इतिहास रच दिया है।
अपने बच्चों को अम्बेडकर पार्क में घण्टो घुमाया और उन्हें बहुजन पुरखो के बारे में विस्तार से बताया।अम्बेडकर साहब,कांसीराम जी.फुले जी,गाडगे जी ,नारायणा गुरु जी,छत्रपति शाहूजी महाराज,बुद्ध,कबीर,रैदास आदि की मूर्ति लगाके मायावती जी ने निःसन्देह लखनऊ को नबाबो के शहर से बहुजनो का शहर बना दिया है।जैसे काशी और काबा को हिन्दू-मुसलमान पवित्र मानते हुए पूजते हैं वैसे ही कालांतर में लखनऊ इस स्थल के कारण बहुजनो का पूजनीय/पवित्र शहर बन जाएगा।
अम्बेडकर पार्क की जितनी सराहना की जाय वह कम होगी।इसकी बनावत,खूबसूरती की दाद देनी ही पड़ेगी।अम्बेडकर पार्क में घूमकर बच्चे बहुत खुश हुए।
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मेरे फेसबुक फ्रेंड जो शायद अनुसूचित समाज से और बसपा भक्त है का पोस्ट पढ़िए.....
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आइये आप सबको अपने एक फेसबुक फ्रेंड से मिलाता हूँ।मुझे लगता है कि ये श्री सत्येंद्र सिंह प्रताप जी अनुसूचित समाज के अपने ही कुल-खानदान के हैं।इन्होंने मेरे ऊपर एक पोस्ट डाली है जो आप सब के समक्ष है।इन्होंने मुझे अपने पोस्ट में एक साथी के कमेंट पर किये गए कमेंट में "मनुवादी" घोषित कर दिया है।इनके पोस्ट पर एक साथी श्री अमित कुमार जी ने जो शायद अनुसूचित समाज से ही होंगे, मुझे 'दोगली मानसिकता" का करार दिया है।
वाकया कुछ यूँ है कि मैंने कोई पोस्ट कल-परसो में समाजवादी पार्टी के पक्ष में डाली थी।स्वभाविक है कि जब मैं समाजवादी पार्टी में हूँ तो सपा के बारे में लिखूंगा,वह मेरा राजनैतिक पक्ष है लेकिन अपने सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष में मैंने कभी समझौता नही किया जबकि भाई सत्येंद्र जी जिनके लिए मुझे मनुवादी कह रहे हैं उन्होने बुद्ध और अम्बेडकर को पीछे छोड़कर "बहुजन" को "सर्वजन" बना दिया।अम्बेडकर साहब की 22 प्रतिज्ञाओं की ऐसी की तैसी कर "हाथी नही गणेश है,ब्रह्मा-विष्णु-महेश है" का नारा लगा दिया।
भाई सतेंद्र जी शायद आपमें इतनी साहस हो लेकिन पिछड़ा हूँ,गांव का 10 वर्ष प्रधान पत्नी रही,सपा में हूँ लेकिन घर में रावण,महिषासुर और बुद्ध का फोटो लगाये हूँ,कोई पर्व-त्यौहार नही मनाता हूँ।अनुसूचित समाज उतना सम्मान देता है तथा मैं उनके साथ इस तरीके से जुड़ा हूँ जैसे सगा भाई जुड़ा हो,फिर भी मैं मनुवादी,दोगली मानसिकता का और आप एवं आपकी बहन जी अम्बेडकरवादी!
सतेंद्र जी !मेरे घर में गणेश नही हैं पर आपकी बहन जी के घर में गणेश है।मैं किसी ब्राह्मण से राय नही लेता पर आपकी बहन जी सतीश मिश्रा जी के राय के बिना चल नही सकतीं फिर भी मैं मनुवादी हूँ और आप एवं आपकी बहन जी अम्बेडकरवादी!
सतेंद्र जी!मैं सपा में रहकर भी प्रोन्नति में आरक्षण के पक्ष में प्रदर्शन किया,लेख लिखा,अन्य उपेक्षित समाज की समस्याओ पर लिखता और अपने नेतृत्व से संघर्ष करता हूँ तो मैं दोगली मानसिकता का और आपकी बहन जी प्रदेश लूटती और लूटवती हैं तो वे और आप नेक!
सतेंद्र जी!बहन जी ने पी सी एस में ओवरलैपिंग आरक्षण का विरोध किया,ठेके में पिछडो को आरक्षण नही दिया,बैकलाग भर्ती में पिछडो को बिलग रखा,पिछड़ों के लिए कोई योजना नही चलाई तो मैं उनका गुणगान करूँ और जिस मुलायम ने sc/st को पंचायत चुनाव में आरक्षण दिया,दलित ऐक्ट पर मुआवजा दिया,1989 की गवर्नमेंट में बाबा साहब को भारत रत्न मिले इसकी मांग किया,सर्वाधिक अनुसूचित विधायक जिताया उनका विरोध करूँ!जिसने प्रदेश में मण्डल लागू किया,दलित-पिछडो को मुफ़्त दवाई,पढ़ाई,सिंचाई,एम्बुलेंस,लैपटाप,कन्याविद्याधन दिया,किसानो को पांच लाख दुर्घटना बीमा दिया उनको बुरा कहूँ?
सतेंद्र सिंह प्रतापजी!मैंने लिखा था कि भैया,बहन के लफ़ड़े में पड़े बिना यदि हम प्रबुद्ध है तो पिछड़े-दलित की एका और उनके तरक्की के लिए हमे प्रयत्न करना चाहिए लेकिन आपने अंधभक्ति में ये पोस्ट डाल दी जिस पर मजबूर होकर उपरोक्त कुछ बातें लिखनी पड़ीं जबकि मैं मायावती जी की आलोचना में संयम बरतता हूँ क्योकि कुल के बावजूद मैं उन्हें भी अपने ही कुल-खानदान का समझता हूँ पर अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके पोस्ट ने मुझे ये लिखने को मजबूर कर दिया।
भाई सतेंद्र सिंह प्रताप जी!!किसी भी दल में दो तरह के कार्यकर्ता होते हैं-एक.भक्त और दूसरे भांट।भक्त वाले कार्यकर्ता सही को सही तथा गलत को गलत कहते हैं पर ये भांट वाले कार्यकर्ता ही पार्टियो और नेताओ की भांट गिरी कर उनका बेड़ा गर्क कर देते हैं।ये भांट वाले कार्यकर्ता ऐसे होते हैं कि यदि नेता के चेहरे पर कालिख पुत गयी हो तो उसे धुलने को नही कहते वरन यह कहते हैं कि इससे तो आपकी खूबसूरती बढ़ गयी है यह आपके चेहरे पर तिल की तरह दिख रहा है।भाई सतेंद्र जी! हमे भांट बनने से बचना चाहिए।
वैसे भाई सतेंद्र जी!मैंने इतना लिख डाला जिसमे सैकड़ो शब्द हैं लेकिन मैं समझता हूँ उनसे बहस का कोई मतलब नही जिन्हें शिष्ट शब्दों का ज्ञान न हो....खैर आपके पोस्ट के लिए साधुवाद जिसपर हमे यह कमेंट लिखना पड़ा।
(सतेंद्र जी के पोस्ट व कमेंट पर कई अनुसूचित समाज के साथियो के कमेंट सधे हुए तथा पिछड़ा-अनुसूचित एका के लिए सहयोगात्मक भी है जिन्हें मैं धन्यवाद देता हूँ।)
नोट-मेरे तमाम पोस्ट आप पढ़ सकते हैं जो मेरे वाल पर पड़े हुए हैं जिसमे मैंने सपा सरकार के गलत या दिशाहीन कार्यो का विरोध किया हूँ।
जय भीम!
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जीवित देवता(माता-पिता) के लिए भरण-पोषण अधिकरण????
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मातृ देवो भवः
पितृ देवो भवः............
कैसी बिडम्बना है जिस धर्म में सैद्धांतिक तौर पर लिखा हो कि माता देवता है,पिता देवता है उस धर्म में हम पत्थर पूजने के लिए बैजनाथ धाम,मथुरा,काशी,अमरनाथ,केदारनाथ,बद्रीनाथ,द्वारिका,रामेश्वरम्,वैष्णो देवी आदि लाखों जगहों पर करोड़ों देवताओ के समक्ष मत्था टेकते हैं लेकिन घर में पड़ा देवता दो जून की रोटी के लिए तरसता है,कपड़े और बिस्तर के लिए कल्पता है और हम पत्थर पूज कर भगवान तलाशते हैं।
सरकारों को माता-पिता के पेट भर भोजन के लिए "भरण-पोषण अधिकरण" का गठन करना पड़ रहा है यह कितना शर्मनाक है।हम लाखो-करोड़ों रूपये यज्ञ,पूजा,तीर्थाटन,स्नान-दान,मन्दिर बनाने,कांवर उठाने,कथा कहलवाने आदि में लगा रहे हैं और उस पत्थर से अपेक्षा कर रहे हैं कि बहुत कुछ देगा जिसका निर्माण हमने ही छेनी-हथौड़ी से काट कर किया है लेकिन वह माता-पिता रूपी भगवान जिसने हमे हमारा वजूद दिया,गर्भ में रखा,असहय पीड़ा सह हमे जन्म दिया,अपना खून दूध के रूप में पिलाया,नहलाया,धुलाया,पहनाया,पढ़ाया और लायक बनाया उसके लिए भरण-पोषण अधिकरण बनाना पड़ रहा है।
"कस्तूरी कुण्डल बसे मृग ढूंढे बन माहीं"-भगवान हमारे पास विराजमान है और हम जंगलो,पहाड़ों,गुफाओं,मन्दिरो ,पत्थरों में भगवान तलाश रहे हैं।माता-पिता रूपी भगवान दर-दर ठोकर खा रहा है और हम भगवान के लिए दर-दर भटक रहे हैं।कैसी विडम्बना है,हमे जिसे पूजना चाहिए,उसे दुत्कारते हैं और जिसे दुत्कारना चाहिए उसे स्वीकारते हैं,पुचकारते हैं।
मैं तो यही कहता हूँ कि अगर संसार में कोई भगवान है तो वे माँ-बाप है ,इसलिये पूजा इन्ही की होनी चाहिए।
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श्रीमद्भागवात ज्ञान यज्ञ के लिए चन्दा मांगने आये लोगो को ज्ञान मन्दिर(स्कूल )या ऐसे जनोपयोगी संस्थान बनाने की अपील कर चन्दा देने से साग्रह इनकार किया....
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17 से 24 जून 2015 तक श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन मेरे जनपद देवरिया के कुशहरी गांव में हो रहा है।मेरे एक अजीज साथी जो मुस्लिम अंसारी हैं आज 14 जून 2015 को चन्दा हेतु आये।उनके साथ तीन ब्रह्मणगण भी थे।मैंने उनसे आने का कारण और क्या आदेश है पूछा तो मेरे साथी ने कहा कि आदेश नही निवेदन है।मैंने पूछा क्या तो उन्होंने कहा कि हमारे गांव में यज्ञ हो रहा है जिसमे आना है और सहयोग चाहिए।मैं कुछ क्षण ठिठका फिर उनसे कहा कि क्षमा करेंगे मैं नास्तिक हूँ,यज्ञ,पूजा,ब्रत,स्नान आदि का विरोधी हूँ इसलिए न चन्दा दे सकता हूँ और न ऐसे आयोजन में आ ही सकता हूँ।
हफ्ता दिन बाद लखनऊ से घर आने के कारण मेरा बैठका उस समय लोगों से भरा हुआ था जब यह वार्तालाप हो रहा था तो बैठका में बैठे भिन्न-भिन्न गांवों से आये लोग चुपचाप मेरी बात सुन रहे थे।
मैंने अपने मित्र और उन आगन्तुकों को अपने सर के ऊपर टँगे चित्र की तरफ इशारा किया और कहा कि देखिये मैं रावण,महिषासुर और बुद्ध का चित्र टांगे हूँ।मैं रावण,महिषासुर व हिरणकश्यप आदि को मानता हूँ तो फिर कैसे इनके हत्यारो का यज्ञ कराने के लिए चन्दा दूंगा।
मैंने फिर गुड़ मंगाया,उनलोगो को पानी पिलाया,चाय पिलाया और फिर बहस के दौरान कहा कि जो चीजे गुड़,तिल,चावल,घी आदि इंसान खाने को नही पाता उन्हें यज्ञ के नाम पर जलाना कहाँ तक उचित है।मैंने उनसे कहा कि यज्ञ में इन खाद्य पदार्थो के जलाने से जो धुवां निकलता है वह हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक है इसलिए मेरे जैसा व्यक्ति इसके लिए चन्दा कैसे दे सकता है?मैंने कहा स्कूल,अनाथालय,रैन बसेरा ,छात्रावास आदि बने तो मैं सामर्थ्यनुसार चन्दा दे सकता हूँ लेकिन यज्ञ के लिए क्षमा करेंगे मैं चन्दा नही दे सकता।
मेरे इस साग्रह इनकार पर उक्त लोग हंसने लगे और प्रणाम कर चले गए।

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देवरिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री मनोज कुमार मिश्र के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सीता भूषण जी पिछले पांच माह से संघर्षरत हैं।इसी क्रम में उक्त धरना आयोजित था लेकिन शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और उनके आश्वासन के बाद उक्त निर्णय सीता भूषण यादव ने लिया है।
उन्होंने सभी शुभेच्छुजनो से निवेदन किया है कि जाँच रिपोर्ट निदेशक बेसिक इलाहबाद के वहां पड़े होने और उसके लखनऊ शासन में पहुंचने पर कार्यवाही होने का आश्वासन मिलने के कारण जो कार्यक्रम स्थगित किया है वह किन्ही कारणों से जून माह में निस्तारित नही होता है तो जुलाई में आरपार के संघर्ष में सहयोग करेंगे।
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मासिक "सोशलिस्ट फैक्टर" इंग्लिश में जून 2015 से प्रकाशित
प्रकाशक श्री फ्रैंक हुजूर अंतर्राष्ट्रीय लेखक
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अंतर्राष्ट्रीय लेखक फ्रैंक हुजूर साहब पूरी दुनिया के सोशलिज्म को भारत के सोशलिस्ट समर्थको में और दुनिया भर में भारत के सोशलिस्ट आंदोलन को बताने और जताने के लिए "सोशलिस्ट फैक्टर" नामक इंग्लिश मासिक पत्रिका की शुरुवात कर रहे हैं।
यह "सोशलिस्ट फैक्टर" पत्रिका जून 2015 से प्रकाशित है।इसका तेवर और कलेवर कैसा होता है यह तो आने के बाद पता चलेगा लेकिन फ्रैंक साहब जितने फ्रैंक हैं उम्मीद है उतनी ही फ्रैंक यह पत्रिका भी होगी।
मैंने भी इसमें एक पूर्व विधायक श्री बदरी राम जी का संस्मरण लिखा है।बहुत जल्दबाजी में मैंने यह लेख लिखा है जिसे आदरणीय फ्रैंक साहब ने स्थान दिया है,इसके लिए उन्हें धन्यवाद।
जो भी सजग और प्रबुद्ध साथी हैं उनसे अनुरोध है कि वे अपना नाम,पता और मोबाइल नम्बर कमेंट में डालें,जिससे उन्हें पत्रिका भेजी जा सके,ऐसा अनुरोध फ्रैंक साहब ने किया है।
socialistfactor@gmail.com पर देखें और जानकारी,पता आदि भेजें।।
फ्रैंक साहब को एक उम्दा पत्रिका निकालने के लिए धन्यवाद!
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अंतर्राष्ट्रीय लेखक एवं विचारक श्री एच एल दुसाध जी को शादी की पचासवीं वर्ष गांठ मुबारक!🌷🌷🌷🌷🌷
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"जिसकी जितनी संख्या भारी।
उसकी उतनी हिस्सेदारी।।"
डाइवर्सिटी के सिद्धांत पर अनवरत कार्यरत श्री एच एल दुसाध जी एक विद्वान,लेखक,वक्ता,स्तम्भकार,कलम के सिपाही हैं।दुसाध सर जितने अच्छे लेखक हैं उतने ही अच्छे और सहृदय इंसान भी हैं।संयोग है कि मेरे जनपद देवरिया के ही निवासी हैं।वैसे आप रहते लखनऊ और दिल्ली ही हैं लेकिन आपका जुड़ाव अपने गांव से भी है।
दुसाध सर के शादी की गोल्डन जुबली उनके बेटे-पतोहू मना रहे हैं।संयोग है कि मैं सपरिवार लखनऊ हूँ और उनका आयोजन भी लखनऊ में ही है।कल रात दुसाध सर का आमन्त्रण आया।मुझे बड़ी प्रसन्नता हुयी।
दुसाध सर के सफल,सुखी वैवाहिक जीवन की बधाई।उनके सुदीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना।
जय भीम!नमो बुद्धाय!!
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पत्रकार हत्या: मंत्री को बचा रहे हैं मुलायम सिंह यादव?



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शाहजहांपुर
शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भारी दबाव में हैं। अखिलेश ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ इस मामले में बैठक कर आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा को बर्खास्त करने का फैसला किया था। इस बैठक में अखिलेश ने कहा था कि राममूर्ति को बर्खास्त करना चाहिए।
अंग्रेजी न्यूज चैनल सीएनएन आईबीएन ने सूत्रों के मुताबिक खबर दी है कि राममूर्ति की बर्खास्तगी पर सामाजवादी पार्टी बंट गई है। अखिलेश कैंप वर्मा की बर्खास्तगी के पक्ष में है। दूसरी तरफ समाजावादी पार्टी चीफ मुलायम सिंह और सीनियर पार्टी नेता रामगोपाल यादव को लगता है कि इस कदम से कुरमी वोट बैंक पार्टी के पाले से बिखर सकता है। शनिवार को इस मामले में 5 पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन राममूर्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
समाजवादी पार्टी एमएलए भुकल नवाब ने कहा, 'जगेंद्र सिंह के साथ जो कुछ भी हुआ वह दुखद है। हम इसकी निंदा करते हैं। लेकिन वह पत्रकार नहीं थे। वह सोशल मीडिया के जरिए लोगों को मेसेज भेजते थे। इस मामले में राममूर्ति वर्मा ने कुछ नहीं किया है। जांच में सारी चीजें स्पष्ट हो जाएंगी। यदि सीबीआई जांच की जरूरत है तो वो भी करा ली जाए। हम किसी भी जांच से डर नहीं रहे क्योंकि वर्मा पूरी तरह से निर्दोष हैं।'


राज्य सरकार ने इस मामले में सीबी-सीआईडी जांच की घोषणा की है। इसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट में सीबीआई जांच के लिए जनहित याचिका दायर की गई है। इस मामले में अन्य पार्टियों का भी दबाव राज्य सरकार पर है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा, 'यह गंभीर मामला है। कठोर कदम उठाने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। ऐसी हालत देखना अपने आप में दर्दनाक है। मंत्री को तत्काल अरेस्ट किया जाना चाहिए नहीं तो सबूत खत्म कर दिए जाएंगे।'
जगेंद्र सिंह के परिवार वालों ने दावा किया है कि पुलिस ऑफिसरों ने पेट्रोल डाल आग लगाई थी। बुरी तरह से झुलस जाने के बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। हॉस्पिटल में सिंह ने दम तोड़ दिया था। सिंह वर्मा के बारे में लगातार लिख रहे थे। वह वर्मा की अवैध खनन में संलिप्तता को उजागर कर रहे थे। इसके साथ ही सिंह ने वर्मा पर अपनी रिपोर्ट में भूमि कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए थे। कहा जा रहा है कि इन्हीं रिपोर्टों के कारण वर्मा जगेंद्र सिंह से खफा थे। वर्मा ने जगेंद्र सिंह पर झूठे केस भी दर्ज कराये थे।
हालांकि पुलिस इसे खुदकुशी बता रही है। शाहजहांपुर के एसपी ने कहा कि जगेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा था। उसे अरेस्ट करने की कोशिश की गई तो खुदकुशी कर ली। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राममूर्ति के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। इंस्पेक्टर श्री प्रकाश राय, गुफरान, आकाश गुप्ता, अमित प्रताप सिंह और भुरे के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।
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मण्डल नायक वीपी सिंह जी को उनकी जयंती पर कोटिशः नमन........आदरांजली....पुष्पांजली....श्रद्धांजली....
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मण्डल,मन्द चेहरों वाले पिछड़े और मनुवादी;इन सबके साथ राजा मांडा अर्थात विश्व्नाथ प्रताप सिंह जी से अटूट रिश्ता है।किसी के लिए वी पी सिंह जी नायक हैं तो किसी के लिए खलनायक।कोई नारा लगाया है कि "राजा नही फकीर है,भारत की तकदीर है"तो कोई नारा लगाया है कि "राजा नही रंक है,देश का कलंक है।"
निश्चय ही वी पी सिंह जी पिछड़ों की तकदीर बनकर आये तो यथास्थितिवादियों को रंक बनाने का उपकरण मण्डल कमीशन लाये इसीलिए मनुवादी लोग वी पी सिंह जी को हजम नही कर पाये और आज भी उनसे नफरत करते हैं लेकिन पिछड़ों ने भी वह यथोचित सम्मान वी पी सिंह जी को नही दिया जो उन्हें मिलना चाहिए।
वी पी सिंह जी ने खुद को मिटाकर पिछडो के वजूद को मजबूत किया।उनके बारे में यह लाइन शायद कारगर हो कि-
"इक बून्द भर चीज थी सागर तुम्ही ने की,
होती नही जो बात उजागर तुम्ही ने की।
मर ही चुके थे हम कि हमे जिंदगी वापस,
अपने गले सलीब लगाकर तुम्ही ने की।।"
वी पी सिंह जी ने पिछडो में चेतना जगाई,सत्ता की भूख जगाई,अधिकारो के प्रति सजग किया,ठहरे हुए पानी में पत्थर उछाला,मनुवाद पर जबर्दस्त हथौड़ा चलाया,साम्प्रदायिक शक्तियो द्वारा हिंदुत्व के ध्रुवीकरण से उत्पन्न होने वाले भयानक दुष्परिणाम से देश को बचाया,हजारो वर्ष से पिछली कतार में खड़े पिछडो के बेटे-बेटियो के कलक्टर से चपरासी तक बनने का मार्ग प्रशस्त किया पर खुद को मिटा लिया।बिच्छू जब बच्चा जनता है तो उसके बच्चे उसे ही खा जाते हैं।बिच्छू को नई जनरेशन लाने के लिए खुद की शहादत देनी पड़ती है ठीक ऐसे ही वीपी सिंह जी ने अपना डंक मनुवाद पर मारा पर उनके डंक मारने के बाद जो नई जनरेशन हुयी उसने उन्हें ही खा लिया।बड़ा दुखद रहा उनका अंत और उससे भी दुखद रहा उनकी बदौलत बहुत कुछ पाये लोगों द्वारा उन्हें भुलाना।
आज मैं पिछडो,अधिकारविहीनो,समाज के उपेक्षित वर्गो के इस महानायक को उनके जयंती(25 जून 1931)पर पुष्पांजली अर्पित करता हूँ और अपने दिल की गहराइयो से उन्हें नमन करता हूँ।

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(जारी............. )







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