15/10/2009



दीपावली की शुभ कामनाएं 

खबर आयी है की आर्थिक मंदी कम हुयी है , जब आर्थिक दिक्कते थी ही नहीं तो कम कैसे हुयी जो भी है महगाई बढ़ी है बाज़ार की हालात ठीक हो सकती है वैसे भी लोग भूखों  तो मरेंगे नहीं लेकिन खबरों में जो कुछ है वह कम से कम सच तो नहीं है, हाँ आज हमारे भाग्य बिधाता देश को ग्लोब्लायिज कराके रख दिये है, जो कल तक मजबूरी थी आज वह फैशन है, अभावों में जिन्दा रहने वाले किसी तरह तन ढकते थे आज नंगा होना फैशन हो गया है.

लक्ष्मी जी की कृपा से देश का धनाढ्य वर्ग अंधाधुंध धन मालों में लगा रहा है और वही से यह संस्कृति परोसी जा रही है, एसा ही जाहिर तौर पर दिखाई दे रहा है | समय की बिडम्बना ही है की आज लूट को चातुर्य और निकम्मेपन को काबिलियत का जमा पहना कर मैदान के मध्य छोड़ दिया गया है उन्ही के हाथ में व्यवस्था की बागडोर दे दी गयी है . यह अपसंस्कृति के रक्षक और समाज के भक्षक जिस तरह से देश को लूट रहे है वैसे तो मुग़लों और अंग्रेजों ने भी नहीं लूटा होगा यही आज़ादी और बलिदान का पुरस्कार बनता  है येसा ही बताया जा रहा है |
इस बार की दिवाली के पटाखे और दिये की लव इन्हें जलाये इनके दिल और दिमाग को खोले.
इसी कामना के साथ .
डॉ. लाल रत्नाकर 

2 टिप्‍पणियां:

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

HAPPY DIPAWALI!!!!!

Udan Tashtari ने कहा…

सही संदेश!!

सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

-समीर लाल ’समीर’

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