23/02/2010





राजनितिक पिछड़ापन और सामाजिक बदलाव !
डॉ.लाल रत्नाकर 


समाजवादी पार्टी के बारे में अलग - अलग लोगों के अलग विचार है,पर समाजवादी पार्टी फिर से कठघरे में कैसे खड़ी हो उसके लिए कोई न कोई काम करने उनके नेताओ में से ही निकल पड़े है, जिस बड़बोलेपन के कारण कई बार मुलायम सिंह को इनके बारे में सफाई देनी पड़े , वही हरकतें करने के लिए उनको अब कौन रोके जब, एक सिंह का जाना और भाई जी का मैदान में उतर आना 'दोनों घटनाएँ समाजवादी पार्टी के स्वास्थ्य के लीये एक जैसी ही है - एक के जाने से जो उत्साह आया है लोगों में वह कहीं दूसरे की वजह से समाप्त न हो जाय ?


मुलायम सिंह जी समाजवादी आन्दोलन के बारे में जितना जानते है उसका लाभ प्रदेश को तभी मिलेगा जब माननीय भाई जी सब्र करेंगे - देश बीरों से खाली नहीं है पर सारे बीर भाई जी के पास ही है एसा भी नहीं है, एक की साजिश थी की किस तरह समाजवादी पार्टी का एक बड़ा हिस्सा मुलायम सिंह यादव जी की राजनैतिक विरासत को घर में ही समेट दी जाय, उसमे किसकी और कितनी भागीदारी हो उसकी भी नीति चलायी गयी थी जिसके लिए भाई जी नुमा लोग भी उतने ही जिम्मेदार है, किस्से कहानियों के पात्रों में येसे अनेक पात्र अक्सर दिखाई देते है, समाजवादी पार्टी की नियति, नीति, यदि परिवार तक ही सिमट कर रह जाने की है तो उसके लिए वगैरह ठीक है, पर यदि इसका सामाजिक सरोकार और समाज के लिए कोई योगदान है तो इन सबसे निजात लेने की राय देनी होगी  |
'प्रो.ईश्वरी प्रसाद का मानना है की पिछड़ी जातियों का आन्दोलन इन्ही पिछड़ी जाती के अदूरदर्शी नेताओं की वजह से ख़तम हो गया, इन्होने या इनमे वह समझ ही नहीं थी जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा को बल मिलता और पिछड़ी जातियों के लिए कारगर योजनायें बनती जिससे उन जातियों का विकास होता, यदि तब वे समाजवाद के स्थापित नियमों की बात चलाते तो समाज का कुछ भला होता, पर सब इन्होने उल्टा किया प्रथम पक्ष को छोड़कर द्वितीय पक्ष पर जोर दिये जिसका परिणाम उल्टा हुआ, पिछड़ी जातियां और पिछड़ती गयी और अगड़ी जातियां और अगडती गयी, जिससे खाई और बढ़ती गयी' यही हाल कमोबेश दलित का हो रहा है उनका जो राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा था आज़ादी के बाद से ही आरक्षण के कारण कुछ ठीक था फिर भी दलित की भी चिंता वहीं ख़तम नहीं हो रही थी, उसे विकास की मुख्य धारा में लाने का जो संकल्प दलित नेताओं ने किया था उसका विनाश उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री की अदूरदर्शिता और सत्ता की साझेदारी ने लगभग समाप्त कर दिया है उनके द्विज प्रेम ने |
यदि सामाजिक सरोकारों को ठीक नहीं किया गया तो हम दुनिया की असामाजिक मनुजों की मण्डी होकर रह जायेंगे सदिओं से भारत जिस प्रकार सामाजिक गैर बराबरी को ढो रहा है और भारतीय समाज का एक बड़ा हिस्सा(८०%) मंडी का कचरा जैसा  दिखाई दे रहा है, न तो उसके खाने का इंतजाम है और न रहने और तन ढकने का जब की दूसरी ओर  विकास के नाम पर नंगे हो रहे है !
यदि ये दल जिनका नेतृत्व पिछड़े और दलित संभाल रहे है उन्हें यैसे बुद्धिजीवियों को इस काम के लिए लगाना चहिये जो इन समस्यायों को ठीक करने के उपाय कर सकते हों , एसा नहीं है की इन पर अब तक काम नहीं हुआ है, पर उसको और उलझा दिया गया है - छोटे स्तर पर इसे देखा जाय तो विभिन्न जातियों की एक क्लास में बौद्धिक समझ का मूल्यांकन किया जाय तो पता चलता है की उन बच्चों के परिणाम जब ईमानदारी से आते है जो चमत्कारी होते है , जबकि गुरु द्रोण इन्ही में से राजपुत्रों को छाटते है जो राज्य बेचने के योग्य हो चरित्र हनन करने और कराने के योग्य हों, एसे ही राजनेता भी तलाश करते है सोचने और योजना करने वालों की जिससे राज्य तो बचा रहे भले ही जनता का सत्यानाश हो जाये |
ज्ञान और अज्ञान के खेल में भारतीय राजनीति की समझ उन हाथों में पहुच गयी है जहाँ से वही तुगलकी फरमान और कार्य कराये जा रहे है जिनकी न तो अब जरूरत है और न ही उसका कोई लाभ ही होना है जिसने लड़ कट कर यह राज्य उन्हें सौपा है, दरअसल आज की राजनितिक सोच दलित और पिछड़ों को अलग रखने के लिए वह सारे काम कर रहे है जिनसे इसका सत्यानाश हो और लगभग ऐसे ही राजनेता इनके बीच से ढूढ़ - ढूढ़ कर खड़े किये जा रहे है, भाई जी भी अमर की खोजी हुयी फसल है अब इन्हें भी आराम करने देना चहिये ?

बाबा रामदेव जी जहाँ एक ओर सारा का सारा संकट देखा पा रहे है और यथार्थ से रूबरू है वहीं बाकि के नेताओं को कुछ दिखाई नहीं दे रहा है -
''योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि सभी पार्टियों में आर्थिक और चारित्रिक भ्रष्टाचार है। अधर्मियों को सत्ता से हटना चाहिए। साथ ही राजनीतिक दलों का शुद्धिकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा, अब राजा हम तय करेंगे। योग गुरु बाबा रामदेव ने शुक्रवार राँची में राँची क्लब में भारत स्वाभिमान व पतंजलि योग समिति की बैठक में में कहा कि वह स्वयँ तो संसदीय चुनाव में खड़े नहीं होंगे लेकिन चरित्रवान और देशभक्त उम्मीदवारों को जरूर उतारेंगे। जिनके माध्यम से आध्यात्मिक विकास और राष्ट्रवाद की नींव मजबूत होगी। देश में समग्र परिवर्तन की आवश्यकता है। उनका लक्ष्य विदेश में जमा 258 लाख करोड़ रुपये को वापस लाना है। उन्होंने कहा कि वो देश निर्माण के लिए चाणक्य की भूमिका निभाना चाहते है। उन्होंने कहा कि दहेज हत्या, भ्रष्टाचार, गोहत्या और मिलावट करने वालों को मृत्युदंड मिलना चाहिए। जिसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बननी चाहिए।


बाबा राम देव ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए समिति अच्छे ईमानदार लोगों को जीता कर सदन में भेजेगी। उन्होंने कहा कि इस क्रम में समिति हर जिले में अपने 7 से 10 लाख सदस्य बनायेगी। बाबा रामदेव ने स्वाभिमान कार्यक्रम का उद्धाटन करते हुए सरकारी सिस्टम पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर बैठे लोग आपने कार्य के प्रति ईमानदार नहीं है। उन्होंने राजनीतिक भ्रष्टाचार को देश की बदहाली का मुख्य कारण बताया। राष्ट्रीयता एवं देशभक्ति भाव से ओत-प्रोत अपने वक्तव्य में बाबा ने कहा कि देश को भगवान श्री राम और आजादी के दीवानों जैसी लड़ी गयी लड़ाई की आवश्यकता है। बाबा रामदेव ने योग शिक्षा की वकालत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में देश भर में एक लाख योग कक्षाएँ चल रही है। आने वाले समय में उनका देश भर में छह लाख योग कक्षाएँ खोलने का लक्ष्य है।

बाबा रामदेव ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, तिरंगा फहरा, लेकिन आज लोगों के दिल में तिरंगा नहीं फहरा है। आजादी के बाद शासन, सत्ता एवं चेहरा बदला लेकिन चरित्र नहीं बदल पाया। नक्सली समस्या पर उन्होंने कहा कि गाँव स्तर पर विकास के लाभ नहीं पहुँचने से ग्रामीणों में असंतोष फैला है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि नक्सलवाद को समस्या का समाधान मान लिया जाये। कोई भी क्रांति लोकतांत्रिक व्यवस्था की परिधि में होनी चाहिए। खनिज संपदा के 50 प्रतिशत भाग पर राज्य सरकार का अधिकार होना चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा कि भ्रष्टाचारियों मिलावट करने वालों, बलात्कारियों, गौ हत्या एवँ दहेज के लिए हत्या करने वाले को राष्ट्रद्रोही के रूप में मृत्यु दंड दिया जाये। इस निमित ईमानदार न्यायविदों के द्वार फास्टट्रेक कोर्ट बनाकर शीघ्र फैसला करना चाहिए।

इस अवसर पर उपस्थित मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने भी योग शिक्षा की उपयोगिता स्वीकार की। श्री सोरेन ने कहा कि योग सभी के लिए जरूरी है। वे राज्य भर में प्राथमिक स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर पाँचवी कक्षा तक योग शिक्षा प्रारंभ कराएंगे। इसके पूर्व बाबा रामदेव प्रात: आठ बजे विमान से राँची पहुँचे।''

'बाबा' ने सारी बातें साफ कर दी है की इनकी राजनीति की दिशा क्या होगी . रहा क्रियान्यवन तो उसे जनता को करना है जो उतना मुश्किल नहीं है.

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