12/08/2010

जाति आधारित जनगणना का एक चरण किसी तरीके से बढ़ा पर फाँस कि पूरी उम्मीद भी अभी बाकी है - डॉ.लाल रत्नाकर
(दैनिक जागरण , हिंदुस्तान दैनिक , अमर उजाला व् दैनिक भाष्कर  से साभार )
जाति पर आधारित जनगणना का रास्ता साफ

Aug 12, 12:55 pm

नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि वर्तमान में चल रही जनगणना में जाति को भी शामिल किया जाएगा, लेकिन इसके तौर तरीकों के बारे में कैबिनेट में अंतिम फैसला किया जाएगा।
लोकसभा में गुरुवार को इस मुद्दे पर हंगामे और एक बार के स्थगन के बाद सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने अपनी ओर से दिए बयान में कहा कि इस बारे में मंत्रियों के समूह ने निर्णय किया है कि जनगणना की प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना उसमें जाति को भी शामिल किया जाएगा।
हालांकि मुखर्जी ने कहा कि जनगणना में जाति को शामिल किए जाने के तौर तरीकों के बारे में अभी निर्णय करना बाकी है। उन्होंने कहा कि यह कब और कैसे होगा, यह अभी भी विचाराधीन है और इस संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल में अंतिम फैसला होगा। गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा, जद यू, सपा और राजद के सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और बायोमेट्रिक चरण की बजाय जनगणना के वर्तमान चरण में ही जाति को शामिल किए जाने की मांग की।
मुखर्जी ने बताया कि इस संदर्भ में गठित मंत्रियों के समूह की बुधवार को बैठक हुई थी और उसमें जाति आधारित जनगणना के बारे में विभिन्न दलों की ओर से आए लिखित सुझावों पर गौर किया गया। जाति आधारित जनगणना की मांग पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंत्रियों के समूह का गठन किया है।
भारत में इससे पहले 1931 में जाति आधारित जनगणना हुई थी। विभिन्न दलों के सदस्यों ने गुरुवार को इस मामले को उठाते हुए कहा कि जाति आधारित जनगणना को तुरंत शुरू किया जाना चाहिए और इसके लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया प्रारंभ होने की प्रतीक्षा नहीं की जानी चाहिए। जद यू नेता शरद यादव ने कहा कि बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी होने में तो सौ साल लग जाएंगे और तब तक इंतजार नहीं किया जा सकता है। इन सदस्यों का कहना था कि इसके अलावा बायोमेट्रिक राष्ट्रीय डाटाबेस में केवल 15 साल से अधिक उम्र के लोगों के ही फोटो और अंगुलियों के निशान शामिल होंगे।
सदस्यों के हंगामे के कारण गुरुवार को प्रश्नकाल नहीं हो सका और अध्यक्ष मीरा कुमार को लगभग दस मिनट के हंगामे के बाद सदन की बैठक दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा की कार्यवाही स्थगित किए जाने के बाद सदन में ही मुखर्जी ने विभिन्न दलों के नेताओं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार-विमर्श किया। सदन के दोबारा मिलने पर मुखर्जी ने उक्त बयान दिया। इससे पहले, सदन की कार्यवाही शुरू होने पर शरद यादव ने जाति आधारित जनगणना तुरंत शुरू करने की मांग उठाते हुए कहा कि बायोमेट्रिक चरण में यह प्रक्रिया शुरू करने से बहुत अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र देने का फैसला 15 साल पहले किया गया था और वह अभी तक पूरा नहीं हो सका है।

उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक प्रक्रिया इससे भी जटिल है और उसमें और भी अधिक समय लगेगा। उनकी इस बात का भाजपा, बसपा, सपा और राजद सदस्यों ने समर्थन करते हुए अपने स्थानों पर खड़े होकर तुरंत जाति आधारित जनगणना कराए जाने की मांग की। देश में बायोमेट्रिक चरण की शुरुआत नवंबर से होनी है जब जगह-जगह शिविर लगाकर लोगों की अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतलियों के फोटो आदि लिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इस बायोमेट्रिक चरण की शुरुआत के समय ही व्यक्ति की जाति के आंकड़ें भी एकत्र किए जाएंगे।

















जाति आधारित जनगणना को हरी झंडी

Source: Agency   |   Last Updated 10:08(12/08/10)
नई दिल्ली. जाति आधारित जनगणना के लिए मंत्रिसमूह ने हरी झंडी दे दी है। यह कवायद जनगणना के बायोमीट्रिक चरण में की जाएगी। माना जा रहा है कि दिसंबर में इसकी शुरुआत हो सकती है।

जीओएम की मंजूरी के बाद जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक दलों की खेमेबंदी समाप्त होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि वर्ष 1931 के बाद यह पहला अवसर होगा जब देश में जाति आधारित जनगणना की कवायद होगी।

गौरतलब है कि सत्ता पक्ष पर इस बात का दबाव था कि वह जाति आधारित जनगणना को जल्द मंजूरी दे। भाजपा सहित लगभग सभी विरोधी दलों ने जीओएम को पत्र लिखकर जनगणना में जाति को शामिल करने के प्रस्ताव का समर्थन करने को कहा था।

कांग्रेस कोरग्रुप में आम सहमति से रास्ता तय करने की जिम्मेदारी सरकार पर छोड़ दी गई थी। कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद के बावजूद शीर्ष नेतृत्व ने तय किया कि जिस दिशा में सभी दलों की रजामंदी है उस राह में रोड़ा खड़ा करने से ठीक संदेश नहीं जाएगा। बायोमीट्रिक चरण में लोगों की फोटोग्राफी, फिंगर पिंट्र और आंख की पुतलियों का निशान लेने का काम होगा। जाति आधारित जनगणना के लिए दबाव बनाने का काम यादव त्रिमूर्ति लालू प्रसाद यादव, शरद यादव और मुलायम सिंह यादव ने शुरू किया था।

बाद में पिछले संसद सत्र के दौरान इस मसले पर हुई बहस के दौरान सभी राजनीतिक दलों की ओर से वक्ताओं ने सदन में इस मांग का पुरजोर समर्थन करके इस मांग के पक्ष में ठोस आधार तैयार किया।

सदन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी ने यह आश्वासन दिया था कि सदन की भावना के अनुरूप सरकार कोई फैसला करेगी। इस संबंध में फैसला करने के लिए प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता मंे जीओएम बनाया गया। इस जीओएम ने पिछले दिनों पत्र लिखकर सभी राजनीतिक दलों से इस संबंध में अपनी राय देने को कहा था।

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