28 मई 2018

EVM बनाने वाली कंपनी ने ‘चुनाव आयोग’ के अलावा किसी और को भी बेंची लाखों मशीनें

BOLTA UP बोलता स्पेशल
RTI से खुलासा : EVM बनाने वाली कंपनी ने ‘चुनाव आयोग’ के अलावा किसी और को भी बेंची लाखों मशीनें !
 (BOLTA UP (2 months ago))

ईवीएम को लेकर अब एक नया खुलासा हुआ है। अभी तक ईवीएम के हैक होने को लेकर विवाद हो रहा था लेकिन अब पता चला है कि जितनी ईवीएम मशीनें बन रही हैं उतनी चुनाव आयोग को नहीं मिल रही हैं। कंपनी ने मशीनें कम बनाई हैं लेकिन आयोग के पास ज़्यादा मशीनें हैं। तो सवाल है कि बाकी की मशीने कहाँ से आ रही हैं? क्या ईवीएम बनाने वाली कम्पनियाँ ही किसी और को मशीनें बेंच रही हैं और वहां से ये चुनाव आयोग के पास पहुँच रही हैं?

मुंबई के एक आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन एस रॉय ने चुनाव आयोग और ईवीएम बनाने वाली कंपनियों से आरटीआई के ज़रिए ये पूछा कि अबतक कितनी ईवीएम बनी हैं और कितनी चुनाव आयोग को मिली हैं। ईवीएम चुनाव आयोग के द्वारा कोई और तो प्रयोग नहीं करता है तो जितनी मशीने बनी थी उतनी ही चुनाव आयोग को मिलनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

बता दें, कि ईवीएम को दो सरकारी कम्पनियाँ बनाती हैं। इलेक्ट्रोनिक कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल)। ईवीएम मशीन तीन भागों में होती है। बेलेटिंग यूनिट (बीयू) कंट्रोल यूनिट (सीयू) और हाल ही में आए वोटर वेरीफेबल पेपर ऑडिट ट्रायल (विविपीऐटी)।

चुनाव आयोग ने बताया कि उसने 1989 से 15 मई 2017 तक बीईएल से 1,005,662 (दस लाख पांच हज़ार 662) बीयू और 928,049 (नौ लाख 28 हज़ार 49) सीयू प्राप्त किये। ईसीआईएल से चुनाव आयोग को 1,014,644 बीयू और 934,031 सीयू प्राप्त हुए।

वहीं ईवीएम बनाने वाली कंपनियों की बात करे तो बीईएल 9 जून 2017 को बताया कि उसने 2010 से 2017 तक चुनाव आयोग को 190,000 बीयू और 125,000 सीयू की आपूर्ति की। दूसरी कंपनी ईसीआईएल ने बताया कि उसने इसी दौरान चुनाव आयोग को 222,925 बियू और 211,875 सीयू की आपूर्ति की। इसके अलावा 497,348 बियू और 307,030 सीयू इसी दौरान अलग से चुनाव आयोग को दिये गए।

मतलब चुनाव आयोग ने 2,020,326 (20 लाख 20 हज़ार 326) बीयू और 1,862,080 (18 लाख 62 हज़ार 80)  सीयू प्राप्त किये। वहीं ईवीएम बनाने वाली कंपनियों बीईएल, ईसीआईएल ने 910,273 ( नौ लाख 10 हज़ार 273) बीयू और  643,905 (छह लाख 43 हज़ार 908) सीयू की आपूर्ती की।

चुनाव आयोग और कंपनियों के आंकड़ों के बीच में लाखों ईवीएम मशीनों का अंतर आ रहा है। सवाल है ये मशीने कहा है?

साथ ही ईवीएम मशीनों के भुगतान में भी गड़बड़ी है। 2006-07 से 2016-17 तक चुनाव आयोग ने ईवीएम खरीदने के लिए Rs 5,360,175,485 (536 करोड़ 1 लाख 75 हज़ार 485 रुपये) खर्च किये। वहीं ईवीएम बनाने वाली कंपनी बीईएल ने 6,525,644,000 (652 करोड़ 56 लाख 44000 रुपये) की ईवीएम मशीनें बेंची। अब सवाल ये है कि 116 करोड़ रुपये ज़्यादा ईवीएम कंपनी ने किस्से लिए?

क्या ईवीएम कम्पनियाँ किसी और को भी ईवीएम बेंच रही हैं? साथ ही क्या चुनाव आयोग कही और से भी मशीनें खरीद रहा है? क्या ये खरीदार राजनीतिक पार्टियाँ तो नहीं हैं? अगर ऐसा है तो विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बहुत बड़े खतरे में है।

आरटीआई कार्यकर्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ईवीएम को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि राजनीतिक पार्टियों से इस मामले में जवाब तलब किया जाए और जब तक जांच के परिणाम नहीं आते वोटिंग के लिए ईवीएम का प्रयोग न किया जाए।।

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