12/01/2010

समाजवादी पार्टी और मुहफुतौअल कि राजनीति 
मजवादी पार्टी में वही हुआ जिसकी उम्मीद नहीं थी आर -पार की लड़ाई के मुद में ये सब नहीं थे और लगता है न आगे है ? जिस बेशरमी से अमर सिंह समाजवादी पार्टी को खा रहे है यह उनका एक महत्वपूर्ण भोज था जिसके उपरांत 'रहे सहे' जन भी अब यह जान गए है कि, इनके बीच सचमुच का कोई प्यार पनप गया है जो एक दूसरे से इनको अलग नहीं होने दे रहा है .  भले ही प्रदेश कि जनता इनसे अलग हो जाये.
दैनिक जागरण से -

सपा में फिर भारी पड़े अमर सिंहJan 11, 10:12 pm

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। समाजवादी पार्टी के तीन अहम पदों से अमर सिंह के इस्तीफे पर मचे घमासान के बाद आखिर सुलह-सफाई का रास्ता निकल ही आया। इस पूरी तकरार में एक बार फिर अमर सिंह भारी पड़े। तल्ख तेवर दिखाने वाले प्रो. रामगोपाल यादव नरम पड़ गए तो उनके बयानों से आहत अमर सिंह ने भी उन्हें माफ कर दिया। हालांकि पार्टी के पदों से इस्तीफे पर वह कायम हैं, लेकिन सेहत सही रही तो सैफई महोत्सव में शिरकत जरूर करेंगे।
अमर के इस्तीफे के बाद से ही संकट में घिरी सपा के लिए सोमवार का दिन राहत भरा साबित हुआ, क्योंकि पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव, महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और सपा के उत्तार प्रदेश अध्यक्ष व मुलायम के सांसद बेटे अखिलेश यादव के बीच रास्ता निकालने पर बातचीत हो गई। उसके बाद अमर सिंह ने मीडिया में, खास तौर से समाचार चैनलों से बातचीत में कहा कि उनके मन में मुलायम के खिलाफ कुछ भी नहीं है। साथ ही सपा के किसी नेता से भी कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रो. यादव उनसे उम्र में बड़े हैं। उन्होंने टेलीफोन पर वार्ता में कहा है कि यदि उनकी बातों से उन्हें दुख पहुंचा है तो वह उसके लिए माफी चाहते हैं। लिहाजा उन्हें माफ कर दिया है। उन्हें मुलायम परिवार के सपा नेताओं से कोई गिला-शिकवा नहीं है और स्वास्थ्य सही रहा तो वह सैफई महोत्सव में भी शिरकत करेंगे।
अमर सिंह ने यह भी दोहराया कि उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से ही इस्तीफा दिया है। लिहाजा इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। हालांकि मुलायम ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। सूत्रों की मानें तो अमर ने मुलायम से साफ कह दिया है कि इस्तीफा नहीं मंजूर हुआ तो भी वह न तो सपा संसदीय बोर्ड की बैठकों में भाग लेंगे और न ही प्रवक्ता या पार्टी महासचिव का दायित्व निभाएंगे। अमर ने कांग्रेस में जाने से भी इन्कार किया है।
इस बीच, मुलायम ने इटावा में कहा कि सपा एक परिवार है, जहां सभी को अपनी बात कहने का हक है। परिवार एकजुट है और अमर व रामगोपाल में कोई मतभेद नहीं है। जबकि इस्तीफे के बाद अमर सिंह के खिलाफ एक तरह से मोर्चा खोल चुके प्रो. रामगोपाल यादव के तेवर भी सोमवार को ठंडे पड़ गए। मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा, 'सपा में अमर सिंह को लेकर कोई विवाद नहीं है। बस इतनी सी बात है कि जहां चार बर्तन रहते हैं, वे खनकते हैं। सैफई महोत्सव के समापन में वह मुख्य अतिथि हैं, इसलिए समापन वही करेंगे।
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सपा को महोत्सव में उत्सव का यकीन





लखनऊ [स्वदेश कुमार]। सपा को यकीन है कि सैफई महोत्सव से पार्टी के अंदर उत्सवी माहौल हो जाएगा और उसके सारे आंतरिक संकट टल जाएंगे। सोमवार को उद्घाटन के बाद से 24 जनवरी को समापन तक सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का ज्यादातर वक्त अब सैफई में ही गुजरेगा। सपा में सबसे खुशी की बात यह है कि महोत्सव के समापन के लिए अमर सिंह राजी हो गए हैं। माना जा रहा है कि उनके वहां पहुंचने पर पार्टी नेताओं के सारे गिले शिकवे दूर हो जाएंगे। सारे 'विवाद' का भी समापन हो जाएगा।
सोमवार को सपा महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के बयान के बाद पार्टी नेताओं को 'सब कुछ ठीक हो जाने' की काफी उम्मीद जगी है। आज से पहले तक वह न केवल अपने रुख पर अडिग थे, बल्कि उनकी भाषा भी कठोर थी। अमर के मुद्दे पर वे कतई भी झुकने को तैयार नजर नहीं आ रहे थे। पर, अप्रत्याशित रूप से उन्होंने जिस तरह 'पार्टी में सब ठीक है' का ऐलान किया, उससे यह ध्वनि निकलते देर नहीं लगी कि उन्होंने अमर सिंह के मामले पर अपनी तलवार वापस म्यान में डाल ली है। ऐसे में सवेरे तक रामगोपाल के समर्थन में जो विधायक, सपा नेतृत्व पर अमर सिंह का इस्तीफा स्वीकार किए जाने का दबाव बना रहे थे, शाम को शांत हो गए।
सपा में पाला खिंचते देख अंतत: मुलायम सिंह यादव आगे आए। उन्होंने हमेशा की तरह इस बार भी पहल की। अमर सिंह से फोन पर बात कर उनको सैफई महोत्सव के लिए आमंत्रित किया। संभवत: दूसरी ओर भी इसी का इंतजार किया जा रहा था। क्योंकि आमंत्रण बिना किसी ना नुकुर के झट स्वीकार हो गया।
वैसे पार्टी का एक खेमा इस बात को वक्ती समाधान तो मान रहा है, पर इससे दूरगामी नुकसान का आकलन कर रहा है। बात इतनी आगे बढ़ जाने के बाद 'अमर कहानी' की ऐसी परिणित की इस खेमे के नेताओं को सपने में भी उम्मीद नहीं थी। यही वजह थी कि समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे ये पुराने नेता 'अमर विरोध' का परचम लहराने काफी आगे निकल आए थे। अब देखने वाली बात यह होगी कि बदले हालात में वे अपने कदम वापस खींचेंगे कि आगे बढ़ाएंगे?
सपा सूत्रों की माने तो पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह एक-एक कर उन सभी नेताओं को समझाने बुझाने का प्रयास कर रहे हैं जो इस विवाद में किसी न किसी पाले में बंट रहे थे। नेतृत्व की ओर से इन नेताओं को इस बात की भी हिदायत दी जा रही है कि वे मीडिया से परहेज करें। पार्टी के हित में विवाद को और न बढ़ाएं। रामगोपाल के रुख में आए बदलाव के पीछे भी यही वजह मानी जा रही है।

1 टिप्पणी:

Suman ने कहा…

nice
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