20/01/2010


श्रीकृष्ण के कंठ से उद्भूत सरस्वती

Jan 19, 11:02 pm

भगवती सरस्वती विद्या, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणपति खंड के अनुसार, सृष्टि काल में ईश्वर की इच्छा से आद्याशक्ति ने स्वयं को पांच भागों में विभक्त कर लिया। भगवान श्रीकृष्ण के अंगों से वे राधा, पद्मा, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के रूप में अवतरित हुई। सरस्वती उनके कंठ से निकली है। माघ शुक्ल पंचमी के दिन मां सरस्वती का आविर्भाव हुआ था। इस दिन को वसंत पंचमी भी कहते हैं।
[देवों की प्रतिनिधि:] शारदा, त्रयीमूर्ति, वाणी, वाग्देवी, ब्राह्मी और भारती आदि नामों से भी सरस्वती को जाना जाता है। शास्त्रों में इनका मूल नाम श्री और श्री पंचमी है। श्वेत हंस, वीणा, अक्षमालिका और पुस्तक इनके प्रतीक हैं। मां सरस्वती की आराधना करने के लिए श्लोक है-
सरस्वती शुक्ल वर्णा सस्मितां सुमनोहराम।
कोटिचन्द्र प्रभामुष्ट श्री युक्त विग्रहाम।
वह्नि शुद्धां शुकाधानां वीणा पुस्तक धारिणीम्।
रत्नसारेन्द्र निर्माण नव भूषण भूषिताम।
सुपूजितां सुरगणै ब्रह्म विष्णु शिवादिभि:। वन्दे भक्त्या वन्दितां च मुनीन्द्रमनुमानवै:।
ऋग्वेद के अनुसार, सौम्य गुणों वाली यह देवी सभी देवताओं की रक्षा करती हैं। ये ब्रह्मस्वरूपा कामधेनु और समस्त देवों की प्रतिनिधि हैं। सत्वगुण से उत्पन्न होने के कारण इनकी पूजा में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों में अधिकांश श्वेत वर्ण की होती हैं। जैसे- श्वेत चंदन, पुष्प, परिधान, दही-मक्खन, धान का लावा, सफेद तिल का लड्डू, अदरक, श्वेत धान, अक्षत, शुक्ल मोदक, घृत, नारियल और इसका जल, श्रीफल, बदरीफल आदि।
[व्यक्तिगत रूप से करें पूजा:] शास्त्रों में वाग्देवी की आराधना व्यक्तिगत रूप से करने का विधान है। सरस्वती रहस्योपनिषद, प्रपंचसार और शारदा तिलक ग्रंथों में इनका दिव्य वर्णन है। ज्ञान, विद्या और कला की देवी सरस्वती की अर्चना कवि कालिदास ने वाक् और अर्थ को समाहित करते हुए की है-वागर्थाविव सम्पृक्तौ वागर्थप्रति प्रत्तये। जगत: पितरौ वन्दे पार्वती परमेश्वरौ। तुलसीदास ने सबका मंगल करने वाली देवी को वाणी कहा है। वे देवी गंगा और सरस्वती को एक समान मानते हैं-पुनि बंदउंसारद सुर सरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता। भज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अविवेका।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, घर-परिवार और समाज व्यक्ति का साथ छोड़ देता है, लेकिन सरस्वती कभी साथ नहीं छोड़तीं। सरस्वती का वाहन हंस निर्मल विवेक और नीर-क्षीर की पहचान करने का प्रतीक है। सरस्वती विनय प्रदान करती है। देवी सरस्वती की प्रसिद्ध 'द्वादश नामावली' का पाठ करने पर भगवती प्रसन्न होती हैं-प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती। तृतीयं शारदा देवी चतुर्थ हंस वाहिनी।। प†चमं जगतीख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा सप्तमं कुमुदी प्रोक्ता अष्टमें ब्रह्मचारिणी। नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी। एकादशं चन्द्रकान्ति द्वादशं भुवनेश्वरी।
'विश्वविजय सरस्वती कवच' की आराधना से देवी सभी अभिलाषा पूर्ण करती हैं। कहते हैं कि व्यास, देवल, भरद्वाज, जैगीषव्य ऋषियों ने इससे ही सिद्धि पाई।
स्तुति और वंदना: लेखनी और ग्रंथ में सरस्वती का निवास होता है। इनकी स्तुति और ध्यान करने के लिए श्लोक विख्यात हैं -या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणा वरदण्डमण्डित करा या श्वेत पद्मासना। या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृत्तिाभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्यापहा।। शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्या जगदव्यापिनी। वीणापुस्तक धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्। हस्ते स्फटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरी भगवतीं बुद्धिप्रदांशारदाम।।
'श्री सरस्वत्यै स्वाहा' मंत्र से पूजन सामग्री समर्पित करते हुए देवी की आरती के साथ स्तुति की जाती है। देवी भागवत, ब्रह्मवैवर्त पुराण, दुर्गासप्तशती, संवत्सर प्रदीप में सरस्वती की पूजन विधियां हैं। वर्ण, पाद, प्रत्यय, रस, अर्थ, छंद, लय, ध्वनि का उद्गम सरस्वती से हुआ है। तीर्थराज प्रयाग में सरस्वती की ख्याति अनुपम है|
साभार -दैनिक जागरण 

सपा ने दिखाई ताकत

Jan 20, 02:16 am

लखनऊ। महंगाई, भ्रष्टाचार और सरकारी अत्याचार के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ में भी सरकारी घेराबंदी को धता बताकर पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज चौराहे पर प्रदर्शन किया। राज्य के कई स्थानों पर सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भिड़ंत हुई। पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी तो कार्यकर्ताओं ने भी पथराव किया। लखनऊ में गिरफ्तारी के बाद मुलायम और उनके साथियों को बसों से पुलिस लाइन पहुंचाया गया। बाद में पुलिस लाइन से सभी को रिहाकर दिया गया।
रिहा होने के बाद मुलायम सिंह यादव ने 'प्रेस कांफ्रेंस' में दावा किया कि मंगलवार को सपा के आंदोलन में प्रदेश भर में 50 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को नाकाम करने के लिए पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें लांघीं। सपा प्रमुख ने कहा कि आंदोलन की जरूरत इसलिए पड़ी कि लोगों में इस सरकार के खिलाफ जबर्दस्त भय व्याप्त है। कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। ऐसे में सपा ने आगे आकर यह दिखा दिया कि जनता सरकार के खिलाफ कितने गुस्से में हैं। लखनऊ में मुलायम सिंह के नेतृत्व में होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने विक्रमादित्य मार्ग स्थित उनके आवास और पार्टी कार्यालय के बाहर रात से ही जबर्दस्त घेराबंदी कर रखी थी। पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे मुलायम सिंह का काफिला बंगले से निकला तो सपा कार्यालय के निकट गाड़ियां थोड़ी धीमी हुई, लेकिन अचानक तेज रफ्तार से हजरतगंज की ओर बढ़ गयीं। हजरतगंज चौराहे पर गाड़ियां रुकी और मुलायम उतर कर वहीं धरने पर बैठ गये। इसकी खबर लगते ही सपा कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ता भी सड़क पर निकल आये। वे नारेबाजी करते हुए हजरतगंज की ओर बढ़ने लगे। लोरेटो चौराहे पर पुलिस और उनके बीच जमकर संघर्ष हुआ। हजरतगंज चौराहे पर धरना दे रहे मुलायम के पास कार्यकर्ताओं का पहुंचना शुरू हो गया। रास्ता जाम होते देख डीआईजी लखनऊ प्रेमप्रकाश खुद ही डंडा लेकर भीड़ को खदेड़ने लगे। देखते-देखते पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। मुलायम ने इस पर एतराज किया। भीड़ बढ़ती देख डीएम और डीआईजी ने मुलायम से गिरफ्तारी देने का कहा। मुलायम और उनके समर्थकों को बसों से पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
इसी प्रकार प्रदेश के अन्य हिस्सों में सपा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। बाराबंकी, सीतापुर, लखीमपुर-खीरी हरदोई में लखनऊ कूच करते सपाइयों को गिरफ्तार किया गया। कानपुर, इलाहाबाद, रायबरेली, बांदा, कन्नौज, सहित अधिकांश जिलों में पार्टी कार्यकताओं ने कड़ाके की ठंड के बावजूद मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया। कानपुर और रायबरेली सरीखे कई शहरों में पुलिस और सपाइयों के बीच झड़प हुई।








कानून को हाथ में लेने की इजाजत नहीं

Jan20, 










"इस महत्वपूर्ण खबर जिसको माया के राज में राज नेता नहीं पाण्डेय शरिखे अधिकारी दे रहे है क्या सचमुच इन्हें पता है अपने अधिकारों और प्रोटोकाल का"
संपादक -ब्लॉग 
लखनऊ। राज्य सरकार ने स्पष्ट कहा है कि जन आंदोलन करने के लिए किसी भी दल पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है किन्तु कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती है। सरकार ने इस बात से भी इनकार किया है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को आज घर से निकलने नहीं दिया गया। अगर ऐसा होता तो मुलायम सिंह हजरतगंज चौराहे पर कैसे पहुंच जाते?
प्रमुख सचिव सूचना विजयशंकर पाण्डेय ने शाम को पत्रकारों को बताया कि महंगाई के जिस मसले पर एक राजनीतिक पार्टी द्वारा आंदोलन किया गया जा रहा है, उस बारे में मुख्यमंत्री मायावती पहले ही अपनी चिंता जाहिर कर चुकी हैं। उन्होंने न केवल इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है बल्कि राज्य में जमाखोरों एवं कालाबाजारियों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ने के निर्देश भी दिये।
प्रमुख सचिव ने कहा कि महंगाई का सम्बन्ध आर्थिक नीतियों से है और नीतियां केन्द्र सरकार तैयार करती है। मुख्यमंत्री ने कई बार केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर जनविरोधी आर्थिक नीतियों को बदलने के लिए कहा किन्तु केन्द्र ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जिसका नतीजा है कि आज महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई को लेकर मुख्यमंत्री ने 14 जनवरी को मीडिया के सामने सारी बातें विस्तार से बताई थी और कई आवश्यक निर्देश जारी किये थे फिर भी कुछ लोग इसे राज्य सरकार के मत्थे मढ़ना चाहते हैं। ऐसे लोग महंगाई की आड़ में कानून-व्यवस्था को हाथ में लेना चाहते हैं मगर सरकार उनकी मंशा कदापि पूरा नहीं होने देगी।





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