3 फ़र॰ 2010




विचारों की कमी नहीं रही


सुना है कि कोसल में विचारों की कमी समाप्त हो गई है. एक के बाद एक कई विचार कौंध रहे हैं. इसमें से कई तो क्रांतिकारी हैं.
बड़े चौधरी अमरीका की सलाह पर कोसल ने विचार करना शुरु कर दिया है कि अच्छे तालेबान और बुरे तालेबान में फ़र्क किया जाए.
ब्रिटेन ने इस विचार का समर्थन किया है. ब्रिटेन ने बताया है कि उन्होंने पहले भारत में अच्छे राजा और बुरे राजा का फ़र्क किया था और इसका फ़ायदा दो सौ साल तक मिलता रहा था.
कोसल के दरबार-ए-ख़ास ने जब अच्छे तालेबान और बुरे तालेबान को अलग-अलग दृष्टि से देखने पर विचार किया तो किसी ने कहा कि बैंक घोटाले करने वालों में भी फ़र्क करना चाहिए. इसकी शुरुआत करते हुए एक को पद्मश्री देने की घोषणा भी कर दी गई.
फिर किसी ने कहा कि बाघों और चीतल आदि के शिकारियों और काले हिरणों के शिकारियों को भी अलग-अलग नज़रों से देखा जाना चाहिए, सो काले हिरण के शिकार के एक अभियुक्त को भी पद्म सम्मान देने की घोषणा कर दी गई.
सुना है कि कोसल में इस परंपरा को और कई क्षेत्रों में लागू करने का विचार है.
'वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति' में 'वैदिकी' की जगह 'राजनीति' शब्द का इस्तेमाल करने पर मंत्रिमंडल विचार कर रहा है.
इस विचार के समर्थकों का तर्क है कि हत्या, अपहरण और बलात्कार जैसे मामलों के अभियुक्त चुनाव जीत रहे हैं. इसका अर्थ है कि लोग राजनीतिज्ञों की हिंसा को हिंसा नहीं मानते. इसलिए सीआरपीसी में संशोधन करके 'राजनीतिक हिंसा, हिंसा न भवति' को अपना लेना चाहिए.
सुना है कि कोसल के सभी राजनीतिक दल इससे ख़ुशी-ख़ुशी समर्थन देने को तैयार हैं.
कोसल के गृहमंत्री विचार कर रहे हैं कि तालेबान की तरह नक्सलियों में भी फ़र्क किया जाए. लिहाज़ा शीघ्र ही नक्सल प्रभावित राज्यों में अच्छे नक्सलियों की तलाश शुरु की जाएगी. उन्हें राजनीति की मुख्य धारा में आकर अपना काम करने का प्रस्ताव दिए जाने का विचार है.
सुना है कि 'अच्छे नक्सलियों' से कहा जाएगा कि वे आदिवासियों की भलाई, ग़रीबी दूर करने और भ्रष्टाचार कम करने में सरकार के साथ काम करें क्योंकि सरकारें तो पिछले छह दशकों से यही कर रही हैं.
विचार है कि नक्सलियों के बाद छोटे चोरों और उचक्कों के बारे में ऐसी ही दृष्टि अपनाई जाए और अच्छे और बुरे में फ़र्क किया जाए.
कोसल के प्रांतों में भी इस विचार का व्यापक असर दिख रहा है.
एक प्रांत में सरकार ने सांप्रदायिक ताक़तों में फ़र्क कर लिया है. भाषाई आधार पर लोगों में भेद करने वाली दो पार्टियों में फ़र्क कर लिया है. अच्छे और बुरे का फ़र्क कर लिया गया है. अच्छे को बढ़ावा दिया जा रहा है. उसे बिहारियों और उत्तर प्रदेश के भैयों को पीटने का अधिकार दे दिया गया है. बुरे को फूटी आँख भी नहीं देखा जा रहा है.
एक प्रांत में सरकार ने पाया कि मूर्तियाँ, जीवित लोगों से अच्छी हैं. इसलिए विचार किया गया है कि अब से जीवित लोगों की रक्षा की चिंता कम की जाए और मूर्तियों की रक्षा के लिए विशेष दस्ते बनाए जाएँ.
दलालों और भ्रष्टतम लोगों को माननीय कहना, 40 साल के अधेड़ को युवा कहना, रासलीला की सीडी को झूठा कहना और अख़बारों में पैसे देकर ख़बर छपवाने जैसे छोटे-छोटे अनगिनत विचार कोसल में पहले से ही फल-फूल रहे हैं.
सो कोसलवासियो अब चिंता की कोई बात नहीं है.
वे लोग जो कोसल में विचारों की कमी को लेकर चिंतित हैं, उन्हें बता दिया जाए कि कोसल में विचारों की कमी हरगिज़ नहीं है. इसलिए कोसल का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
BBC HINDI से साभार 



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