13 फ़र॰ 2010

जाटों को आरक्षण जायज नहीं !
डॉ.लाल रत्नाकर !
समाज  के जिन तबकों को आरक्षण देने के लिए मंडल कमीशन ने चयनित किया था, उनमे जाट नहीं थे लेकिन जिस तरह से जाटों को आरक्षण के दायरे में लाया जा रहा है वह बहुत ही बड़ा नुकसान उन जातियों का है जो सदियों से पिछड़ी हुयी है , यदि सरकारें इन पर गौर नहीं करेंगी तो यह एक और सामाजिक अन्याय होगा  जिसका खामियाजा उनको उठाना होगा जो इसके समर्थक होंगे .

आरक्षण के खिलाफ जब सबमे एक आवाज बनानी शुरू हुयी तब जाटों को आरक्षण का ख्वाब आना शुरू हुआ, जिस कौम के नेता अपनी जाती को इस आरक्षण के प्रलोभन दे कर अपनी राजनीति करना चाह रहे है उन्हें सद्बुद्धि आनी चहिये और किसी का हक़ मारने के विरोध के  लिए आगे आना चहिये, 'यदि इन्हें आरक्षण चहिये तो पिछड़ों के आरक्षण से नहीं  इन्हें अलग से इंतजाम करना चहिये ?
ऐसी स्थिति में पिछड़ी जातियों के जातीय संगठनो को आगे आना और अपने लोगों को लाना चहिये इस तरह के बन्दर बाँट के बिरोध के लिए . समय के साथ यदि इसके लिए ये जातियां आगे नहीं आयी तो इनको इनका हक़ नहीं मिलेगा.

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