06/02/2010


कांग्रेस को समर्थन बड़ी भूल थी: लालू

Feb 05, 2010

पटना। राजद सुप्रीमो एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि वर्ष 2000 में राबड़ी देवी की सरकार को बचाने के लिए बिहार में कांग्रेस का समर्थन लेना और बाद में मनमोहन सिंह सरकार को समर्थन देना उनकी बड़ी भूल थी।
बिहार यात्रा के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने यह कहा था कि बिहार में कांग्रेस और राजद का गठबंधन एक भूल थी। इस पर जहानाबाद में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे लालू ने बताया कि उससे भी बड़ी भूल साल 2000 में राबड़ी देवी की सरकार को बचाने के लिए बिहार में कांग्रेस से समर्थन लेना और बाद में मनमोहन सिंह सरकार को समर्थन देना था।
उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता से बाहर रखने के लिए बिहार में राजद की पिछली सरकार ने कांग्रेस से समर्थन लिया था और केंद्र में राजद ने कांग्रेस को समर्थन दिया था। बिहार में राजद-लोजपा गठबंधन के लिए कांग्रेस को खतरा नहीं मानते हुए लालू ने कहा कि पूरा देश जानता है कि राजनीतिक मजबूरियों के कारण संकट में आई केंद्र नीत कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए उन्होंने क्या कुर्बानियां दी है।
राहुल गांधी द्वारा बिहार में कांग्रेस और राजद गठबंधन को एक भूल बताए जाने पर लालू ने कहा कि उन्हें ऐसा कहने का नैतिक अधिकार नहीं है।


वाह लालू जी ?
डॉ.लाल रत्नाकर 


तने दिनों के बाद याद आया की आपने भूल की थी यही होता है,शायद मै भी यही भूल कर रहा हूँ जो आपको इस ब्लॉग पर इतना समय दे रहा हूँ,सच तो यह है जो कम आपको करने हेतु जनता ने चुना था उसको नहीं कर पाए, और आप जितने दिन राजनीति के शिखर पर रहे आपको ही नहीं आप जैसे सभी राजनेताओ को लगा की आप लोग ईश्वर के समान शक्तिशाली हो गए हो, पर आदरणीय लालू जी जिस सिस्टम में आप थे ना वह येसे लोगों का है जो आप जैसों को चूसता है और निचोड़ कर फेंक देता है .
दुखद यही नहीं है मंडल कमीशन के बाद की लड़ाई जिस तरह के लोंगों द्वारा लड़ी गयी थी, वह सहज था येसा आपको लगा होगा लालू जी! आपको यह भी लगा होगा लालू जी की यह सब आपके वजह से हो रहा है, पर मुझे तब भी यही लग रहा था आप लोग जो कर रहे हो वह कोई नया काम नहीं है, जो नया होना था उसे मंडल के बाद सहज तरीके से उन लोगों ने कर दिया था जिसकी आपको भनक भी नहीं लगी और अब समझ आया की कांग्रेस को समर्थन देकर आपने एक भूल की है .
यह  कितना दुखद होता है लालू जी आप अनुभव कर रहे होगें , मुलायम सिंह यादव , राम विलास पासवान, डॉ.उदितराज, शरद यादव , नितीश  कुमार और स्वर्गीय चंद्रजीत जी दूसरी ओर राम नरेश जी , डॉ. कर्ण सिंह यादव , सुभाष यादव , बेनी प्रसाद वर्मा , डी.पी. यादव -मुंगेर व् मधुबनी व् गाजियाबाद, आदि आदि तथा दक्षिण के तमाम राज नेताओ को यह क्यों समझ नहीं आता की जब आप ताकत में आते है तो बिना 'उनके' आपका काम नहीं चलता पर जैसे डगमगाते हुए वे आते है आप सबको दूध की मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देते है.
तब  उन लोगो के लिए आपके बुद्धिजीवी, लेखक, पत्रकार, अधिकारी, नारियां, छात्र, नवजवान, डाक्टर, इंजिनीअर  सब के सब बेमानी थे राम बिलास जी का लच्छेदार भाषण और लालू जी आपकी किस्सागोई और निखालिश बिहारी और सुखद इस्टाईल 'उन्ही' के विज्ञापनों के काम आयी अपनो को तो दूर रक्खा और उत्तर प्रदेश में अब ताज़ा ताज़ा क्या क्या हो रहा है कोई तो उन्हें बताये की अमर के बदले 'राजा भैया,' विकल्प नहीं हो सकते विकल्प तो 'बेनी' 'आज़म' और 'राजबब्बर' ही होंगे उनके यहाँ जाइये राजनैतिक कामों में शर्म नहीं आनी चाहिए उन्हें भी भोज पर बुलाना चाहिए हमेशा तात्कालिकता खतरनाक होती है .
उत्तर प्रदेश कब तक इस तरह के लोगों के हवाले रहेगा ?
सी खतरनाक तात्कालिकता का लाभ दूसरे लोग उठाते है, आदमी की उर्जा एक मुकाम तक रहती है उसके बाद उसमे छरण होता जाता है, पिछड़ों और दलितों के यही छरित नेता समय के साथ जोड़ और तोड़ में उलझ जाते है, लेकिन रचनात्मकता का दूर दूर तक इंतजाम नहीं कर पाते, चाहे वह राजनैतिक रचनात्मकता हो या बौद्धिक या और कोई. और न ही इनके पास यैसे कोई संस्थान ही है, दुनिया भर के पत्रकारों को ये दौलत बांटते है पर एक भी आदमी इन्होने पूरे जीवन में नहीं तैयार किया जो इनके विचारों को आगे ले जा सकें.
राजनैतिक समझ के लिए द्वारे द्वारे भटकने की बजाय यदि एक भी सस्थान बना पाते जहाँ से इनके विचारों की त्रिवेणी प्रवाहित हो पाती आज का हमारा सफ़र काल के गर्त में समाहित हो जायेगा यदि हमारे वसूलों की संस्था नहीं होगी, इस पहलू की भी अजीब दास्तान है, जिन्हें न सोच से कुछ लेना देना है और न विचार से यैसे में अब और वक्त नहीं गवाना चहिये काम शुरू करना चाहिए ?  
और फिर ..........................

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