17/03/2010


दुष्कर्म का आरोपी बसपा विधायक गिरफ्तार

"ये है मायावती 'राज' की कहानी"
Jan 13, 06:45 pm

बांदा [जासं]। दलित युवती के साथ दुष्कर्म के आरोपी बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को गुरुवार को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जाहिर हो कि इस बहुचर्चित शीलू प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार विपक्ष के निशाने पर थी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को बांदा जिले के नरैनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी और उनके चार साथियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कर गिरफ्तारी का आदेश दिया था। बुधवार की रात से ही पुलिस ने विधायक की गिरफ्तारी के लिए छापे शुरू कर दिए थे। गुरुवार को सभी सीमाओं पर पुलिस ने नाकेबंदी कर दी।
सूत्रों ने बताया कि लखनऊ से विधायक बांदा के लिए चले। यह जानकारी यहां की पुलिस को हो गई थी। बबेरू थानांतर्गत औगासी पुल के पास फतेहगंज पुलिस लगी हुई थी। विधायक ने कार से जैसे ही पुल पार किया, पुलिस ने रोक कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक अनिल दास ने बताया कि लगभग शाम चार बजे औगासी पुल के पास विधायक की गिरफ्तारी की गई है।
गिरफ्तार विधायक को पुलिस पहले देहात कोतवाली ले गई। देर रात्रि मेडिकल परीक्षण के बाद सीजेएम तृप्ता चौधरी के समक्ष उनके आवास पर पेश किया गया। सीजेएम ने विधायक को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। रात्रि 9.49 बजे विधायक को मंडल कारागार में दाखिल कराया गया। शीलू के साथ दुष्कर्म के आरोप में ही पुलिस ने पथरा गांव के रघुवंशमणि द्विवेदी उर्फ सुरेश नेता व राजेंद्र शुक्ला को भी गिरफ्तार किया था। उन्हें भी जेल भेज दिया। उन दोनों को भी मुख्य दंडाधिकारी तृप्ता चौधरी ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया है और कहा कि अभियुक्तों को शिनाख्त होने तक बापर्दा रखा जाए।
अत्याचार की कहानी
-12/13 दिसंबर की रात शीलू विधायक के घर से भागी।
-14 दिसंबर चोरी के मामले में विधायक के पुत्र मयंक ने अतर्रा थाने में दर्ज कराया मुकदमा।
-15 दिसंबर को पुलिस ने रात आठ बजे शीलू को जेल भेजा।
-17 दिसंबर को गुलाबी गैंग की कमांडर संपत पाल ने शीलू को न्याय दिलाने की आवाज उठायी।
-19 दिसंबर को कथित प्रेमी रज्जू पटेल की मां व पिता ने जेल में शीलू से की मुलाकात।
-21 दिसंबर को शीलू को मेडिकल के लिए अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने किया इंकार।
-22 दिसंबर को शीलू का भाई संतू ने जेल में मुलाकात की और बहन पर अत्याचार का आरोप लगाया।
-24 दिसंबर को शीलू को अतर्रा मुंसिफ न्यायालय में पेश किया गया। जहां बयान नहीं हुए, वहीं पर उसने पत्रकारों से विधायक के घर पर अत्याचार की बात कही।
-26 को कांग्रेस के सदर विधायक विवेक सिंह जेल में शीलू से मिले और कहा कि शीलू ने बताया है उसके साथ विधायक के घर अत्याचार हुआ।
-27 दिसंबर को शीलू के पिता अच्छेलाल ने गुलाबी गैंग की कमांडर के साथ कचहरी पहुंचकर विधायक व उसके भाई पर धमकी देने का लगाया आरोप।
-29 दिसंबर को पुलिस कप्तान जेल पहुंचकर पांच घंटे तक शीलू से की पूछताछ, रात में हुआ मेडिकल परीक्षण।
-दो जनवरी को जेल में शीलू के भाई संतू ने की मुलाकात और कहा कि बहन ने बताया कि उसके साथ विधायक समेत पांच लोगों ने किया बलात्कार।
-12 जनवरी को सीबीसीआइडी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर विधायक सहित पांच लोगों पर मुकदमा पंजीकृत।
एसपी व थानेदार पर भी होगी कार्रवाई
लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। दिव्या काड में पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद बांदा के शीलू दुराचार कांड की अनदेखी करने वाले अफसरों पर शिकंजा कसने लगा है। अब उन पर भी गाज गिरनी तय है। सूत्रों के मुताबिक सीआइडी की जांच में अतर्रा के थानेदार और बांदा के एसपी अनिल दास की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। दलील है कि अगर कोई भी महिला अपने साथ दुष्कर्म की शिकायत करे तो तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए, लेकिन 12 दिसंबर को पकड़े जाने के बाद शीलू के लगातार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस कान बंद किए रही। उल्टे चोरी का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया। उसका इलाज भी नहीं कराया गया, जबकि दुराचारियों ने उसे लहुलूहान कर दिया था।
शीलू कांड की जांच कर रही सीबीसीआइडी जैसे ही शासन को डीएफआर [ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट] सौंपेगी, तुरंत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। सूत्रों का यह भी दावा है कि शीलू भले ही कपड़े और मोबाइल लेकर गयी, लेकिन उसकी मंशा चोरी की नहीं थी, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लग सकती है, लेकिन कुछ जेलकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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बी.बी.सी.से साभार-

नरेश द्विवेदी
बसपा विधायक नरेश द्विवेदी ने दी गिरफ्तारी
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक नाबालिग युवती के साथ कथित बलात्कार के आरोपी सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी ने बृहस्पतिवार को अंततः अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया.
पीड़ित युवती शीलू निषाद विधायक के घर से चोरी के एक मुक़दमे में एक महीने से जेल में है. विपक्ष, विधायक की गिरफ्तारी से संतुष्ट नही है और वह पीड़ित युवती की रिहाई तथा मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है.
आरोपी विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के परिवार के लोगों के अनुसार वह गुरुवार शाम लखनऊ से वापस बांदा पहुंचे और अपने आपको पुलिस अधीक्षक अनिल दास के हवाले कर दिया.
जानकार लोगों के अनुसार बुधवार को लखनऊ में वह सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में मिले थे और अपने को बेगुनाह बताया था.
विधायक का कहना है कि वह लंबे अरसे से मधुमेह से पीड़ित हैं और शारीरिक रूप से सेक्स के लिए अक्षम हैं, इसलिए मामले की सही जांच के लिए उनका डीएनए टेस्ट और युवती के कपड़ों का फोरेंसिक परिक्षण कराया जाए.

राजनीतिक दबाव

लेकिन सरकार ने सीआईडी रिपोर्ट में 12 दिसंबर की रात विधायक के घर में बलात्कार की पुष्टि का हवाला देते हुए बुधवार को पुलिस को विधायक और उनके तीन सहयोगियों के ख़िलाफ बलात्कार का केस दर्ज करने के निर्देश दिए.
रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि पीड़ित युवती ने दस जनवरी को अदालत में लिखित प्रार्थना पत्र देकर विधायक और उनके सहयोगियों पर बलात्कार का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है और कानूनन उसकी अनदेखी नही की जा सकती.
पिछले चौबीस घंटों में टीवी न्यज़ चैनल बराबर यह कह रहे थे कि पुलिस जान बूझकर विधायक को गिरफ़्तार नही कर रही है.
कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह की प्रेस कांफ्रेंस में उनसे जब यही सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा "बस कुछ और समय दीजिए.''
इसके थोड़ी देर बाद बांदा से खबर आयी कि विधायक ने अपने को पुलिस के हवाले कर दिया है.

कड़ी आलोचना

विपक्षी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष रीता जोशी ने एक बयान में कहा है कि सरकार ने विपक्ष और मीडिया के भारी दबाव पर विधायक को तो गिरफ़्तार किया है लेकिन पीड़ित युवती पर चोरी का झूठा मुकदमा खत्म नही किया.
इस बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात में कहा है कि एक नाबालिग और बलात्कार की शिकार युवती को जेल में बंद करना न्याय का मखौल है.
इस मामले में विपक्ष बंद के पुलिस अधीक्षक पर भी कार्यवाही मांग कर रहा है. पुलिस अधीक्षक अनिल दास पीड़ित युवती से मिलने जेल गए थे और आरोप है कि उन्होंने युवती पर बलात्कार का मामला दर्ज न कराने का दबाव डाला.
नियमानुसार पुलिस अधिकारी अदालत की अनुमति के बिना जेल में बंद अभियुक्त से नही मिल सकता.
पुलिस अधीक्षक पर यह भी आरोप है कि वह विधायक की मदद कर रहे थे इसीलिए युवती के परिवार की ओर से बलात्कार का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया.
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने एक बयान में कहा है कि विधायक का आत्मसमर्पण नाकाफी है.
पाठक का कहना है कि चूँकि इस मामले में पुलिस अधीक्षक की भूमिका संदिग्ध है इसलिए उनके ख़िलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए.








दो सिपाहियों की हत्या कर साथी को छुड़ा ले गये बदमाश

Mar 16, 11:43 pm
इलाहाबाद । इलाहाबाद-जौनपुर पैसेंजर (फोर एजे) ट्रेन में मंगलवार की रात दो सिपाहियों की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह सनसनीखेज वारदात फूलपुर के समीप बरियारामपुर स्टेशन के पास हुई। पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद बदमाश अपने साथी को छुड़ाकर भाग निकले। सूचना पुलिस महकमे में हुई तो हड़कम्प मच गया। आईजी, डीआईजी समेत कई थानों की पुलिस के साथ ही रेलवे पुलिस भी मौके पर पहुंची। समाचार लिखे जाने तक बदमाशों के बारे में पता लगाया जा रहा था।
जौनपुर से इलाहाबाद आने वाले ट्रेन से दो पुलिसकर्मी हरेराम (45) व धर्मेद्र कुमार (50) शातिर बदमाश नीरज सिंह पुत्र जोखई निवासी शेरवा सिकरारा जनपद जौनपुर को मंगलवार को रात इलाहाबाद लाने के लिए सवार हुए। बताया जाता है कि नीरज की मंगलवार को जौनपुर कचहरी में पेशी थी। ट्रेन फूलपुर के पास बरियारामपुर स्टेशन के पास पहुंची थी एक बोगी से गोलियों की आवाज आने लगी। यात्री डकैती की आशंका से भयभीत हो उठे और ट्रेन में अफरा-तफरी मच गयी। कुछ ही देर में ट्रेन फूलपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो यात्री भागकर रेलवे पुलिस के पास पहुंचे और बताया कि बोगी में गोली चली है। सूचना पाते ही रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची तो दो पुलिसकर्मियों की लाश देखकर दंग रह गयी। इसकी सूचना पाकर आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। बोगी से पुलिस को नाइन एमएम की गोली मिली। पुलिस के अनुसार दोनों सिपाही इलाहाबाद स्थित पुलिस लाइंस में तैनात थे। नीरज सिंह के खिलाफ जौनपुर में लगभग एक दर्जन संगीन मामले दर्ज हैं। वहां की जेल में इनकी गतिविधियां संदिग्ध थी, जिस कारण कुछ ही समय पहले उसे नैनी जेल स्थानांतरित किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नीरज के आधा दर्जन साथियों ने घटना को अंजाम दिया है। सिपाहियों की हत्या कर वे नीरज को छुड़ा ले गये। उनकी तलाश की जा रही है।


कांस्टेबल ने की युवती से छेड़छाड़, बवाल

Mar 17, 02:56 am
गाजियाबाद, जागरण संवाद केंद्र
माता की ज्योति लेकर जा रही एक युवती से लाल कुआं चौकी पर तैनात कांस्टेबल द्वारा बदतमीजी करने से क्षुब्ध लोगों ने जमकर बवाल काटा। लोगों ने पुलिस चौकी व वाहनों पर जमकर पथराव किया। घटना में जहां एक उपनिरीक्षक गंभीर रूप से घायल हो गया, वहीं कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गये। पुलिस ने बवाल काटने वाले चार युवकों को गिरफ्तार किया है। जबकि, युवती से बदतमीजी करने वाले कांस्टेबल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वहीं, एसएसपी ने चौकी पर तैनात एक दरोगा समेत सभी पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। घटना मंगलवार तड़के करीब साढे़ तीन बजे की है।
दिल्ली से कुछ लोग माता की ज्योति लेकर दादरी के धूम माणिकपुर गांव की ओर जा रहे थे। इन लोगों में राखी पत्‍‌नी राजेश निवासी धूम माणिकपुर भी शामिल थी। राखी का आरोप है कि वह लाल कुआं चौकी के पास पानी पी रही थी कि इसी दौरान वहां तैनात कांस्टेबल प्रसादी लाल ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। इसी बात को लेकर थोड़ी ही देर में लोगों के बीच आक्रोश फैल गया। घटना का पता चलते ही आसपास के लोग भी काफी संख्या में वहां एकत्र हो गये।
गुस्साये लोगों ने लाल कुआं चौकी पर पथराव कर दिया। इतना ही नहीं मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर वाहनों में भी पथराव शुरू कर दिया। इससे दो रोडवेज बसों समेत कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गये। पथराव की सूचना मिलते ही पुलिस की पेट्रोल कार भी मौके पर पहुंची। गुस्साई भीड़ ने पेट्रोल कार पर भी जमकर पत्थर बरसाये। इससे पेट्रोल कार पर तैनात उपनिरीक्षक आरके शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रघुबीर लाल भी स्वयं मौके पर पहुंच गये। कप्तान के समझाये जाने पर ही लोग शांत हुए। लोगों ने कप्तान से लाल कुआं चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ जमकर शिकायत की।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रघुबीर लाल ने बताया कि लोगों की शिकायत को ध्यान में रखते हुए लाल कुआं चौकी प्रभारी फतेह सिंह समेत 16 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। आरोपी कांस्टेबल प्रसादी लाल के खिलाफ आईपीसी की धारा-354 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बवाल करने के आरोप में मौके से वीरपाल, सुनील, संजय व रिंकू नामक युवकों को गिरफ्तार किया गया है

दुष्कर्म के आरोपी को सिर्फ पांच जूते की सजा

Mar 17, 02:55 am
धौलाना (गाजियाबाद)। थाना क्षेत्र के गांव शौलाना निवासी एक किशोरी को घर में अकेली पाकर दो दिन पूर्व उसके पड़ोसी झोलाछाप पशु चिकित्सक ने उससे दुष्कर्म किया। पीड़ित के परिजनों ने मान-अपमान को ध्यान में रखते हुए इसे मात्र छेड़छाड़ का मामला बताया। वहीं, पंचायत ने आरोपी को भरी पंचायत में पांच जूते मारकर हिसाब बराबर कर दिया, लेकिन अब मामला उछलने के बाद पीड़ित ने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई है। उधर, पुलिस ने गांव के प्रधान सहित करीब आधा दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया है, जबकि आरोपी अभी फरार है।
शौलाना निवासी रूप सिंह की बेटी श्वेता शनिवार सुबह को घर में अकेली थी। इस दौरान उसका पड़ोसी रिश्ते का भाई व झोलाछाप पशु चिकित्सक नरेंद्र पुत्र अमर सिंह घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसी बीच किशोरी की मां घर आ गई, जिस पर आरोपी भाग गया। इस घटना को लेकर पंचायत हुई और पंचायत में आरोपी को अपमान के बदले अपमान का फरमान सुनाते हुए पांच जूते पीड़ित के चाचा ने मारे। इसके बाद मामला दबा दिया गया। बताया जाता है कि इस बीच पीड़ित पक्ष रिपोर्ट दर्ज कराने थाने भी जाना चाहता था, लेकिन गांव के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने मान सम्मान की दुहाई देकर उन्हें रोक लिया। सब कुछ शांत हो चुका था, लेकिन एक व्यक्ति ने मामले को दबाने की एवज में दोनों पक्षों से पांच-पांच हजार रुपये की मांग की। इसके बाद मामला सामने आया तो पीड़ित पक्ष ने थाने पहुंचकर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने गांव के प्रधान कुलदीप सिंह सहित करीब आधा दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया है। वहीं, पीड़ित को चिकित्सा परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। उधर, गांव प्रधान कुलदीप सिंह का कहना है कि जब वह पंचायत में पहुंचे तो पीड़ित पक्ष ने पारिवारिक मामला बताकर उन्हें हस्तक्षेप न करने को कहकर वापस लौटा दिया।

रेप, रिहाई और फिर रेप

Mar 16, 02:30 am
नोएडा/इंदिरापुरम, जागरण टीम: इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में युवती का अपहरण कर दो सगे भाइयों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पीड़िता के मुताबिक वारदात में एक आरोपी की पत्नी भी शामिल थी। आरोपी महिला के सहयोग से उसके पति और देवर ने उसके संग चलती कार में दुष्कर्म किया। युवती सोमवार सुबह नोएडा की ग्रीन बेल्ट में बेहोश मिली। नोएडा पुलिस ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा गाजियाबाद पुलिस को सूचना दी। पीड़ित युवती के पिता की शिकायत पर इंदिरापुरम थाना पुलिस ने महिला सहित तीन आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मुख्य आरोपी लगभग दो साल पहले भी इसी युवती से दुष्कर्म करने के आरोप में जेल जा चुका है?
सोमवार सुबह साढ़े सात बजे नोएडा पुलिस को सूचना मिली कि सेक्टर 22 की ग्रीन बेल्ट में एक युवती बेहोश पड़ी है। सूचना पर नोएडा पुलिस की पीसीआर 11 मौके पर पहुंची और युवती को जिला अस्पताल ले गई। अस्पताल में होश आने पर युवती ने अपने संग सामूहिक दुष्कर्म की कहानी बताई तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एसएसपी अशोक कुमार सिंह, एसपी सिटी अशोक त्रिपाठी और क्षेत्राधिकारी विकास चंद्र त्रिपाठी अस्पताल पहुंचे। पूछताछ में युवती ने बताया कि वह खोड़ा के रजत विहार कालोनी में रहती है।
रविवार रात साढ़े आठ बजे वह सब्जी खरीदने जा रही थी। आरोप है कि रास्ते में उसे सिहानी गेट थाना क्षेत्र के गांव नूर नगर निवासी दिनेश त्यागी, उसका बड़ा भाई मुकेश त्यागी और मुकेश की पत्‍‌नी सरिता एक वैगनआर कार में मिले। सरिता ने पीड़िता को कार के पास बातचीत के लिए रोका और तो दिनेश व मुकेश ने जबरन उसे कार में डाल लिया। चलती कार में सरिता ने उसका मुंह दबाया और उसके देवर दिनेश व पति मुकेश ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद वह लोग उसे नोएडा लाए और उसके साथ मारपीट की। आरोपियों ने उसका गला दबाने का भी प्रयास किया, जिससे वह बेहोश हो गई। आरोपियों ने उसे मरा समझ सेक्टर 22 की ग्रीन बेल्ट में फेंक दिया।
पीड़िता के बयान पर नोएडा पुलिस ने इंदिरापुरम थाना पुलिस को सूचना दी। इंदिरापुरम पुलिस ने जिला अस्पताल पहुंच पीड़िता का बयान लिया और उसके पिता की शिकायत पर आरोपी दिनेश त्यागी, मुकेश त्यागी और सरिता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इंदिरापुरम कोतवाली प्रभारी राजेश द्विवेदी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए नूर नगर स्थित उनके आवास पर दबिश दी गई। मुकेश और उसकी पत्नी सरिता को हिरासत में ले पूछताछ की जा रही है।
2008 में इसी युवती से रेप में जेल जा चुका है दिनेश
पुलिस के मुताबिक इससे पहले 12 सितम्बर 2008 को भी पीड़ित युवती ने दिनेश त्यागी के खिलाफ सिहानी गेट थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। उस वक्त पीड़िता परिजनों संग गाजियाबाद के नंद ग्राम में रहती थी। नोएडा के सेक्टर 63 में गार्ड का काम करने वाले युवती के पिता ने बताया कि उस वक्त आरोपी दिनेश पास में ही मोबाइल रिचार्ज की दुकान लगाता था। उसकी बेटी वहां से मोबाइल रिचार्ज कराती थी। इसी दौरान दिनेश ने उसके साथ रेप किया था। मामले में दोनों पक्षों ने बाद में समझौता कर लिया। जिसके बाद अदालत ने 12 जनवरी 2010 को दिनेश को बरी कर दिया। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही।

घोड़ी बछेड़ा में ग्रामीण-पुलिस भिड़े

Mar 17, 02:56 am
ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : दादरी कोतवाली क्षेत्र के गांव घोड़ी बछेड़ा में मंगलवार रात ग्रामीणों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया और गोलियां चलाई। लगभग एक घंटे तक ग्रामीणों और पुलिस के बीच टकराव चलता रहा। पुलिस को भाग कर जान बचानी पड़ी। पथराव में युवक समेत तीन पुलिस कर्मी घायल हो गए। आरोप है कि ग्रामीणों ने एक बसपा नेता के घर पर पथराव किया था। पुलिस बसपा नेता पर हमला करने वालों को गिरफ्तार करने गई थी। इसी पर बवाल हो गया। देर रात तक गांव में तनाव बना हुआ था। आसपास के सभी थानों की पुलिस मौके पर बुला ली गई है।
गांव घोड़ी बछेड़ा निवासी बसपा नेता मेहंदी हसन के भांजे पर लगभग एक माह पहलेगांव की एक लड़की को बहला फुसला कर भगा ले जाने का आरोप लगा था। इसे लेकर गांव में पंचायत हुई। इसमें बसपा नेता को भी लड़की भगाने में सहयोग करने का दोषी माना गया। इसी को लेकर बसपा नेता की ग्रामीणों से कहासुनी हो गई थी। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने उसके घर पर पथराव कर दिया। बसपा नेता ने दादरी कोतवाली में केस दर्ज करा दिया। मंगलवार रात दादरी पुलिस बसपा नेता के घर पर पथराव के आरोपियों को गिरफ्तार करने गांव पहुंची। पुलिस एक युवक को गिरफ्तार कर ले जा रही थी तभी ग्रामीणों ने पुलिस का घेराव किया और युवक को छुड़ा लिया। युवक को छुड़ाने के दौरान पुलिस व ग्रामीणों में हाथापाई हुई। पुलिस ने जब बल प्रयोग करने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव होते ही पुलिस कर्मियों में भगदड़ मच गई। ग्रामीणों को रोकने के लिए पुलिस को हवा में फायरिंग करनी पड़ी। इसी दौरान दूसरी तरफ से ग्रामीणों ने भी फायरिंग शुरू कर दी। ग्रामीणों की तरफ से गोली चलते ही पुलिस भाग खड़ी हुई। आरोप है कि इसके बाद ग्रामीणों ने बसपा नेता का घर घेर लिया और फिर से पथराव शुरू कर दिया। इससे गांव में भगदड़ मच गई। पथराव में एक युवक समेत तीन पुलिस कर्मी घायल हो गए। पथराव व गोली चलने की सूचना मिलते ही एसपी देहात सुरेंद्र कुमार वर्मा व पुलिस क्षेत्राधिकारी राहुल कुमार टीम के साथ गांव पहुंचे। सीओ राहुल कुमार का कहना है कि ग्रामीणों की तरफ से पथराव व गोली चलाई गई। कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

नकल रोकने पहुंचे डी आईओएस की पिटाई

Mar 17, 12:57 am
आगरा। नकल माफिया की हिम्मत देखो। ग्वालियर रोड कुबूलपुर स्थित केदारनाथ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में खुलेआम नकल की शिकायत पर पहुंचे सचल दल पर हमला बोल दिया गया। दल के सदस्यों से मारपीट की गयी, जिससे डीआईओएस के हाथ में चोटें आई हैं। घटना के बाद केंद्र व्यवस्था के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई लेकिन एक मंत्री का फोन आ गया। इसके बाद मामले को सिर्फ चेतावनी देकर रफादफा कर दिया गया।
मंगलवार को हाईस्कूल विज्ञान की परीक्षा थी। कुबूलपुर के विद्यालय में माफिया की ओर से नकल कराने की सूचना डीआईओएस मनोज गिरी को मिली, जिस पर वह वहां पहुंच गये। डीआईओएस ने सचल दल की जीप को कुछ दूरी पर छोड़कर दल के एक सदस्य के साथ बाइक से स्कूल की दूरी तय की। मुख्य द्वार पर सचल दल सदस्य सौरभ और दूसरे गेट पर डीआईओएस ने नाकाबंदी कर ली।
अचानक सचल दल को देख नकल कराने वालों में भगदड़ मच गई। इस दौरान डीआईओएस के हाथ दो-तीन लोग लग गये। लेकिन खुद को फंसता देख डीआईओएस से मारपीट की। इस दौरान उनके कपड़े भी फट गए। केंद्र पर मौजूद एक मात्र सिपाही यह नजारा मूक दर्शक बन देखता रहा। जब तक सचल दल के बाकी सदस्य स्कूल तक पहुंचते हमलावर भाग चुके थे।
पूरे प्रकरण में डीआईओएस ने पहले प्रधानाचार्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का मन बना लिया गया। सूत्रों के अनुसार इसके लिए पहले केंद्र व्यवस्थापक की ओर से प्रधानाचार्य के खिलाफ तहरीर दिलवाई गई, लेकिन सूबे के एक मंत्री के फोन आने के बाद थाने में दिया गया शिकायती पत्र वापस ले लिया। केंद्र व्यवस्थापक और प्रधानाचार्य को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया।

प9द्रह करोड़ से &यादा क ा है फार्म जोटाला

Mar 17, 12:58 am
आगरा। सत्र 09-10 के परीक्षा फार्मो में हुए घोटाले की परतें उधड़ने के बाद विवि प्रशासन भी दंग रह गया है। मामले में 26 कालेजों के नाम सामने आने के बाद जब रिकार्ड मंगाए गए तो करीब 100 और कालेज ऐसे मिल गए, जिन्होंने शेयर मनी जमा नहीं की। इसके अलावा तय सीटों से ज्यादा प्रवेश लेने वाले भी करीब 100 महाविद्यालयों ने फार्म सीधे जमा कराने के संकेत मिल गए हैं। जिसके बाद घोटाले की राशि 15 करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
गत सप्ताह विवि के वित्ताधिकारी ने सत्र 09-10 की परीक्षाओं में आठ कालेजों द्वारा बिना शेयर मनी और परीक्षा शुल्क जमा किए, सीधे परीक्षा विभाग में परीक्षा फार्म जमा करने की शिकायत की थी। जिसके बाद विवि ने जांच की तो ऐसे कालेजों की संख्या 26 निकली। इसके बाद पिछले तीन दिन से जांच का सिलसिला चल रहा है। मामले की तह तक जाने के लिए कुलपति ने बैंक से ड्राफ्ट के जरिए जमा हुई धनराशि का विवरण मांगा था। मंगलवार को जब विवरण मांगा तो विवि प्रशासन के होश उड़ गए।
विवरण के हिसाब से करीब 100 कालेज ऐसे मिले, जिन्होंने परीक्षा शुल्क तो जमा किया, लेकिन अंशदान जमा नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद और जानकारी कराई गई तो पता चला कि 100 से ज्यादा कालेज ऐसे हैं, जिन्होंने अपने यहां निर्धारित सीटों से ज्यादा प्रवेश कर रखे हैं। इन कालेजों ने निर्धारित सीटों के हिसाब से परीक्षार्थियों के फार्म तो शेयर मनी और परीक्षा शुल्क के साथ जमा किए। लेकिन सीटों से अतिरिक्त लिए गए प्रवेशों के परीक्षा फार्म सेटिंग कर सीधे परीक्षा विभाग में जमा करा दिए और कोई भी शुल्क विवि में जमा नहीं किया।
गौरतलब है कि कालेजों द्वारा परीक्षा फार्म के साथ प्रति छात्र 500 रुपये शेयरमनी और करीब 500 रुपये परीक्षा आदि का शुल्क जमा किया जाता है। ऐसे में विवि के खजाने को 15 करोड़ रुपये का चूना लगने की बात कही जा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि विवि ने परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से यदि शुल्क की राशि का बारीकी से मिलान किया तो अभी और भी कालेजों के नाम इस घोटाले में सामने आ सकते हैं।
कुलपति प्रो. केएन त्रिपाठी ने बताया कि मामले का पूरा खुलासा किया जाएगा। अभी केवल बैंक से रिकार्ड आया है, वित्त विभाग से विवरण मिलना बाकी है। इन दोनों रिकार्ड का मिलान करने के बाद गड़बड़ी करने वाले भी कालेजों के नाम सामने आ जाएंगे। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

पहले लूटे दर्शनार्थी, फिर छुए पैर

Mar 17, 12:55 am
आगरा। करौली दर्शन से पैदल लौट रहे दर्शनार्थियों को कच्छा बनियान धारी गिरोह ने पहले लूटा और फिर पैर छूकर माफी मांगते हुए चलते बने। घटना की सूचना किरावली पुलिस को दी गई है।
ग्रामीणों ने मुताबिक निनवाया गांव के परिवार रात लगभग 11 बजे कैलादेवी से दर्शन करके पैदल लौट रहे थे। गांव में चम्पा कमल देवी इंटर कालेज के पास आधा दर्जन युवकों ने दर्शनार्थियों को रोक लिया। महिलाओं व युवतियों के कान के कुंडल और अन्य जेवरात धमकाते हुए उतरवा लिए। ग्रामीण केदार सिंह ने बताया कि दहशत के कारण बदमाशों का विरोध नहीं किया जा सका। महिलाओं और युवतियों के जेवरात लूटने के बाद बदमाशों ने पैर छूकर उनसे माफी मांगी, लेकिन जेवरात नहीं लौटाए।

ढाई महीने में सात बंदियों की मौत

Mar 17, 12:55 am
आगरा। केंद्रीय कारागार में लगभग चार सौ बुजुर्ग बंदी निरुद्ध हैं। इसमें अधिकांश डिप्रेशन के चलते विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जेल को चिकित्सा व्यवस्था और दवाओं के लिये मिलने वाला बजट इन कैदियों के इलाज पर खर्च हो जाता है। इसके बावजूद बीमारी से मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा।
सेंट्रल जेल में इस समय लगभग 2200 बंदी निरुद्ध हैं। जबकि उसकी क्षमता इससे काफी कम है। इससे बैरकों में बंदियों की संख्या बढ़ी है। उनको आराम से रहने की जगह उपलब्ध नहीं हो पाती। जेल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार साठ साल और उससे अधिक उम्र वाले चार सौ बंदियों में कैंसर का एक, 30 क्षय रोग, 20 हृदय रोग और 50 से अधिक दमा के रोगी हैं। वृद्ध बंदियों में दो दर्जन से अधिक ऐसे हैं, जो ठीक से उठ बैठ तक नहीं सकते। दरअसल, उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें अपनों की देखभाल की सख्त जरूरत है। लेकिन रिहाई की आस पूरी नहीं होने के चलते वह डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। ये सब कारण उनका जीने का हौसला छीन रहे हैं।





ब्लड बैंक नहीं, कंगाल बैंक कहिए जनाब

Mar 16, 11:43 pm
इलाहाबाद । शहर के सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों को कंगाल बैंक कहा जाए तो गलत नहीं है। इन ब्लड बैंकों में ब्लड की किल्लत हर समय बनी रहती है। यहां भर्ती ज्यादातर मरीजों की जान एएमए जैसे निजी ब्लड बैंकों के सहारे ही बच पाती है। इनकी हालत सुधारने के लिए न तो अस्पताल प्रशासन कोई इंतजाम कर रहा है और न जिला प्रशासन। ईश्वर न करे कि कोई बड़ी दुर्घटना हो, अन्यथा स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा।
मालूम हो कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल और काल्विन अस्पताल में तकरीबन तीन-तीन सौ यूनिट की क्षमता के ब्लड बैंक स्थापित हैं, लेकिन यहां हर समय ब्लड का टोटा बना रहता है। हालांकि जनवरी में शासन के निर्देश पर रक्त दान माह घोषित करने के साथ अभियान चलाने से कुछ स्थिति में सुधार जरूर आया था, लेकिन फिर पुरानी स्थिति है। काल्विन ब्लड की तो अजीब ही हालत है। यह ब्लड बैंक केवल दो टेक्नीशियनों के सहारे चल रहा है। एक भी पैथोलॉजिस्ट नहीं है। सीएमएस डा. एके चढ्डा ने बताया कि चौबीस घंटे संचालन के लिए चार पैथोलॉजिस्ट और चार लैब टेक्नीशियन की जरूरत है, लेकिन शासन यह कमी पूरी नहीं कर रहा। तीन सौ यूनिट क्षमता के इस ब्लड बैंक में इस समय केवल 14 यूनिट ब्लड है, उसमें भी बी पॉजिटिव व बी निगेटिव तो एक भी यूनिट नहीं है। दो बजे के पहले ही ब्लड बैंक बंद हो जाता है। स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के ब्लड बैंक की हालत तो और भी खस्ता है। लैब टेक्नीशियनों की कमी तो है ही, यहां भी कोई पैथोलाजिस्ट नहीं हैं। जबकि चौबीस घंटे के संचालन के लिए कम से कम चार पैथोलाजिस्ट की जरूरत है। इसके लाइसेंस का नवीनीकरण तक अधर में लटका हुआ है। लाखों रुपये के उपकरणों पर धूल जम रही है, लेकिन अभी तक ब्लड सेप्रेशन यूनिट का भी लाइसेंस नहीं प्राप्त हो सका है। पिछले साल नाको की टीम ने निरीक्षण कर व्याप्त कमियों को दूर करने के निर्देश दिये थे, लेकिन वह कमियां आज तक दूर नहीं हो सकीं। इसकी क्षमता भी 300 यूनिट से अधिक है, लेकिन 30-40 यूनिट से अधिक ब्लड नहीं है। बेली अस्पताल में ब्लड बैंक का भवन तैयार हो चुका है, लेकिन अभी आवश्यक उपकरण आने बाकी है। यह हाल हैं इन सरकारी ब्लड बैंकों का। इन्हीं अस्पतालों के मरीजों को कई किमी चलकर इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के ब्लड बैंक जाना पड़ता है, जिसमें काफी परेशानी होती है और कई गुना अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। एएमए ब्लड बैंक पर मरीजों की निर्भरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां हमेशा 200 से 300 यूनिट ब्लड का स्टाक रहता है और प्रतिदिन 80 से 125 यूनिट ब्लड का लेनदेन होता है। जबकि सरकारी ब्लड बैंकों में प्रतिदिन बमुश्किल एक दर्जन यूनिट का ही लेनदेन होता है। यहां ब्लड सेप्रेशन यूनिट भी है, जिससे ब्लड के साथ ही प्लाज्मा और प्लेटलेट भी उपलब्ध हो जाता है।








करोड़पति हैं, लिहाजा कानून पर भी भारी

Apr 30, 01:19 am
लखनऊ। उनकी जितनी आय नहीं है, उससे ज्यादा की संपत्तिके वे मालिक हैं। अब जैसे लखनऊ विकास प्राधिकरण में एक बाबू हैं, वह हांडा कार के मालिक तो हैं हीं, उनके पास लखनऊ में विकास प्राधिकरण के आधा दर्जन से ज्यादा प्लाट हैं, जिनकी कीमत करोड़ में पहुंच चुकी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एक बाबू की हैसियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि लखनऊ में जिस अपार्टमेंट में वह रहते हैं, वहां एक मकान की कीमत पचास लाख रुपये से अधिक की है। कानपुर में तैनात एक दारोगा जी अब तक नोएडा जैसे शहर में दो प्लाट और एक फ्लैट के मालिक बन चुके हैं, ऐसे में उनकी हैसियत का अंदाजा खुद-ब-खुद लग सकता है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में एक ऐसा बाबू है, जिसके पास एक दर्जन से अधिक बसें हैं। उसकी पहचान एक सरकारी कर्मी के रूप में नहीं, क्षेत्र में एक ट्रांसपोर्टर के रूप में है। बरेली शहर में बने एक माल में शिक्षा विभाग के एक क्लर्क का पैसा लगा होने की बात सामने आयी है। आजमगढ़ के शिक्षा विभाग में तैनात एक क्लर्क बड़े स्तर का प्रापर्टी डीलर बन चुका है। बहराइच में एक पुलिस उपनिरीक्षक के पास करोड़ों रुपये की संपत्तिहोने की बात पता चली है।
यह कुछ उदाहरण हैं। उत्तार प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान और भ्रष्टाचार निवारण संगठन अब तक ऐसे 338 सरकारी कर्मियों को चिंहित कर चुका है, जिनकी संपत्तिउनकी आय से कहीं ज्यादा नजर आ रही है। अब इसे दौलत का कमाल ही कहेंगे कि उनके खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान और भ्रष्टाचार निवारण संगठन जांच की अनुमति चाह रहा है, वह अनुमति उसे मिल नहीं रही है। फाइल गृह विभाग में ही अटकी हुई है।
दरअसल सरकार के पास इस तरह की शिकायतें लगातार पहुंचती रही हैं कि विकास प्राधिकरणों, शिक्षा, स्वास्थ्य, लोकनिर्माण, आवास जैसे विभाग में बाबू स्तर पर भ्रष्टाचार इस हद तक जड़े जमा चुका है कि बाबू लोग करोड़पति हो चुके हैं। ऐसी ही शिकायत पुलिस महकमे से भी मिली कि दारोगा और सिपाही स्तर के तमाम लोग करोड़पति हो चुके हैं। वर्ष 2007 में जब बसपा की सरकार बनी तो इस तरह की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सतर्कता अधिष्ठान और भ्रष्टाचार निवारण संगठन को ऐसे सरकारी कर्मियों को चिंहित करने की जिम्मेदारी दी गयी, जिनके पास उनकी आय से अधिक संपत्तिदिख रही है। सतर्कता अधिष्ठान और भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने अब तक ऐसे 338 कर्मियों को चिन्हित किया और उनके नाम सरकार को इस अपेक्षा के साथ प्रेषित किये कि इन कर्मियों ने यह संपत्तिकैसे बनायी, इसकी जांच की अनुमति मिल जाये, लेकिन गृह विभाग है कि जांच की अनुमति देने को तैयार नहीं है। हालांकि गृह विभाग के अफसरों का कहना है कि सतर्कता अधिष्ठान और भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने जो रिपोर्ट दी है, उसका परीक्षण किया जा रहा है। किसी को भी बचाया नहीं जा रहा है। जिनके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, उनकी ही जांच न करने की बात कही गयी है। जल्दी ही अन्य लोगों के खिलाफ जांच करने के निर्देश दिये जायेंगे।




अब फौजी के खून में रंगी खाकी

May 03, 02:48 am
बुलंदशहर। मुठभेड़ के एक दिन बाद ही बुलंदशहर पुलिस की हवा निकल गई। शुक्रवार की रात जिले की खुर्जा पुलिस ने कार लूट के आरोप में जिस बदमाश को मार गिराया था, वह फौजी निकला। उसकी शिनाख्त अलीगढ़ जनपद के थाना खैर के गांव भरारी निवासी कुलदीप के तौर पर हुई। वह राजपूताना रायफल्स 21वीं बटालियन का जवान था और फिलहाल पंजाब के अबोहर में तैनात था। परिजनों ने जहां मुठभेड़ को फर्जी करार दिया है वहीं एसएसपी ने इसे अकस्मात बताया।
रविवार को समाचार पत्रों से एक युवक के मुठभेड़ में मारे जाने की जानकारी मिलने पर अलीगढ़ के थाना खैर के गांव भरारी निवासी बीरी सिंह के परिजन बुलंदशहर पहुंचे। उनका 22 वर्षीय पुत्र कुलदीप 30 अप्रैल को अचानक गायब हो गया था। परिजनों ने जब मार्चरी पर रखी लाश देखी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह उनका अपना कुलदीप था। परिजनों ने बताया कि कुलदीप दो माह के अवकाश पर घर आया था। 12 मई को उसको ड्यूटी पर लौटना था। 30 अप्रैल की सुबह वह घर का सामान लेने बाइक से खैर गया था। दोस्त गौरव पुत्र बच्चू सिंह निवासी हृदय नंगली थाना गोंडा जनपद अलीगढ़ भी उसके साथ था। गेहूं बेचकर लाए गए बीस हजार रुपये, मोबाइल और सेना का आई कार्ड उसके पास था। इसके बाद से वह घर नहीं पहुंचा। उन्होंने उसकी गुमशुदगी अलीगढ़ के खैर थाने में उसके दोस्त गौरव के विरुद्ध दर्ज कराई थी।
कुलदीप तीन साल पूर्व सेना में भर्ती हुआ था। फरवरी माह में बहन पूनम की शादी पर मात्र दस दिन का अवकाश मिला था, जिसके बाद वह अब दो माह की छुट्टी पर आया था। कुलदीप के पिता बीरी सिंह, फूफा रनवीर सिंह, भाई करनपाल सिंह आदि ने मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इस मामले से पुलिस में हड़कंप मच गया है। हालांकि, एसएसपी नीलेश कुमार अब भी मुठभेड़ को सही बता रहे हैं। उन्होंने पत्रकार को बताया कि कार चालक वादी और वारदात सभी गैर जनपद के हैं। पुलिस पर हमले के बाद ही जवाबी कार्रवाई की गई थी। एसएसपी ने माना कि शुरुआती जांच में कुलदीप का कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है।
गौरतलब है कि खुर्जा थाना को शुक्रवार की रात इंडिका कार लूट की सूचना मिली थी। सूचना देने वाले जनपद मथुरा निवासी भगवान पुत्र डूंगर सिंह निवासी गांव फतेहा थाना फरहा ने पुलिस को बताया था कि वह अपने भांजे राकेश कुमार की इंडिका कार को किराए पर चलाते हैं। शुक्रवार सायं सात बजे दो युवक उसकी कार को दाऊजी के लिए बुक कराकर चले थे। वहां से गाड़ी को सादाबाद ले जाने को कहा गया। मना करने पर जंगल के रास्ते में उसको पीटकर सीट के नीचे पैरों में डाल लिया। खुर्जा के अगवाल फाटक पर चालक भगवान को गाड़ी से नीचे फेंककर बदमाश कार लेकर भाग गए। अधिकारियों के अनुसार रात लगभग एक बजे पुलिस टीम इंडिका कार खुर्जा की ओर से आती दिखाई दी। रुकने का इशारा करने पर बदमाशों की गोली चला दी जो चौकी इंचार्ज चोला नरेश कुमार को लग गई। जवाबी कार्रवाई के बाद कार रुक गई और उसमें से एक युवक भागने में कामयाब रहा। कार से एक युवक घायलावस्था में पाया गया जिसने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया था।
घर के पास से उठाया था
कुलदीप के परिजनों ने बताया कि 30 अप्रैल की शाम को कुलदीप घर के पास ही दोस्तों के साथ बाजार के पास था। तभी एक जीप में उसे कुछ लोग बैठाकर ले गए। काफी तलाश करने पर उसके बारे में जानकारी न मिली तो रविवार की सुबह परिजन खैर कोतवाली में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे। इसी दौरान परिजनों को बुलंदशहर पुलिस के हाथों कुलदीप के एनकाउंटर की सूचना मिली। खैर क्षेत्र में पुलिस की इस कारगुजारी के खिलाफ भारी रोष है।

पुलिस ने किया धाराओं का खेल

May 03, 12:58 am
बुलंदशहर। गुलावठी थाने में पुलिस हिरासत में युवक की मौत के मामले में पुलिस ने धाराओं का 'खेल' कर दिया है। हत्या व लूट के मामले को गैर इरादतन हत्या के मामले में तरमीम कर दिया गया। इसका लाभ आरोपियों को मिलेगा।
गुलावठी पुलिस की हिरासत में 24-25 दिसंबर 09 की रात छपरावत निवासी शिवकुमार शर्मा की मौत हो गई थी। इसको लेकर कई सप्ताह तक जोरदार हंगामा हुआ था। शिवकुमार के पिता सुरेन्द्र शर्मा ने नगर कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में तत्कालीन एसओ गुलावठी समय सिंह, दरोगा नरेशपाल और महेन्द्र सिंह तथा सिपाही मनीष कुमार, राजीव व मेजर सिंह पर हत्या व लूट का अभियोग दर्ज कराया था। इन पर आईपीसी की धारा 392 और 392 के तहत कार्रवाई की गई थी। शुरुआत में इसकी जांच सीओ सिकंदराबाद को सौंपी गई थी, लेकिन तीन दिन बाद इसको बदलकर नगर कोतवाल बुलंदशहर को दे दिया गया था। इसके अगले सप्ताह यह जांच जनपद गाजियाबाद की हापुड़ कोतवाली को सौंप दी, जबकि हापुड़ कोतवाली में तैनात सिपाही राजीव इस मामले में आरोपी था। सभी आरोपी अभी तक जेल में हैं। सूत्रों का दावा है कि शिवकुमार के बच्चों को सहायतार्थ लाखों रुपये देने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके परिजन राजी नहीं हुए। इसके लिए बाकायदा एक कमेटी ने मामले को लड़ने का भार अपने कंधों पर संभाला। सूत्रों की मानें तो आरोपियों ने नया खेल कर दिया। पुलिस हिरासत में शिवकुमार हत्या के केस को ही शक्तिहीन कर दिया गया। तत्कालीन एसओ समय सिंह की शह पर हापुड़ पुलिस ने मामले को आईपीसी की धारा 302 व 392 से बदलकर धारा 304 में परिवर्तित कर दिया। यानि हत्या व लूट के मामले को गैर इरादतन हत्या के मामले में तरमीम कर दिया गया। इसका लाभ आरोपियों को मिलेगा। अब उनकी जमानत आसानी से हो सकेगी और यह धारा 302 से कमजोर मानी जाती है। पुलिस ने जिस तरीके से चुपचाप धाराओं का खेल किया है, उससे नीयत में खोट साफ नजर आता है। इस संदर्भ में कोई भी पुलिस अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। एएएसपी नगर जेके शाही ने केवल इतना कहा कि एसओ समेत कई पुलिसकर्मी यदि जेल में पड़े हैं तो सरकारी कार्य करने के कारण। मृतक रंगदारी मांगने का आरोपी था।

मिड डे मिल में चुहिया निकली!

May 03, 12:58 am
सिकंदराबाद (बुलंदशहर)। ग्राम इनायतगढ़ी की पाठशाला में बंटने आये मिड-डे मील के कढ़ी चावल में चुहिया निकलने का मामला प्रकाश में आया है। हेड मास्टर ने भोजन कुत्तों को डलवा दिया।
ग्राम इनायतगढ़ी के प्राइमरी स्कूल में शनिवार को एनजीओ द्वारा कढ़ी चावल के रूप में मिड-डे मील भेजा, जिसे सहायक अध्यापिका इंद्रवती ने चखने को लिया तो उसमें चुहिया निकली। मरी चुहिया को देख अध्यापिकाओं ने कढ़ी चावल बच्चों में न बंटवाकर कुत्तों को डलवा दिया। वहीं इसकी शिकायत एबीएसए समय सिंह नागर से हेड मास्टर इंद्रराज सिंह ने की। श्री नागर ने निकली चुहिया पन्नी में पैक कर कार्यालय लाने की बात कहकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली।

दुश्मन की गोली से मारा जाता तो सब्र कर लेती

May 03, 12:57 am
बुलंदशहर। कुलदीप की मौत से उसका परिवार दुख के सागर में डूब गया। पूरे परिवार का बुरा हाल है। सबसे ज्यादा बुरी हालत कुलदीप की पत्नी शशि की है।
कुलदीप का विवाह एक साल पहले पास के गांव रामा की शशि के साथ हुआ था। शशि का कहना है कि उसका पति देश की रक्षा करने वाला सिपाही था। यदि वह दुश्मनों ने लड़ते हुए शहीद हुए होते तो सब्र कर लेती। अब क्या सोचकर दिल को तसल्ली दूं। कुलदीप की बहन का विवाह पांच फरवरी 2010 को हुआ था। उसकी मौत की सूचना के बाद से वह बेहोश है। मां रामवती देवी का कहना है कि उसका बेटा कार लूट नहीं कर सकता। कुलदीप के भाई करनपाल और संदीप पुलिस की कहानी को पचा नहीं पा रहे हैं। साठ बीघा जमीन के किसान बीरी सिंह का कहना है कि उनके परिवार का पूरे क्षेत्र में सम्मान है, बेटा खोने के गम के साथ ही परिवार की प्रतिष्ठा भी धूमिल हुई है। इसको वह सह नहीं पा रहे हैं।
कुलदीप के परिजनों ने उसके पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना सेना को दे दी है। वहां से यूनिट के सीओ अर्जुन सिंह के नेतृत्व में सेना के कई जवान अलीगढ़ के लिए चल दिए हैं। वह कुलदीप के परिजनों से मिलने के साथ ही पुलिस अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। फोन पर सीओ अर्जुन सिंह ने बताया कि सेना में तीन साल की सर्विस के दौरान कुलदीप का करेक्टर अच्छा रहा।
कथित मुठभेड़ में कुलदीप की मौत ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं। कुलदीप का मारा जाना महज इत्तफाक रहा या कुछ और इस तथ्य को सामने आने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। पुलिस को जैसे ही इंडिका लूटकर भागने की सूचना मिली तो पूरा जनपद सतर्क हो गया। जिले में पिछले दिनों की कई कार लूटी जा चुकी हैं। ऐसे में चोला चौकी पर इंडिका के न रुकने और चौकी प्रभारी को गोली लगने के बाद पुलिस ने गोली चलाई। यदि कार से फायरिंग नहीं की जाती तो पुलिस का एकाएक गोली चलाना संभव नहीं था। एक सवाल यह भी है कि कार से भागने वाला व्यक्ति कौन था। कहीं ऐसा तो नहीं कि कुलदीप का भी अपहरण किया गया हो। अपराधी कार के साथ ही कुलदीप को भी लेकर जा रहे हों, ऐसे में मुठभेड़ में बदमाश कूदकर भाग गए और गोली कुलदीप को गोली लग गई हो। इसके लिए पुलिस ने फरार बदमाश की धरपकड़ को प्रयास तेज करने के साथ ही कार चालक से भी दोबारा पूछताछ शुरू कर दी है। कार चालक भगवान सिंह का करेक्टर भी मथुरा से मंगवाया गया है। कुलदीप के दोस्त गौरव का करेक्टर संदिग्ध बताया जा रहा है। चालक के अनुसार कुलदीप ही उसको रिवाल्वर के बल पर सीट के नीचे दबोचकर बैठाए था। चालक ने मृतक की शिनाख्त भी कर ली थी। यानि लब्बोलुआब यह है कि अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

गवाह को गोली मारकर मौत के घाट उतारा

May 03, 12:57 am
गुलावठी (बुलंदशहर)। थाना क्षेत्र के ग्राम छपरावत के युवक शिवकुमार शर्मा की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में गवाह ग्रामीण अफसर की गोली मार कर हत्या कर दी गई, जिसका शव गांव के तालाब के पास मिला। घटना से गांव में सनसनी फैल गई। एएसपी सिटी, सीओ सिकंदराबाद ने घटनास्थल पहुंच घटना की जानकारी ली। घटना में गांव के ही तीन लोगों को नामजद किया गया है, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ में जुटी है।
रविवार की प्रात: ग्राम मिट्ठेपुर के लोग जब शौच के लिए गए तो गांव में बन रहे तालाब के निकट गांव के अफसर पुत्र असगर का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा हुआ था। घटना को लेकर गांव में सनसनी फैल गई और मृतक के परिजन भी रोते बिलखते घटनास्थल पहुंच गए। मृतक की पत्नी व उसकी एक बेटी अपने मायके गए हुए थे। मृतक अफसर की मिट्ठेपुर में ननिहाल थी वह बचपन से ही अपने मामा के पास ही रहता था इसलिए वह गांव का भांजा भी था। सूचना पाते ही थानाध्यक्ष संजय पांडेय पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंच गए जहां ग्रामीणों ने अफसर की हत्या पर रोष जताया। पुलिस ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक अफसर के मामा मईनुद्दीन ने पुलिस को बताया कि शनिवार की रात करीब नौ बजे गांव के तीन युवक अफसर को घर से बुलाकर ले गए थे और रविवार की प्रात: उसका शव मिला। घटना की जानकारी पाकर सीओ सिकंदराबाद डीके गौतम व एएसपी सिटी जेके शाही ने घटनास्थल पहुंच परिजनों से घटना के संबंध में जानकारी हासिल की।
घटना को लेकर मृतक अफसर के मामा कासम पुत्र सद्दीक ने गांव के तीन युवक फरियाद, कादर व छोटे को नामजद कराते हुए उन पर अफसर को घर से ले जाकर उसकी गोलियों से हत्या कर शव को गांव के तालाब में फेंकने का आरोप लगाया। बाद में सपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिनेश सिंह गुर्जर, काले पहलवान, अमीरूद्दीन मेवाती, तरूण अग्रवाल, फहीमुद्दीन मेवाती ग्राम प्रधान पुत्र, सहजू ठेकेदार, मुजीब खां आदि सैकड़ों ग्रामीण व उसके परिजन थाने पहुंचे जहां उन्होंने मौजूद एएसपी सिटी शाही से घटना का पर्दाफाश करने व तीनों नामजदों की गिरफ्तारी की मांग की, जिस पर एएसपी सिटी ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस तीनों नामजदों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। एएसपी सिटी जेके शाही ने पत्रकारों को घटना के संबंध में बताया कि तीनों नामजद आपराधिक प्रवृति के हैं। प्रथम दृष्टया तीनों घटना में आरोपी हैं, जिनमें से दो युवक मुरादाबाद में रेलवे में चोरी के आरोप में पूर्व में जेल जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मृतक अफसर चार माह पूर्व हुए छपरावत के शिवकुमार की मौत के मामले में पुलिस का गवाह भी था। एएसपी सिटी ने बताया कि इस हत्याकांड की अन्य पहलुओं पर भी जांच की जा रही है।
मृतक अफसर की बूढ़ी मां अख्तरी ने अपने जवान बेटे की मौत पर रोते बिलखते हुए बताया कि मेरे बेटे की हत्या छपरावत वालों ने की है, क्योंकि वह चार माह पूर्व पुलिस हिरासत में हुई शिवकुमार की मौत के मामले में शिवकुमार का दोस्त होने के नाते गवाह था और वह पुलिस के खिलाफ गवाही दिए बिना आ गया था। वह पुलिस का गवाह बन गया था। वह रो-रोकर हत्यारों को कोस रही थी।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पश्चिम क्षेत्र के मीडिया प्रभारी कदीम आलम एडवोकेट ने अफसर की हत्या को एक साजिश बताते हुए आईजी जोन व मुख्यमंत्री को फैक्स भेजकर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। वहीं सपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिनेश सिंह गुर्जर ने भी अफसर की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जांच की मांग है। मृतक समाजवादी पार्टी से जुड़ा था।
फोटो परिचय- 2 बुलजी 2- गुलावठी के ग्राम मिटठेपुर में अफसर की हत्या के बाद शव को देखते ग्रामीण व पुलिस।


बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा स्थगित

May 05, 02:42 am
लखनऊ : फर्रुखाबाद में पर्चा लीक होने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय ने बुधवार को प्रस्तावित बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा-ख्0क्0 स्थगित कर दी है। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव जीपी त्रिपाठी ने बताया कि फर्रुखाबाद में लीक हुआ पर्चा फैक्स के जरिए विवि मंगाया गया था। फैक्स प्रथम प्रश्नपत्र की 'ए' का सीरीज था। इस सीरीज को मूल प्रश्नपत्र के साथ मिलान करने पर सभी प्रश्न एक ही निकले। इसी आधार पर परीक्षा स्थगित कर दी गई है। परीक्षा की अगली तारीख बाद में घोषित की जाएगी। गौरतलब है कि परीक्षा प्रदेश के क्ख् शहरों में क्ख्7ब् परीक्षा केन्द्रों पर होनी थी। इसमें म् लाख 9ख् हजार अभ्यर्थी शामिल होने थे। सारी तैयारियां भी पूरी की जा चुकी थीं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सत्र ख्0क्0 की बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी इस बार लखनऊ विवि को सौंपी गई है। लखनऊ विवि ने बीएड प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए स्नातक या परास्नातक स्तर पर न्यूनतम अर्हता ब्भ् फीसदी रखी थी। यह अर्हता रखना ही लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का न्यूनतम अर्हता भ्0 फीसदी का शासनादेश जारी करने के बाद भ्0 फीसदी से कम अभ्यर्थियों पर परीक्षा के लिए अयोग्य करार कर दिया गया। ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या क्,ब्भ्,क्म्क् थी। इस फैसले के विरोध में लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अलग-अलग रिट दायर की गई थीं। दोनों न्यायालय से अलग-अलग निर्णय आने के बाद असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई। लखनऊ खण्डपीठ ने याची कुमारी लक्ष्मी व अन्य की ओर से दायर याचिका पर राज्य सरकार, लखनऊ विवि व एनसीटीई को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने याचिका दाखिल करने वाले सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल करने का आदेश भी दे दिया था। याचिका दायर करने वाले परीक्षार्थियों का कहना था कि एनसीटीई के नियम विवि को पहले से मालूम थे फिर भी आवेदन पत्र में इसका जिक्र न कर ब्भ् प्रतिशत अंक किया गया। हालांकि न्यायालय न्यूनतम अर्हता मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद करेगा। उधर, उच्च न्यायालय ने परीक्षा में मंगलवार को कोई राहत नहीं दी थी। अदालत ने याची के वकीलों, सरकारी वकील व राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली को सुनने के बाद सरकार व अन्य विपक्षियों से दो सप्ताह में जवाब मांगा है तथा याचिकाओं पर सुनवाई के लिए ख्म् मई ख्0क्0 तारीख तय की है। अदालत ने कहा कि बीएड प्रवेश परीक्षा ख्0क्0 का परिणाम इन याचिकाओं पर पारित आदेश के अधीन होगा। अदालत का मानना था कि भ्0 प्रतिशत अंक का प्रावधान एनसीटीई एक्ट के विनियम ख्009 द्वारा जोड़ा गया है और इस कारण प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में जारी शासनादेश अवैध नहीं है। दूसरी ओर उच्च शिक्षा सचिव अनिल संत ने कहा कि शासन पहले ही बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा ख्0क्0 के अभ्यर्थियों से अनुरोध कर चुका है कि यदि वे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित शैक्षिक अर्हता पूरी नहीं करते हों तो वे परीक्षा में न बैठें। एनसीटीई के मानक के अनुसार शासन ने भी बीएड में प्रवेश की न्यूनतम शैक्षिक अर्हता में संशोधन करते हुए इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। शैक्षिक अर्हता में हुए इस बदलाव की वजह से अभ्यर्थियों को हुई असुविधा के लिए शासन खेद भी जता चुका है। शासन स्पष्ट कर चुका है कि एनसीटीई के मानक पूरा न करने वाले अभ्यर्थी यदि फिर भी परीक्षा में बैठते हैं तो उनकी उत्तरपुस्तिकाएं नहीं जांची जाएंगी। संत ने कहा कि न्यूनतम अर्हता का मामला अब एनसीटीई और अदालत के बीच है। मंगलवार को पूरे दिन बीएड परीक्षा को लेकर असमंजसता का नाटकीय दौर रहा। बीएड प्रवेश परीक्षा को लेकर रात भर चला भ्रम व उहापोह देर रात परीक्षा स्थगित होने के साथ ही समाप्त हुआ।

विपक्ष के नेताओं का उत्पीड़न कर रही सरकार

May 04, 11:19 pm
लखनऊ। नेता प्रतिपक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के अपराधियों के बजाय विपक्ष के नेताओं के उत्पीड़न और गिरफ्तारी पर उतर आयी हैं। विधूना नगर पालिका के चेयरमैन प्रमोद गुप्ता की गिरफ्तारी को सरकार द्वारा की गयी विद्वेषपूर्ण कार्रवाई करार देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी है कि फर्जी एफआईआर में अज्ञात बताकर निर्दोषों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी रही तो समाजवादी पार्टी फिर एक बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगी।
उधर विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन और सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने मंगलवार को लखनऊ जिला जेल में 27 अप्रैल को हुए पार्टी के आंदोलन में गिरफ्तार किये गये कार्यकर्ताओं से भेंट कर उनका हाल चाल जाना। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि जेल में बंद अजय सिंह फूलों की सजावट का काम करता है जबकि जीतू पाण्डेय मजदूरी करता है और अर्जुन सिंह यादव कक्षा नौ का छात्र है। उसकी उम्र 18 साल से कम है फिर भी हठधर्मिता के कारण बसपा सरकार ने उन्हें 28 अप्रैल से जेल में निरुद्ध रखा है।

बस फूंकने के आरोप मुलायम के रिश्तेदार को जेल

May 05, 02:41 am
बिधूना (औरैया)। सपा समेत 13 दलों के आह्वान पर भारत बंद के दौरान रोडवेज बस को फूंकने के आरोपी बिधूना नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद कुमार गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गुप्ता पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार भी हैं। गिरफ्तारी के बाद किसी भी स्थिति से निपटने के लिए कस्बे में भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। उधर, मंगलवार सुबह नेता प्रतिपक्ष शिवपाल सिंह यादव कलेक्ट्रेट पहुंचे और अफसरों से बात की।
गौरतलब है कि बीती 27 अप्रैल को भारत बंद के दौरान कुछ सपा कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल पंप के खड़ी कानपुर की एक सीएनजी बस को पेट्रोल डाल फूंक दिया था। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 30 अप्रैल को एक अन्य आरोपी सुरेंद्र यादव भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया था। सोमवार रात सीओ एमपी सिंह के नेतृत्व में फोर्स ने कड़ी नाकेबंदी कर नगर पंचायत चेयरमैन प्रमोद कुमार गुप्त के आवास पर छापा मारा लेकिन वे वहां नहीं मिले। देर रात पुलिस ने पसुआ पुल के पास एक वाहन से चेयरमैन को गिरफ्तार कर लिया गया। किसी बवाल से बचने के लिए प्रमोद गुप्ता को औरैया भेज दिया गया। दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की कोशिशें जारी हैं। मंगलवार को बिधूना चेयरमैन को सीजेएम अदालत में पेश किया गया। उनके ऊपर धारा 436, 307, 147, 427, 120 बी, 3/5 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और 7 क्रिमिनल लॉ एक्ट में आरोप निर्धारित किये गये हैं। अदालत ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर जिला जजी में काफी कार्यकर्ता इकट्ठा हो गये। मंगलवार सुबह शिवपाल सिंह यादव औरैया आये और कलेक्ट्रेट में डेरा जमा दिया। चेयरमैन को निर्दोष बताते हुए डीएम-एसपी से कड़ी नाराजगी जताई। मामले का विवेचनाधिकारी बदलने के भरोसे पर तीन घंटे बाद शिवपाल वापस लौटे।


बीएड प्रवेश परीक्षा स्थगित

May 05, 01:40 am
लखनऊ, 4 मई : बीएड प्रवेश परीक्षा को लेकर चल रहा सस्पेंस देर रात खत्म हो गया। अदालती आदेशों के बाद लम्बी चली बैठकों के बाद आखिरकार लखनऊ विश्वविद्यालय ने बीएड प्रवेश परीक्षा स्थगित करने का निर्णय किया। इस निर्णय से प्रवेश परीक्षा को लेकर सभी तरह के कयास खत्म हो गये।
इससे पूर्व शाम को लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक आदेश जारी कर 45 प्रतिशत अंक तक के सभी परीक्षार्थियों को बीएड की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 50 प्रतिशत से कम अंक वाले परीक्षार्थियों की याचिका पर कोई राहत देने से मना कर दिया था जबकि लखनऊ खण्डपीठ ने 50 प्रतिशत से कम वाले केवल याची छात्रों को प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी। लखनऊ विवि कुलसचिव जीपी त्रिपाठी ने कहा कि केवल याचिकाकर्ताओं को राहत मिलने से अन्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सत्र 2010 की बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी लखनऊ विवि को सौंपी गई है। लखनऊ विवि ने बीएड प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए स्नातक या परास्नातक स्तर पर न्यूनतम अर्हता 45 फीसदी रखी थी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का न्यूनतम अर्हता 50 फीसदी का मानक सामने आने के बाद 50 फीसदी से कम अभ्यर्थियों पर परीक्षा के लिए अयोग्य करार कर दिया गया। ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या 1,45,161 है। इस फैसले के विरोध में लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अलग-अलग रिट दायर की गई। दोनों न्यायालय से अलग-अलग निर्णय आने के बाद असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई। लखनऊ विवि के कुलसचिव जीपी त्रिपाठी का कहना है कि विवि ने न्यूनतम अर्हता 45 फीसदी तक के अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल करने की अनुमति दे दी है। परीक्षा प्रदेश के 12 शहरों (13 नोडल केन्द्रों) पर 1274 परीक्षा केन्द्रों पर होगी। वाराणसी में दो नोडल केन्द्र बनाये गए हैं। इसमें 6 लाख 92 हजार अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं।

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