10/07/2010


जाति आधारित जनगणना में देरी पर बिफरे शरद यादव

Source: Bhaskar news   |   Last Updated 02:49(10/07/10)


दैनिक  भाष्कर से साभार- 


नई दिल्ली. जाति आधारित जनगणना पर केंद्र सरकार की कथित हीला-हवाली पर जदयू नेता शरद यादव ने जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर संसद की भावना अनसुनी करने का आरोप चस्पां करते हुए जाति जनगणना में देरी पर अपना गुस्सा उतारा है। 



उन्होंने लिखा कि अमेरिका में गोरों के वर्चस्व वाले व्हाइट हाउस में एक ब्लैक राष्ट्रपति के पद पर बैठ सकता है लेकिन 63 साल की आजादी के बाद भी हमारे देश में पिछड़े, दबे-कुचलों की असली संख्या का आंकड़ा ही उपलब्ध नहीं। 

शरद यादव ने इस बात पर हैरानी जताई कि इस मसले पर संसद के भीतर और बाहर कमोबेश सहमति की स्थिति बन गई थी, लेकिन अब इसे टालने के इरादे से मंत्री-समूह को अनुशंसित कर दिया गया। प्रणब मुखर्जी जाति आधारित जनगणना पर मंत्री-समूह के अध्यक्ष भी हैं। 

इसकी हाल ही संपन्न पहली बैठक के बाद प्रणब दा ने विभिन्न संगठनों से जनगणना पद्धति पर राय मांगी है। शरद यादव ने इसकी पहल करते हुए प्रणब दा को एक पेज का जनगणना-फामरूला भी भेजा है।

पत्रकारों से बातचीत में एनडीए के संयोजक शरद यादव जाति आधारित जनगणना पर हाय-तौबा मचाने वालों पर भी जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि कुछ स्वघोषित बुद्धिजीवी इस बात की मुखालफत कर रहे हैं और सरकार उन्हीं के इशारों पर काम कर रही है। 

शरद यादव ने कहा कि जाति आधारित जनगणना का विरोध करने वाले वही लोग हैं जो कल तक आरक्षण की बात आने पर जातिवार आंकड़े मांगते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जबतक समाज के दबे-कुचले, पिछड़ों का सही आंकड़ा सरकार के पास नहीं होगा, विकास के साथ उनको लेकर चलना मुश्किल होगा। 

इस काम में देरी से विभिन्न वर्गो के बीच खाई और गहरी होगी जिसे बाद में पाटना और मुश्किल होगा। प्रणब मुखर्जी से अपील करते हुए शरद यादव ने कहा कि पहले चरण की जनगणना का काम पूरा होने को है, कम से कम दूसरे चरण की जनगणना से ही जाति की गिनती शुरू कर देनी चाहिए।



गणना के सुझाव



अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ वर्ग के तीन कॉलम बनाने की बजाय जाति का केवल एक कॉलम ही जनगणना फॉर्म में रखें। उसी खंड में केवल जाति का नाम अंकित किया जाए। अगर कोई जाति नहीं बताना चाहता तो यही लिख दिया जाए। जनगणना आयुक्त अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग में अलग करने का काम न कर केवल जाति जनगणना के आंकड़े जुटाएं।

लिखी गई जाति के आधार पर अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग में विभिन्न जातियाें को बांटने की जिम्मेदारी सामाजिक न्याय मंत्रालय को सौंप दी जाए। मंत्रालय में पूरा आंकड़ा मौजूद है कि कौन-सी जाति किस कोटे में आती है। 

अन्य पिछड़े वर्ग की राज्य में दो लिस्ट हैं। पहली केंद्रीय और दूसरी राजकीय। कुछ राज्यों में एक से ज्यादा फेहरिस्त भी हैं। ऐसे में राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग, मंत्रालय की मदद करेगा। 

सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय सभी जातियों को सूचीबद्ध कर जनगणना आयुक्त को नई जनगणक छापने को भेज देगा।

1 टिप्पणी:

Jandunia ने कहा…

शानदार पोस्ट

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