06/09/2011

आखिर 'बिग बी' ने अमर को याद  ही कर लिया  , किसी न किसी दिन मुलायम भी जायेंगे ही 'अमर' को देखने -

(भाष्कर से साभार)

जया प्रदा के तानों के बाद अमर सिंह से मिलने एम्स पहुंचे 'बड़े भैय्या' अमिताभ

Source: Dainikbhaskar.com   |   Last Updated 10:09 PM (18/09/2011)



 कैश फॉर वोट मामले में दोषी बनाए गए समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह से मिलने के लिए 12 बजे के लगभग बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन नई दिल्ली स्थित एम्स पहुंचे। उनके साथ उनकी बेटी श्वेता नंदा भी थीं। अमिताभ नई दिल्ली में आयोजित ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह में हिस्सा लेने के लिए आए हैं। अमिताभ के इस तरह से एम्स पहुंचने पर पिछले दिनों दोनों के रिश्तों में आई खटास के दूर होने की संभावना भी जताई जा रही है।


 गौरतलब है कि कैश फॉर वोट मामले में तिहाड़ गए अमर सिंह १९ सितंबर तक जमानत पर बाहर है। अमर सिंह इस समय एम्स में इलाज करा रहे हैं।


इससे पहले अमर सिंह की करीबी जयाप्रदा ने आरोप लगाया था कि अमर सिंह के बेहद करीब रहने वाले लोग अब मुसीबत के वक्त में उनसे दूर हो गए हैं। जयाप्रदा ने यह भी कहा था कि अमर सिंह ने जिन लोगों पर अहसान किए वो भी अब उनसे दूरी बनाए हुए हैं। जयाप्रदा का इशारा अमिताभ बच्चन की ओर ही था।






अमर सिंह से मिलने अस्पताल पहुंचे बिग बी ने डॉक्टरों से उनकी सेहत के बारे में बात की। अमिताभ बच्चन 12 बजे के करीब एम्स पहुंचे थे और दो घंटे की मुलाकात के बाद वापस चले गए। अमिताभ ने अस्पताल से निकलते वक्त मीडिया से भी बात नहीं की। 

अमर सिंह को कहीं फसाया तो नहीं जा रहा है, 
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कांग्रेसियों के लिए जो काम अमर सिंह ने किया उसके असली दोषी तो मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी हैं अमर सिंह को तो नाहक फसाया जा रहा है.
जयाप्रदा ने मुहँ खोला -

अमर ने मुंह खोला तो मुश्किल में पड़ेंगे कई

Sep 09, 09:56 pm
नई दिल्ली। अभिनेत्री से सांसद बनीं जयाप्रदा ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर अमर सिंह ने मुंह खोला तो कई लोग मुश्किल में पड़ जाएंगे। पूर्व सपा नेता अमर नोट के बदले वोट कांड में तिहाड़ जेल में बंद हैं। अमर के साथ ही सपा से निष्कासित की गईं जयाप्रदा ने कहा कि मुसीबत के वक्त अमर सिंह से मदद लेने वाले लोग आज उन्हें पीठ दिखा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद जयाप्रदा ने कहा, 'अमर जेल में खाना नहीं खा रहे। उन्हें उल्टियां हो रही हैं। जेल के टॉयलेट में साफ-सफाई न होने से उन्हें परेशानी हो रही है। किडनी की बीमारी से जूझ रहे अमर को जेल में संक्रमण का खतरा है। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें जेल में रखना ठीक नहीं है।' जयाप्रदा ने गुरुवार को तिहाड़ जेल में अमर से मुलाकात की थी।
जयाप्रदा ने कहा, 'सरकार बचाने के लिए अमर द्वारा किए गए प्रयास से कई लोगों को फायदा पहुंचा। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। लेकिन, आम आदमी यह सवाल कर रहा है कि वह जेल में क्यों है? सरकार के विश्वास मत जीतने से उन्हें तो कोई फायदा नहीं हुआ, फायदा उठाने वाले तो और ही हैं।' जयाप्रदा ने कहा, 'सरकार और विपक्ष द्वारा बार-बार निशाना बनाए जाने के बावजूद अमर ने चुप्पी साध रही है। यदि उन्होंने मुंह खोला तो कई लोग मुश्किल में पड़ जाएंगे। लेकिन, वे ऐसे नहीं हैं..वे अपनी बात पर कायम रहते हैं, यही उनका स्वभाव है।'
(यदि अमर सिंह का मुहँ खुला तो मुलायम सिंह यादव का क्या होगा यह आशंका तो तभी हो गयी थी जब अमर सिंह को जेल भेजा गया था, की कांग्रेस कोई बड़ी डील कर रही हो.)
नाहक-
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2009/07/090701_radio_prog_ak1_tc2.shtml?bw=bb&mp=wm&bbcws=1&news=1
कहीं यह 'नाहक' माननीय मुलायम सिंह जी को घेरने की कोशिश तो नहीं है, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की दाल नहीं गल रही है, कांग्रेस के राजकुमार की सारी उर्जा कांग्रेस को बचाने में लगनी पड़ेगी फिर भी कांग्रेसियों का अत्याचार आम आदमी को बेहाल करके रख दिया है जबकि  अमर सिंह कहीं से भी ईमानदार नहीं हैं बहन मायावती से उनका स्नेह है या पूर्वजन्म का कोई ताल्लुक क्योंकि जैसे ही भाई शिवपाल मुहं खोलते हैं वैसे ही यह मान लिया जाता है की यह जरूर ईर्ष्यावश कह रहे हैं या कह रहे होंगें. यदि यही बात कोई अन्य व्यक्ति कहता जो भाई शिवपाल ज़ी की छवि से मेल नहीं खाता तो एक बड़ी खबर होती. पर अमर सिंह के उत्तर प्रदेश के अत्याचार पर बहन ज़ी का मुहं बंद था.

बहन मायावती ज़ी उत्तर प्रदेश की शासिका हैं उनके आवास पर क्या खर्च हो रहा है यह खबर तो होनी ही नहीं चाहिए, सोनिया के इलाज पर कितना खर्च हो रहा है इसपर रामदत्त ज़ी को याद नहीं आता है. लेकिन उन्हें बहन ज़ी का दो चार हज़ार करोड़ क्या होता है पर नज़र नहीं डालनी चाहिए, करोड़ों अरबों की संपत्ति से जब सवर्ण अपने महल बना रहा था या होता है तो किसी का ध्यान नहीं जाता है. लोक - तंत्र में पिछड़े दलितों की ही संपत्ति दिखाई देती है.
अमर सिंह को फसाया जाना नेता ज़ी की तरफ इन कांग्रेसियों की दूर दृष्टि का कोई न कोई सूत्र जरूर देता नज़र आता है, अमर सिंह साथ रह के भी साजिश कर रहे थे और अलग होकर कोई साजिश नहीं करेंगे यह आश्वासन मुलायम सिंह ज़ी को कौन दे सकता है यह तो वही जानें पर उन्हें उत्तर प्रदेश में मुलायम को घेरने में 'अमर सिंह' का इस्तेमाल किया जा सकता है अबकी के 'महाभारत' का अभिमन्यु कैसे बचेगा यह कौरवों के कर्तव्यों के गर्भ में अन्तर्निहित है.
(बी बी सी से साभार- )

अमर सिंह गिरफ्तार,न्यायिक,हिरासत में 



अमर सिंह
अमर सिंह कहते रहे हैं कि वे निर्दोष हैं
'नोट के बदले वोट' मामले में नाटकीय घटनाक्रम में समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव और राज्यसभा के सांसद अमर सिंह को गिरफ़्तार करके 19 सितंबर तक की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.
उनके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के दो पूर्व सांसदों, फ़ग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोरा को भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
इस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सलाहकार सुधीन्द्र कुलकर्णी के ख़िलाफ़ भी सम्मन जारी किया गया था लेकिन वे अदालत में नहीं पहुँचे क्योंकि वे देश से बाहर हैं.
इन चारों के ही ख़िलाफ़ 'नोट के बदले वोट' मामले में दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था.
इस मामले में दिल्ली पुलिस शामिल भाजपा के मौजूदा सांसद अशोक अर्गल के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज करना चाहती है और इसके लिए लोकसभा के अध्यक्ष से अनुमति मांगी गई है.
भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने इन गिरफ़्तारियों के बाद कहा है कि जाँच इस बात की भी होनी चाहिए कि वोट ख़रीदे जाने से किसे लाभ पहुँचा.
जबकि कांग्रेस ने कहा है कि उन्हें सरकार बचाने के लिए वोटों की ज़रुरत ही नहीं थी.

ज़मानत याचिका ख़ारिज

नोट लहराते सांसद
भाजपा ने अपने सांसदों को नोट के साथ संसद में भेजने का फ़ैसला किया था
पहले कहा जा रहा था कि अमर सिंह अदालत में नहीं आ रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपनी बीमारी की वजह से अदालत में पेश होने से छूट का आवेदन किया था.
लेकिन वे अचानक तीस हज़ारी कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने अपने गुर्दे की बीमारी का हवाला देते हुए ज़मानत देने की अपील की. अदालत ने उनसे बीमारी से संबंधिक ताज़ा कागज़ात मांगे तो उन्होंने कहा कि ये कागज़ात लाने के लिए समय चाहिए होगा.
इस पर तीस हज़ारी कोर्ट की विशेष जज संगीता धींगरा ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
अदालत के इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमर सिंह के वकील ने कहा कि अमर सिंह के ख़िलाफ़ अभियोजन पक्ष के पास को ठोस सबूत नहीं है.
उनका कहना था, "चार्ज शीट में हमारे ख़िलाफ़ कुछ है ही नहीं तो हम क्या कहें, हमारे ख़िलाफ़ सिर्फ़ सह-अभियुक्त का बयान भर है जिसकी क़ानून की नज़र में कोई अहमियत नहीं है. क़ानून ये कहता है कि इस बयान पर सबूत जुटाया जाना चाहिए वरना इसकी कोई अहमियत नहीं है."
उनका कहना है कि वे जल्दी ही बीमारी के आधार पर अंतरिम ज़मानत की याचिका लगाएँगे और 19 सितंबर को नियमित ज़मानत का आवेदन करेंगे.

भाजपा भी नाराज़

हम अगर भ्रष्टाचार करते तो हम क्या टीवी कैमरा लगवाते या पार्लियामेंट के भीतर आते ये बताने के लिए कि कांग्रेस की सरकार किस तरह से बच रही है. पूरे देश को मालूम है कि जब मनमोहन सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई थी तो उसके क्या-क्या हथकंडे अपनाए, उसी के कारण ये सब हो रहा है
अशोक अर्गल, भाजपा सांसद
इस गिरफ़्तारी से भाजपा के दो पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोरा के वकील संजीव सोनी भी नाख़ुश दिखे.
उनका कहना है कि जिन लोगों ने भ्रष्टाचार को उजागर करना चाहा उन्हें ही मुल्ज़िम बना दिया गया है, "आजकल ये चल रहा है कि जो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है वही कहीं न कहीं भ्रष्टाचार के मामले में फँसा दिया जाता है, तो यही हुआ है. जो लोग विसिल ब्लोवर थे, जो ये पैसा नहीं रखना चाहते थे उन्हें ही मुल्ज़िम बना दिया गया है."
भाजपा के नेताओं ने भी सवाल उठाया है कि जिन्होंने मामले को उजागर किया उन्हें पकड़ लिया गया और जिसने घूस दी उन्हें भी पकड़ लिया गया लेकिन जिसकी सरकार बची और जिसे फ़ायदा हुआ उसकी जाँच नहीं की जा रही है.
संसद में नोट लहराने वाले सांसदों में से एक अशोक अर्गल ने कहा, "हम अगर भ्रष्टाचार करते तो हम क्या टीवी कैमरा लगवाते या पार्लियामेंट के भीतर आते ये बताने के लिए कि कांग्रेस की सरकार किस तरह से बच रही है. पूरे देश को मालूम है कि जब मनमोहन सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई थी तो उसके क्या-क्या हथकंडे अपनाए, उसी के कारण ये सब हो रहा है."
यही सवाल सीपीएम और सीपीआई ने भी उठाए हैं.
ये मामला वर्ष वर्ष 2008 का है जब वाम दलों के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना था.
ये अटकलें लगाई जा रही थीं कि यूपीए की सरकार बचेगी या नहीं और बहुमत किस तरह से जुटेगा.
कांग्रेस को वोट की ज़रुरत नहीं थी, आप रिकॉर्ड निकाल कर देखिए कि कितने वोटों से कांग्रेस जीती थी. इनके एक-दो वोटों की हमें क्या ज़रुरत थी. कचहरी में मसला है, साबित हो जाएगा सब कुछ
पवन बंसल, संसदीय कार्यमंत्री
22 जुलाई को मतदान से कुछ घंटे पहले ही भाजपा के तीन सांसदों ने लोक सभा में नोटों की गड्डियां पेश की. इन तीन सांसदों अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा का आरोप था कि अमर सिंह के सहयोगियों ने विश्वास मत में हिस्सा न लेने के लिए उन्हें एक करोड़ रूपए रिश्वत में दिए गए.
तहक़ीकात के बाद दिल्ली पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि अमर सिंह ने सांसदों का समर्थन ख़रीदने की योजना ज़रूर बनाई थी लेकिन पुलिस ये नहीं बता पाई है कि आख़िर वे सरकार को मदद करने के लिए ऐसी योजना क्यों बनाऐंगे जिस सरकार को उनकी पार्टी ने केवल बाहर से समर्थन दिया था.
आरोप है कि इन तीन सांसदों को तीन-तीन करोड़ रूपए देने की पेशकश गई थी. एडवांस के तौर पर मतदान से पहले उन्हें एक करोड़ रूपए दिए गए थे.
सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में पुलिस की तहक़ीकात चल रही है. अदालत का कहना है कि अब पुलिस के लिए ये ज़रूरी है कि वो इन पैसों के स्रोत का पता करे.
लेकिन कांग्रेस ने आज इस आरोप को सिरे से ख़ारिज कर दिया कि इस मामले से उसका कोई लेना देना है.
कांग्रेस नेता और संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल, "कांग्रेस को वोट की ज़रुरत नहीं थी, आप रिकॉर्ड निकाल कर देखिए कि कितने वोटों से कांग्रेस जीती थी. इनके एक-दो वोटों की हमें क्या ज़रुरत थी. कचहरी में मसला है, साबित हो जाएगा सब कुछ."
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा दिया है कि वह अब इस मामले की निगरानी नहीं करेगी लेकिन दिल्ली पुलिस को सख़्त हिदायत दी है कि वह उस पैसे के स्रोत का पता लगाए जो उस दिन संसद में लहराए गए थे.
आज की राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से तो लगता है कि अब ये मामला अदालतों के बाहर भी बराबर लड़ा जाएगा.
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अमर सिंह जी सभी के काम आते हैं अब देखना है की उनको कौन काम आता है
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(अमर उजाला से उधृत-)

कैश फॉर वोट में अमर सिंह भी पहुंचे तिहाड़ जेल

नई दिल्ली।
Story Update : Wednesday, September 07, 2011    12:21 AM
भारतीय संसद पर कलंक लगाने वाले कैश फॉर वोट मामले में आखिरकार सपा के पूर्व महासचिव और राज्यसभा सांसद अमर सिंह को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। मंगलवार को दिनभर तीस हजारी कोर्ट में अमर सिंह की पेशी पर नाटकीय घटनाक्रम चलता रहा। पहले तो उन्होंने बीमार होने का दावा किया लेकिन अदालत के सख्त तेवर के बाद अमर सिंह साढ़े बारह बजे नाटकीय ढंग से कोर्ट पहुंच गए।

दोबारा सुनवाई होने पर कोर्ट में पहुंचे अमर
अदालत ने अमर सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है। साथ ही कोर्ट ने भाजपा के दो पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगोरा को भी 19 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सांसद अशोक अर्गल के मामले में कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर से अनुमति मांगी है जबकि लालकृष्ण आडवाणी के सहायक रहे सुधींद्र कुलकर्णी देश से बाहर होने के कारण कोर्ट में पेश नहीं हुए। स्पेशल जज संगीता ढींगरा सहगल की कोर्ट में जब सुनवाई शुरू हुई तो अमर सिंह पेश नहीं हुए। उनके वकील ने बीमारी का हवाला देकर गैरहाजिर रहने की अर्जी दी तो कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट मांगी और मामले को दोपहर साढ़े बारह बजे तक टाल दिया। दोबारा सुनवाई शुरू होते ही अमर सिंह खुद कोर्ट पहुंच गए।

फैसले से स्तब्ध रह गए अमर सिंह
सुनवाई के बाद कोर्ट ने अमर सिंह व दो पूर्व सांसदों को न्यायिक हिरासत में लेने का आदेश सुना दिया। क्रीम कलर का कुर्ता और पायजामा पहने अमर सिंह फैसले से स्तब्ध रह गए। अमर सिंह ने दलील दी कि उनकी किडनी ट्रांसप्लांट की गई है और वह कई गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित हैं। लिहाजा, जमानत दी जाए। लेकिन कोर्ट ने पेश की गई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने अंतरिम जमानत की अर्जी पर 8 सितंबर को सुनवाई मुकर्रर कर दी। अदालती कार्यवाही के बाद अमर सिंह को तीस हजारी के लॉकअप में बंद कर दिया गया और बाद में उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया। उन्हें जेल नंबर तीन में रखा गया है।

कांग्रेस सरकार को किसी के वोट की जरूरत नहीं थी। आप रिकॉर्ड देख सकते हैं कि हमें कितने वोट मिले। इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोई बयान देने की जरूरत नहीं है।
-पवन कुमार बंसल, संसदीय कार्यमंत्री
(अमर उजाला से साभार)
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दैनिक जागरण से उद्धृत-


तिहाड़ में अमर सिंह का पड़ोसी अफजल गुरु


Sep 07, 01:03 am


नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। तिहाड़ जेल में राज्यसभा सदस्य अमर सिंह के पड़ोसी हाई रिस्क सेल में बंद आतंकवादी अफजल गुरु और 2 जी स्पेक्ट्रम मामले से जुड़े कुछ वीआइपी आरोपी हैं। अमर सिंह को वार्ड संख्या-4 के 10 गुणा 15 आकार वाले स्पेशल सेल में रखा गया है। नोट के बदले वोट मामले में अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद अमर सिंह तथा दो पूर्व सांसद महावीर भगोरा और फग्गन सिंह कुलस्ते को दिल्ली पुलिस की थर्ड बटालियन की गाड़ी से मंगलवार शाम करीब छह बजे तिहाड़ लाया गया। मीडिया के जमावड़े के कारण अमर सिंह को निर्मल छाया के रास्ते चुपके से जेल के अंदर दाखिल करा दिया गया। वैसे उन्हें उस हर प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिससे जेल आने पर एक कैदी को गुजरना पड़ता है। उनसे पहचान चिन्ह, नाम, पता लिया गया। फिर रेजिडेंट डॉक्टर एमके गिरधर ने स्वास्थ्य जांच की। जिसमें सब कुछ सामान्य पाया गया। मंगलवार की रात अमर सिंह को वार्ड में अकेले गुजारनी पड़ी। जेल सूत्रों के मुताबिक उनके [अमर सिंह के] स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही उन्हें वार्ड संख्या-4 में रखा गया है। क्योंकि इसी वार्ड से सटा 150 बिस्तरों वाला जेल का अस्पताल है। फग्गन सिंह कुलस्ते व महावीर सिंह भगोरा वार्ड-4 के अन्य सेल में हैं। अमर सिंह ने टीवी के लिए आवेदन नहीं किया है, इसलिए उन्हें यह सुविधा नहीं मिलेगी। उन्हें सामान्य कैदी की तरह ही रखा जाएगा। जेल के बाहर 24 घंटे एक एंबुलेंस की व्यवस्था रखी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। अमर सिंह की तबीयत खराब होने की हालत में दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया जाएगा। गौरतलब है कि अमर सिंह ने कई बीमारियां होने की शिकायत की है। जिनमें हार्ट, बीपी, शुगर का जिक्र है। उनकी दोनों किडनी खराब हो गई थीं। कुछ समय पहले सिंगापुर में उन्होंने किडनी प्रत्यारोपण कराया था। सूत्रों की मानें तो वह एक समय में करीब 25 दवाइयों की खुराक लेते हैं। इसलिए जेल प्रशासन अमर सिंह के स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सचेत है। तिहाड़ जेल डीआइजी आरएन शर्मा ने बताया कि अमर सिंह ने कोई मांग नहीं की है। उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है। उन्हें सभी दवाइयां उपलब्ध करा दी गई हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि अमर सिंह ने बड़े अनमने ढंग से जेल का खाना खाया। पानी भी खरीद कर ही पिया। जिस सेल में अमर सिंह को रखा गया है उसमें बिहार के पूर्व सांसद पप्पू यादव रह चुके हैं। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, संसद पर हमले मामले में फांसी की सजा पाया अफजल गुरु, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का आरोपी शाहिद बलवा व रिलांयस गु्रप के उच्च अधिकारी गौतम दोषी और हरि नायर पहले से ही इस जेल में हैं।.
 (दैनिक जागरण से साभार)

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