28/09/2011

एक राय मुफ्त में दे रहा हूँ सपा के सिपाहियों और नेताओं को कि "यह कहना बंद करें की"

सपा सरकार बनी तो फिर नम्बर एक होगा गुन्नौर: धर्मेन्द्र

Sep 28, 09:58 pm
बबराला : यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो गुन्नौर तहसील फिर प्रदेश में नंबर एक हो जाएगी। गुन्नौर वह स्थान है जिसने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह का नाम गिनीज बुक में दर्ज कराया लेकिन मौजूदा सरकार ने वर्तमान समय में इसे उपेक्षित कर रखा है। नौजवानों को रोजगार नहीं, किसानों को खाद-बीज नहीं लेकिन अरबों रुपया पत्थरों और बुतों पर बहाये जा रहे हैं। यह बात बुधवार को रजपुरा बाजार में आयोजित समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में सांसद धर्मेन्द्र यादव ने कही।
उन्होंने सरकारी और गैर सरकारी योजनाओं के ठेके चहेतों को देकर मुख्यमंत्री भी कमाई कर रही हैं जो मुख्यमंत्री मायावती के करीबी हैं। श्री यादव ने कहा कि औने-पौने दामों में बेच दी गयीं।
सांसद ने कहा कि केन्द्र के पास बेरोजगारों के लिए पैसा नहीं है, किसानों को डीजल, खाद पर मिलने वाली छूट बंद कर दी गयी लेकिन नेताओं के पास अरबों का काला धन है। विदेशी बैंकों में जमा पैसे की पुष्टि हो जाने के बाद भी प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह खामोश बैठे हैं। साल भर में 15 बार प्रेट्रोल के दाम बढ़ाये गये।
सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव ने कहा कि साढ़े चार महीने इंतजार करो गुन्नौर तहसील बदायूं जिले का हिस्सा है इसे बदायूं में ही शामिल कराया जाएगा।
विधायक प्रदीप यादव उर्फ गुड्डू भैया ने कहा कि भ्रांति फैलाने वालों से बचकर रहना है। रामखिलाड़ी सिंह बड़े भाई है वह और मैं कभी अलग नहीं हो सकते।
पूर्व विधायक रामखिलाड़ी सिंह यादव ने कहा के 20 वर्ष के राजनैतिक कार्यकाल में कोई गलती हुई हो क्षमा करें। जनता मेरी आवाज है मैं उसकी सेवा करता रहूंगा।
इससे पूर्व सांसद धर्मेन्द्र यादव का कादराबाद से रजपुरा तक पांच दर्जन स्थानों पर भव्य स्वागत हुआ और सपाईयों ने मोटरसाइकिल रैली निकाली। कार्यकर्ताओं ने 21-21 किलो ग्राम की मालायें पहनाई।
इस दौरान सम्भल विधायक इकबाल महमूद, पूर्व विधायक वीरेश यादव, पूर्व विधायक ओमकार सिंह यादव, कमाल अख्तर, मुजफ्फर अली आदि ने विचार व्यक्त किये।
सम्मेलन में अखिलेश यादव, चरन सिंह, अब्दुल हमीद, अब्दुल लईक, पप्पू यादव, नाजिम अली, अलमास मियां, पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह, रोहन लाल, जाहिद अली, ब्रजेश यादव, ग्रीश, राहुल, रोहित, गौरव गुप्ता। संचालन राकेश गोयल अध्यक्षता ऋषिपाल सिंह यादव ने की।
(जब सरकार बन जाये तो क्या करेंगे ये इनको तब याद नहीं रहेगा लेकिन अभी से एसा करना उनके लिए नुकसानदेह ही है.इन्हें इस बड़बोलेपन से बचना चाहिए करेंगे तो इनके सारे नकारे अधिकारी और दलाल पर अभी यह नहीं कहना चाहिए.)

वैसे तो बी बी सी वाले जानते होंगे आगे क्या होने वाला है पर लगता है सपा के साथ कुछ गड़बड़ होने वाला है-
(बी बी सी से साभार खबरें देखें और समझाने की कोशिश करें)

नोट के बदले वोट: कुलकर्णी भी जेल गए

 मंगलवार, 27 सितंबर, 2011 को 18:53 IST तक के समाचार
सुधीन्द्र कुलकर्णी
सुधीन्द्र कुलकर्णी पहली बार अदालत के सामने पेश हुए
दिल्ली की एक अदालत ने 'नोट के बदले वोट' के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी की अंतरिम ज़मानत की याचिका ख़ारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
सुधीन्द्र कुलकर्णी को गिरफ़्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.
नियमित ज़मानत उनकी याचिका पर सुनवाई पहली अक्तूबर को होगी, ज़ाहिर है तब तक वे इस मामले के अन्य अभियुक्तों के साथ तिहाड़ जेल में रहेंगे.
इस मामले में समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह और भाजपा के दो पूर्व सांसदों, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगौरा को अदालत गत छह सितंबर को न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है.
बाद में स्वास्थ्य के आधार पर अमर सिंह को ज़मानत दी गई है.
वैसे 'नोट के बदले वोट' के मामले में गिरफ़्तार किए जाने वाले वे छठवें व्यक्ति हैं.
दिल्ली पुलिस ने उन्हें इस मामले का मुख्य षडयंत्रकारी बताया है.

'भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए'

इससे पहले अदालत ने सुधीन्द्र कुलकर्णी को दो बार अदालत में पेश होने के लिए सम्मन भेजा था कि लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए थे.
अदालत ने चेतावनी दी थी कि मंगलवार को वे अदालत में पेश नहीं हुए तो उनकी गिरफ़्तारी का वारंट जारी हो सकता है.
वे तीस हज़ारी कोर्ट में पेश हुए और बताया कि वे अपनी बेटी के दाख़िले के संबंध में विदेश में थे इसलिए इससे पहले वे अदालत में पेश नहीं हो सके.
उनका कहना था कि जब दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र दाख़िल किया, उससे पहले ही वे विदेश जा चुके थे.
"एक ऐसे व्यक्ति को अंतरिम ज़मानत न देने की कोई वजह ही नहीं है जिसकी नियमित ज़मानत की याचिका अदालत में लंबित है और फिर उन्हें जाँच के दौरान गिरफ़्तार भी नहीं किया गया था"
सुधीन्द्र कुलकर्णी के वकील का तर्क
उनकी अंतरिम ज़मानत की याचिका पर बहस करते हुए सुधीन्द्र कुलकर्णी के वकील ने कहा कि वे सिर्फ़ व्हिसिल ब्लोवर थे और उनका उद्देश्य भ्रष्टाचार को उजागर करना था.
उनके वकील का कहना था, "एक ऐसे व्यक्ति को अंतरिम ज़मानत न देने की कोई वजह ही नहीं है जिसकी नियमित ज़मानत की याचिका अदालत में लंबित है और फिर उन्हें जाँच के दौरान गिरफ़्तार भी नहीं किया गया था."
इस पर न्यायाधीश संगीता धींगरा ने उनसे पूछा कि अगर उनका उद्देश्य सिर्फ़ भ्रष्टाचार को उजागर करना था तो वे इसकी शिकायत लेकर सक्षम अधिकारी के पास क्यों नहीं गए, इस पर उनके वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले को सीधे लोकसभा ले जाना उचित लगा.
अदालत ने दिल्ली पुलिस की इस बात को लेकर भी खिंचाई की कि जाँच के दौरान उसने दो-तीन अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया और बाक़ी लोगों को छोड़ दिया.
दिल्ली पुलिस ने अपने आरोप पत्र में कहा है कि वर्ष 2008 में यूपीए सरकार के विश्वासमत को
प्रभावित करने के लिए कांग्रेस से संपर्क न हो पाने के बाद समाजवादी पार्टी का रुख़ किया.

पुलिस का आरोप

पुलिस का आरोप है कि सांसदों को 'नोट के बदले वोट' देने का षडयंत्र सुधीन्द्र कुलकर्णी ने ही रचा था और सहअभियुक्त सुहैल हिंदुस्तानी को निर्देश दिए थे कि वह समाजवादी पार्टी के नेताओं से मिले.
समाजवादी पार्टी के नेता कथित तौर पर लोकसभा में वोट से पहले कथित तौर पर भाजपा के सांसदों से मिले थे.
यह मामला वर्ष 2008 का है जब भाजपा के तीन सांसदों अशोक अर्गल, महावीर भगौरा और फग्गन सिंह कुलस्ते ने मनमोहन सिंह सरकार के विश्वास मत हासिल किए जाने के दौरान लोकसभा में नोटों की गड्डियां लहरा कर सनसनी फैला दी थी.
तीनों सांसदों ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने विश्वास मत में हिस्सा नहीं लेने के बदले रुपए देने की पेशकश की थी. जबकि इन दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया था.
इसके बाद तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज किया था.
भाजपा ने पहले की ही तरह मंगलवार को फिर दोहराया है कि जिन लोगों ने भ्रष्टाचार को उजागर करना चाहा वे तो जेल भेज दिए गए लेकिन जिन्हें इससे फ़ायदा हुआ उनके ख़िलाफ़ जाँच भी नहीं हो रही है.
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कैश फ़ॉर वोट (फ़ाईल फ़ोटो)
भाजपा सांसदों ने नोटों की गड्डियों को लोकसभा में लहराकर आरोप लगाया था कि सरकार ने उन्हें ये रूपए सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कैश फ़ॉर वोट मामले में दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई है. अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वो तीन हफ़्तों के अंदर जांच पूरी करे.
इससे पहले गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल की थी.
दिल्ली पुलिस के ज़रिए जमा किए गए रिपोर्ट पर टिप्पणि करते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस ने आधे मन से जांच की है.
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वो इस मामले को तार्किक अंत तक ले जाए और तीन हफ़्तों के अंदर अंतिम रिपोर्ट अदालत के सामने दाख़िल करे.
अदालत ने पुलिस को ये भी निर्देश दिया कि वो इस बात का पता लगाए कि आख़िर वो पैसे कहां से आए थे जिसे भाजपा सांसदों ने संसद में दिखाए थे.
दिल्ली पुलिस इस केस में अभी तक दो लोगों सुहैल हिन्दुस्तानी और संजीव सक्सेना को गिरफ़्तार कर चुकी है जबकि समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह, समाजवादी पार्टी के मौजूदा सांसद रेवती रमण सिंह और भारतीय जनता पार्टी के सांसद अशोक अर्गल से पूछताछ किया है.
भाजपा के तीन सांसदों अशोक अर्गल, महावीर भागौरा और फग्गन सिंह कुलस्ते ने 22 जुलाई, 2008 को मनमोहन सरकार के विश्वासमत हासिल किए जाने के दौरान लोकसभा में एक करोड़ रुपए के नोटों की गड्डियां लहरा कर सनसनी फैला दी थी.
तीनों सांसदों ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने विश्वास मत में हिस्सा नहीं लेने के बदले रुपए देने की पेशकश की थी. जबकि इन दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया था.
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज किया था.

'कहां से आए संसद में लहराए गए नोट'

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