20/07/2012

अंतर्मन की आवाज़ 'नेता जी ने जो भी किया जायज है'

(डॉ.लाल रत्नाकर)Jul 20, 01:31 am (अखबारी प्रतिक्रिया स्वरुप)
नेता जी ने जो भी किया जायज है, संगमा भाजप समर्थित उम्मीदवार हैं यही उनकी गलती हो सकती है पर वो 'मुखर्जी' से देश के लिए ज्यादा वफादार हैं और जो देश के लिए वफादार है नेता जी की पहली पसंद है, अब रही मतपत्र फाड़ने की और उसे सुरक्षित किये जाने की तो वह तो वैधानिक प्रक्रिया है.चूँकि नेता जी का अंतर्मन राष्ट्रवादी है सो उन्होंने अच्छे व्यक्ति के पक्ष में मतदान किया.
मतपत्र फाड़ना ;
यह भी एक मजबूरी थी क्योंकि नेता जी ने कांग्रेस के चक्कर में मान लिया रहा होगा कि की ठीक है प्रणव को ही वोट दे देंगे. पर भाइयों आप बार बार चिल्लाते हो वोट हमेशा अंतर्मन से करना है. और तो और 'वोट' तो वोट है उसे किसने देखा और क्यों देखा ये क्या चुनाव है या गुंडागर्दी. आपने देखने की कोशिस की और  देख लिया उन्होंने मतपत्र ही फाड़ दिए 'यह नेता जी के स्वभाव के लिए सही है' संघर्ष करके यहाँ तक आये हैं कोई निरीह नेता तो हैं नहीं. की खानदानी कुर्सी थी मिल गयी।
अब रही बात कायदे कानून की तो इस पर विचार कीजिये परधानी के चुनाव तक में चुनाव आयोग तलवार लेकर खड़ा रहता है कि ये मत करो वो मत करो, एक ठो अंगौछा देने पर तो विचारा चुनाव लड़ने वाला गिरफ्तार हो जाता है और ये तो राष्ट्रपति का चुनाव है. मालकिन भोजभात देती हैं सबको पता नहीं है की क्या ? भोज भात के बाद हिन्दुस्तान में दक्षिणा का भी चलन है. क्या यहाँ पर कौनो सरकारी कर्मचारी पहरा दे रहा था की क्या हो रहा है चुनाव आयोग काहें आँख मूंदे है, वोट हो जाता तो खिलाती पिलाती रहती कौन मना  किया था.
नेता जी सब समझते हैं पहले तो मालकिन ने इन्हें राष्ट्रपति बनाने का लोभ दिया फिर अपने चेले को चढ़ा दिया, क्या क्या हुआ इस बीच सबै जानते हैं. कहा गयी महगाई जो लोग लोक सभा में पानी पी पी  के कोष रहे थे इसी प्रणव को सो उन्हें वोट का ऐसे ही दे रहे हैं, कौन नहीं जानता . छोटका चुनौवा में पैसा बाट बाट कर आजकल गुंडवे चुनाव जीत ले रहे हैं, नेता जी जानते हैं ये उत्तर प्रदेश के लिए सीधे पैसा तो देंगे नहीं पकड़ो इन्हें और वसूलो भरपूर ये बाद में हाथ नहीं आवेंगे .
सो भैया अब जो हुआ सो हुआ 'प्रणव' जी तो हो सकता है जीत ही जायेंगे पर अपने नेता जी ने ठीक ही किया की पहला वोट संगमा को ही दिया आखिर ममता के साथ ये थे तो कांग्रेस के विरोध में ही. नेता जी जब जब नया करते हैं तो उसको प्रशंसा के बजाय निंदा ही होती है 'मुझे लगता है यदि वो भी किसी द्विज के यहाँ जन्मते तो महापंडित ही गिने जाते' इतना बुद्धिमान  आदमी कैसे यादव कुल में जन्म ले लिया. 
नेताजी जब मायावती के साथ लिए तब भी कुछ मुरखवे चिंतित थे की अब क्या होगा और लडाभिडा के बाँट डाले, अब उन्होंने एक आदिवासी  को समर्थन यानी 'वोट' कर दिया तो हो हल्ला मचा रहे हैं. पर नेताजी इससे निश्चिन्त होंगे और प्रसन्न भी की उन्होंने वही किया जो उनके अंतर्मन की आवाज़ थी . की सामाजिक न्याय होना चाहिए .
खबरें-

संगमा को वोट देते-देते बचे मुलायम

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की चूक ने मतदान के दिन भी एक विवाद खड़ा कर दिया। प्रणब के समर्थन की घोषणा कर चुके मुलायम ने संगमा के नाम पर मुहर लगा दी। चूक का एहसास हुआ तो बैलट पेपर फाड़कर दूसरा बैलट लिया और उस पर प्रणब के पक्ष में मतदान किया। इस दौरान वहीं मौजूद विरोधी उम्मीदवार पीए संगमा के एजेंट सतपाल जैन ने कानूनी व्यवस्था का सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कर दिया। अब रविवार को मतगणना के दिन स्पष्ट होगा कि मुलायम सिंह के वोट की गणना होगी या नहीं।
पहली बार वोटिंग में भूल का एहसास हुआ तो मुलायम दोबारा चुनाव अधिकारी के पास गए और दूसरा बैलट मांगा। उन्होंने कहा कि वोट में गलती हो गई। यह कहते हुए उन्होंने अपना बैलट फाड़ दिया। सपा प्रमुख ने दूसरे बैलट पर मुहर तो लगी दी है लेकिन जैन के विरोध के कारण वह डब्बे में नहीं डाला गया।
संगमा के चुनाव एजेंट सतपाल जैन ने इस बारे में चुनाव अधिकारी और पर्वेक्षक को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में मुलायम सिंह का पहला मत ही वैध माने जाने की मांग की गई है। संगमा की ओर से की गई शिकायत में राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव नियम 1974 के रूल 15 का हवाला दिया गया है। इस नियम में दूसरा मतपत्र लेने की प्रक्रिया बताई गई है। सतपाल जैन का कहना है कि कोई भी व्यक्ति मतपत्र फाड़ कर दूसरा मतपत्र नहीं ले सकता। मतपत्र बदलने का यह तरीका गलत है।
क्या कहता है कानून
मतपत्र फाड़ने और दूसरा मतपत्र लेने की घटना को, मत की गोपनीयता भंग करना समझा जाएगा या नहीं यह जांच का विषय है। संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप मत की गोपनीयता भंग होने के बारे में बताया, कि राष्ट्रपति चुनाव में मतदान गोपनीय होता है। गोपनीयता भंग करना दंडनीय अपराध है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव नियम के मुताबिक गोपनीयता भंग होने पर तीन माह तक की सजा हो सकती है। जांच में पहले यह तय करना पड़ेगा कि गोपनीयता किसने भंग की है। वे कहते हैं कि मतपत्र फाड़ने के बारे में नियमों में कुछ नहीं कहा गया है लेकिन ऐसा करना गलत है। इतना जरूर है कि मतपत्र खराब होने पर दूसरा मतपत्र लिया जा सकता है। इस बारे में प्रक्रिया बताते हुए वे कहते हैं कि मामले की शिकायत पीठासीन अधिकारी से या चुनाव आयुक्त से की जा सकती है। शिकायत का निपटारा पीठासीन अधिकारी ही करेगा। यही नहीं राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट करता है।
यही तो होना था -


राष्ट्रपति चुनाव: मुलायम सिंह का वोट रद



Jul 20, 02:58 pm
नई दिल्ली। गुरुवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान गलती से पीए संगमा को वोट करने के बाद बैलट फाड़ने के कारण चुनाव आयोग ने मुलायम सिंह का वोट रद कर दिया है। चुनाव आयोग ने यह कदम रिटर्निग ऑफिसर की सिफारिश के आधार पर किया है। कल राष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग के दौरान गलती से मुलायम सिंह ने संगमा को वोट दे दिया था। गलती का एहसास होने पर उन्होंने बैलट फाड़ने की भी कोशिश की थी। रिटर्निग ऑफिसर ने यह मामला चुनाव आयोग के समक्ष पेश किया जिस पर यह फैसला किया गया।
गुरुवार को वोटिंग के दौरान प्रणब के समर्थन की घोषणा कर चुके मुलायम ने संगमा के सामने मुहर लगा दी। गलती का एहसास हुआ तो वह दोबारा चुनाव अधिकारी के पास गए और दूसरा बैलट मांगा। उन्होंने कहा कि वोट में गलती हो गई। यह कहते हुए उन्होंने अपना बैलट फाड़ दिया।
सपा प्रमुख ने दूसरे बैलट पर मुहर तो लगी दी है लेकिन संगमा के चुनाव एजेंट सतपाल जैन के विरोध के कारण वह डब्बे में नहीं डाला गया। जैन ने तत्काल इस बारे में चुनाव अधिकारी और पर्वेक्षक को लिखित शिकायत की। शिकायत में मुलायम सिंह का पहला मत ही वैध माने जाने की मांग की गई। संगमा की ओर से की गई शिकायत में राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव नियम 1974 के रूल 15 का हवाला दिया गया है। इस नियम में दूसरा मतपत्र लेने की प्रक्रिया बताई गई है। सतपाल जैन का कहना है कि कोई भी व्यक्ति मतपत्र फाड़ कर दूसरा मतपत्र नहीं ले सकता। मतपत्र बदलने का यह तरीका गलत है।
क्या कहता है कानून
मतपत्र फाड़ने और दूसरा मतपत्र लेने की घटना को, मत की गोपनीयता भंग करना समझा जाएगा या नहीं यह तो जांच का विषय है लेकिन संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप मत की गोपनीयता भंग होने के बारे में कानूनी स्थिति बताते हैं। कश्यप कहते हैं कि संविधान में कहा गया है कि राष्ट्रपति चुनाव में मतदान गोपनीय होगा। गोपनीयता भंग करना दंडनीय अपराध है।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव रूल के मुताबिक गोपनीयता भंग होने पर 3 माह तक की सजा हो सकती है। हालांकि जांच में पहले यह तय करना पड़ेगा कि गोपनीयता किसने भंग की है। वे कहते हैं कि मतपत्र फाड़ने के बारे में नियमों में कुछ नहीं कहा गया है लेकिन ऐसा करना गलत है। इतना जरूर है कि मतपत्र खराब होने पर दूसरा मतपत्र लिया जा सकता है।
इस बारे में शिकायत की प्रक्रिया बताते हुए वे कहते हैं कि मामले की शिकायत पीठासीन अधिकारी से या चुनाव आयुक्त से की जा सकती है। शिकायत का निपटारा पीठासीन अधिकारी करेगा। राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित चुनाव याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट करता है।

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