3 जुल॰ 2014

UN के कार्यक्रम में हुई मुलायम के बयान की आलोचना,

UN के कार्यक्रम में हुई मुलायम के बयान की आलोचना, कहा- इसीलिए बढ़ रहे हैं भारत में रेप

Anurag Tiwari|Jul 02, 2014, 22:02PM IST
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UN के कार्यक्रम में हुई मुलायम के बयान की आलोचना, कहा- इसीलिए बढ़ रहे हैं भारत में रेप
फोटोः जेनेवा में यूनाइटेड नेशंस के कन्वेंशन ऑफ द एलिमिनेशन ऑफ ऑल डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वीमेन (सीडा) में भाग लेते विभिन्न देशों के सदस्य। 
लखनऊ. सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का रेप पर दिया गया वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि लड़कों से अकसर गलतियां हो जाती हैं... बुधवार को यूनाइटेड नेशंस में भी गूंजा। इस बयान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने खूब निंदा की। साथ ही भारतीय नेताओं के ऐसे बयानों को महिलाओं के खिलाफ रेप और अन्य अपराध बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया। दरअसल, जेनेवा में यूनाइटेड नेशंस का 'कन्वेंशन ऑफ द एलिमिनेशन ऑफ ऑल डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वीमेन' यानी सीडा का कार्यक्रम चल रहा है। 
भारत के प्रतिनिधि बोले- मीडिया ने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया
कार्यक्रम में भाग ले रही लखनऊ की एक संस्था की सदस्यों ने dainikbhaskar.com को फोन पर बताया कि इंटरनेशनल मंच ने भारत में महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा की घटनाओं पर चिंता जाहिर की। पैनल ने भारतीय नेताओं के महिलाओं को लेकर दिए गए असंवेदनशील बयानों पर असंतोष जाहिर किया। पैनल द्वारा की गई निंदा के जवाब में भारतीय प्रवक्ता ने कहा कि ज्यादातर मामलों में मीडिया ने बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है।
बंदायू गैंगरेप मसला भी उठा
इंटरनेशनल पैनल ने भारत में महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति बढ़ रहे अपराधों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भारत सरकार को इन्हें रोकने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने चाहिए। पैनल ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल से बदायूं केस की जांच के विषय में भी पूछा। इस पर भारतीय प्रवक्ता ने जवाब दिया कि इस मामले में देश की शीर्ष जांच एजेंसी काम कर रही है। इंटरनेशनल पैनल ने घटना में पुलिसवालों के शामिल होने की बात पूछी। घटना के बाद मामले में पुलिस द्वारा लीपापोती की बात भी रखी। इस पर भारतीय प्रवक्ता ने जवाब दिया कि लापरवाह पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया है। इस पर अपना असंतोष जाहिर करते हुए पैनल ने कहा कि ऐसे मामलों में सस्पेंशन और सजा में बड़ा फर्क होता है।
क्या था मुलायम सिंह का विवादित बयान 
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान 10 अप्रैल को मुरादाबाद की एक रैली में मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि सभी मामलों में रेप पर फांसी देना पूरी तरह गलत है। लड़कों से अकसर गलतियां हो जाती हैं। मुंबई में तीन लड़कों को फांसी की सजा सुनाई गई है, जो कि नहीं होनी चाहिए। ऐसे कानूनों को बदलने की जरूरत है।

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मुलायम सिंह यादव के नाम खुला पत्र

फेसबुक पर वर्तिका जी का पत्र 
और वहीँ पर उनका उत्तर -डॉ लाल रत्नाकर 
*साभार (संपादक)
मुलायम सिंह यादव के नाम खुला पत्र


मुलायम जी,



आपका आभार। आपकी वजह से इस देश की मुझ जैसी बहुत सी औरतो का यह विश्वास पुख्ता हुआ कि औरत का अपना कोई अस्तित्व शायद है ही नहीं। औरत को न जीने का अधिकार है, न मरने का। उसके साथ अगर कोई भी अपराध हो तो उसे चुप ही रहना है। चुप्पी का दामन जब तक थाम सके, थामे और जब ऐसा न हो सके तो जिंदगी को अलविदा कह दे।


यादव साहब, आप क्या जानें अपराध क्या होता है और क्या होता है अपराध का शिकार होना। बेचारे लड़कों से तो सिर्फ गलती होती है और उन्हें बचाए जाने के लिए आपके मन में टीस भी उठ रही है। क्या मैं आपसे जान सकती हूं कि लड़की होना कौन-सा गुनाह है। क्या आपने आज तक किसी पीड़ित लड़की को देखा है, उससे मिले हैं आप, उसके और उसके परिवार के दर्द को देखा है क्या आपने कभी। और हां, आप तो बात रेप की कर रहे हैं। क्या आपको महिलाओं के खिलाफ होने वाले किसी और अपराध का इल्म है भी।



आप जैसे नेताओं की ही वजह से अपराध की शिकार औरतें घरों में सहमी रहती हैं। देश भर में महिला अपराध के एक लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। उन पर तो आप एक शब्द नहीं बोले। आपने कोई विरोध नहीं जताया जब महिला आरक्षण बिल इस बार भी संसद मे बेदम पड़ा रहा। आपने कोई प्रयास नहीं किया कि इस देश की औरत को चैन की सांस लेने का अधिकार मिल सके।


आपको औरतों से इतनी ही परेशानी है तो हमसे हमारे जीने का अधिकार ही क्यों नहीं छीन लेते। क्यों नहीं अपराधियों के लिए देश के सबसे बड़े सम्मान को देने का प्रयास कर लेते। फांसी के ऐलान से आपका मन दुखी है पर एसिड अटैक से जली हुई औरतों के लेकर आपके मन में जरा दुख नहीं उपजा।

धन्यवाद साहब। आपकी वजह से इस देश के कई राजनेताओं की इच्छाशक्ति जरा और खुल कर सामने आ गई। हम सब जानते हैं कि हर राजनीतिक दल में कुछ ऐसे नेता हैं जिनके महिलाओं को लेकर कुछ मिलते-जुलते ख्यालात हैं।

वैसे दीगर यह भी है कि आपके नाम के विपरीत आपके विचार मुझे कहीं से मुलायम दिखे नहीं। इस देश के आम जन के लिए आप कठोर सिंह यादव ही हैं।

मैं सोशल मीडिया के अपने साथियों से भी पूछना चाहती हूं। अपराध से गुजरी औरत पर एक क्षण में भद्दी टिप्पणियां कई बार उछल कर आ जाती हैं पर ऐसे नेताओं पर लिखने से पहले हम डर क्यों जाते हैं। क्या सिर्फ इसलिए कि वे पीडितों से ज्यादा ताकतवर हैं।
जी हां, इस देश में अपराधियों का सामाजिक बहिष्कार नहीं होता। आज अगर आप उन बलात्कारियों का फेसबुक अकाउंट खोल दें तो शायद वहां किसी एक पीड़ित के अकाउंट से ज्यादा बड़ी भीड़ जमा हो जाए।

आपके जरिए हमें फिर सच दिख गया पर तब भी यह जरूर कहूंगी – औरत को इतना भी कमजोर न समझिए जनाब। कानून और सियासत की ताकत जो भी हो, औरत की आह की ताकत का शायद अपराधियों को अभी अंदाजा ही नहीं है। अपराध से गुजरी औरत की आह देश और काल को मिटा सकती है। यकीन न हो तो इतिहास पलटिए।

इस देश के सजग पुरूषों और महिलाओं की तरफ से 

वर्तिका नन्दा

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सुश्री वर्तिका जी !

आप के आलेख ने वास्तव में झकझोर दिया "फिर लगा क्या वही मुलायम सिंह हैं जिनपर आप इतने आरोप मढ रही हैं, भाषा और आशय का तालमेल नहीं हो पाया होगा अन्यथा लड़कियों को आगे लाने के लिए इन्होने कम काम नहीं किया है" "कन्या विद्याधन और उनके लिए अनेकों सहूलियतें,लैपटॉप से लेकर अनेक तरह की योजनाएं, मुलायम सिंह जी की देंन ही है। 

वर्तिका जी मैं ईमानदारी से कह रहा हूँ की जिस मुलायम को मैं जानता हूँ उनमें बहुत अच्छे विचार हमारे पुरे समाज (महिला एवं पुरुष) के लिए रहे हैं और कई आदर्श भी उन्होंने खड़े किये हैं, बहन मायावती को सत्ता में शरीक करने से लेकर, तमाम महिला अधिकारियों की राय लेकर अपनी सरकार की कईबार कुर्बानी दिए हैं, केवल और केवल भरोसे की वजह से ही। 

अगर आप अकेले मुलायम सिंह पर "महिला आरक्षण बिल पास न होने देने का दोष मढना चाहती हैं तो इसपर आप अपनी जानकारी ताज़ा कर लें उन्होंने विरोध इसलिए नहीं किया महिला आरक्षण बिल पास न होने दिया जाय इसलिए किया है की उसमें दलित पिछड़ों की महिलाओं को भी शामिल किया जाय, क्योंकि वे जानते हैं की इस आरक्षण की साजिश क्या है. पर तमाम वे सांसद जो दलितों पिछड़ों के आरक्षण पर विरोध करते हैं, वे आपके निशाने पर नहीं आ सकते हैं, क्योंकि वहां सदियों के दबे कुचले लोगों का अधिकार जो बाधित हैं. 

फिर भी आपकी चिंता निहायत जायज है ! उन्होंने जो कुछ कहा उसका आशय देखिये उसे और सलीके से कहा जा सकता था परन्तु भाषा की त्रुटि की वजह से और कुछ उम्र तथा विस्म्रित भी कारण हो सकती है. 

मैं उनकी तरफदारी नहीं कर रहा हूँ, पर कई कारण हैं पर उनके प्रति आपका आक्रोश जायज हो सकता है लेकिन जो पुराने मुलायम सिंह को जानते हैं उन्हें पता है की उन्होंने आपके हालात के लिए कितना संघर्ष किये हैं यद्यपि आपने आज की हालात को मुलायम के बहाने ही सही "सही बयां की हैं" पर जब उन्होंने चुनावी सभा में कही है, संसद में नहीं और आप जानती ही हैं की मंच से कही गयी बातें कितनी सच होती है.

मेरा मानना है की "नेताजी को काफी बुरे लोगों ने घेरा हुआ है" जिसकी वजह से ऐसे जुमले वो जुबान पर लाते नहीं हैं आ जाते हैं। 

फिर भी महिलाओं का आक्रोश राजनैतिक हो सकता है, कम से कम सामजिक नहीं. 

अदम गोंडवी के शब्दों में-

मानव-मन के द्वन्द्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे, 
महारास की पृष्ठभूमि में 'ओशो'[1] का संन्यास भी है ।

-डॉ लाल रत्नाकर 

वर्तिका जी का जवाब ;

Vartika Nanda Dr.Lal Ratnakar लाल रत्नाकर जी, आपने बहुत जरूरी बातें लिखी हैं। मेरा भी विरोध 

अकेले मुलायम सिंह को लोकर नहीं है और न ही मैं अपने अकेले के आकलन से उन पर कोई आरोप लगा 

रही हूं। जो उन्होंने कहा है, मेरा आक्रोश उस पर है और पूरी तरह जायज है। महिलाओं की शिक्षा के लिए 

योगदान देना पर साथ ही उनके पंखों को काट देना - यह दो तथ्य हैं। यहां मुद्दा स्त्री बनाम पुरूष का भी 

नहीं है क्योंकि इसी समाज में ऐसे पुरूषों की कतई कोई कमी नहीं जो संवेदनशील हैं और जिनमें वे तमाम 

गुण हैं जो सम्मान योग्य है। दुख इस बात का है कि बड़े पदों पर आसीन नेता अक्सर महिलाओं को 

मजाक, उपभोग या फिर घृणा का विषय बना देते हैं और समाज चुप रहता है। लोकतांत्रिक देश में विकास 

इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम सामाजिक परिपाटी को कितना न्यापूर्ण बनाते हैं। अगर बलात्कार 

महज एक गलती है तो मेरे ख्याल से इससे दुर्भाग्यपूर्ण बयान और क्या हो सकता है।

मुझे वाकई खुशी होती अगर मुलायम सिंह पीड़ित महिलाओं के दर्द को भी कहीं जहन में रख लेते। मैं 

समझती हूं आज जब देश का युवा जागरूक और सक्रिय हो चला है, नेताओं और जिम्मेदारी के पदों पर 

बैठे नेताओं को समाज का बंटवारा स्त्री और पुरूष के नाम पर करना छोड़ देना चाहिए.


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हाल ही का ताजा मामला नेता जी के बयान और उसमे मचे बवाल का है।

"नेता जी ने कहा कि बलात्कार के मामलो में लडको को फांसी नहीं होनी चाहिए। देश के बिना विचार किये बोलने वाले मुर्खानन्दो ने इसका विरोध शुरू कर दिया। जबकि इसका सबसे ज्यादा शिकार भारत का नौजवान ही है, कानून की सर्वोच्च अदालत कहती है कि डॉक्टरी रिपोर्ट में भी अगर बलात्कार की पुष्टि न हो तो भी बलात्कार माना जायेगा। शरीर पे घाव के निशान न हो तब भी बलात्कार माना जायेगा, सिर्फ लड़की के कहने भर से अगर कोई लड़का बलात्कारीहो सकता है तो फिर आप इसे कानून कहेंगे या एड्स की वो बीमारी जो असुरक्षित यौन संबंधो से ही नहीं बल्कि नाई द्वारा गन्दा ब्लेड इस्तेमाल करने से भी हो सकती है । लड़की को लड़का पसंद नहीं, माँ बाप ने शादी कर दी, प्रेमी का प्रेम छूटा नहीं, तो दहेज़ दहेज़ चिल्ला कर जो लड़की अपने ससुर, अपनी सास , अपनी ननद, अपने पति को जेल में बंद करा सकती है, पडोसीसे नैन मटक्का पे पति या ससुराल द्वारा पकडे जाने पे दहेज़ एक्ट का इलज़ाम लगा कर अपने घर वालो को भड़का सकती है, वो रेप का झूठा आरोप क्यूँ नहीं लगा सकती? आज कल अखबारों में आताहै कि "6 महीने से नौकरी के नाम पे हो रहा था योन शोषण"क्या आप बताएँगे जो 6 महीने से बिना रोक टोक हो रहा था, मर्जी से हो रहा था, मजे के लिए हो रहा था या नौकरी के लालचमें हो रहा था वो बलात्कार कैसे है?बलात्कार वो है जो दिल्ली में दामिनी के साथ हुआ, बलात्कार वो है जो एक असहाय लड़की पे 10 दरिन्दे झपट कर, उसकी अस्मिता लूटें.गोपाल गोयल कांडा को प्रेम जाल में फंसा कर गीतिका शर्मा ने उससे रुतबा और पैसा सब कुछ लिया.. तब उससे किसी समाज, किसी बुद्धिजीवी, किसी कानून, और किसी परिवार ने नहीं पूछा कि तुम 1 करोड़ की बीएम्डब्लू में कैसे चलती हो,50 गज के मकान वाले साधारण परिवार में जन्म लेके 20 करोड के आलिशान बंगले में कैसे पहुँच गयी, आदमी भगवान् तो है नहीं है तो इंसान ही, इन रूपसियो ने तो विश्वामित्र की भी तपस्या भंग कर दी थी, रावन जैसे महान ज्ञानी तक को पगला दिया था, महाभारत जैसे विध्वंश्कारी युद्ध का कारण क्या था? जब तक गीतिका गोपाल गोयल कांडा के साथ उसकी संपत्ति को अपना बनाती रही तब तक ठीक था, उसे कोई नयी गीतिका मिल गयी तो अपना महारानी बन्ने का सपना टूटता देख उसने आत्म हत्या कर ली। इसमें कांडा पे लगा बलात्कार।अब जो समुन्दर के बीच जहाज में शैम्पियन की फुहार के बीच में, हवाई जहाज में, गोवा के बीच में खुलल्म खुल्ला हो रहा हो, परस्पर सहमती से हो रहा हो, वो बलात्कार कैसे है? लेकिन उसपे भी 376 लगी है। हजारो मामलो में मैंने देखा है कि लड़की लडको को और लड़के लडकियों को उकसाते है, दिन भर फ़ोन पे लगे रहते है, रात रात भर मोबाइलका बेलेंस चाटते है, लव स्टोरी चलती है, बाइक के पीछे लड़की चिपक कर बैठती है, जानू तुम्हे मेरी कसम कहकर दोनों इक दुसरे को कई कामो के लिए राजी करते है, जीने मरने के वादे करते है, और अंत में घर से फरार हो जाते है , बस फिर क्या लड़की के घरवालो की एप्लीकेशन पे थाना पुलिस लड़के के भाई को, बाप को, माँ को, बहनोई को, रिश्तेदार को, दोस्तों को उठा लेती है, मारती है, टॉर्चर करती है, और जब लड़का हाथ आ जायेया घर वालो की परेशानी देख कर समर्पण कर दे तो लड़की के माँ बाप एक झूठी एप्लीकेशन लड़की सइ दिलाते है कि मुझे बहला कर , फुसला कर ले गया था, मेरे साथ दुष्कर्म किया,सबकी आँख पे पट्टी बंध जाती है, मीडिया लिखती है, लड़की भगाने जेल भेजा, 366,376 आई पी सी में मुकदमा दर्ज, समाज को लड़की से सहानुभूति होतीहै और लड़के से नफरत.... मैं पूछता हूँ उस लड़के पे बलात्कार है ... किस आधार पेउसे फांसी होनी चाहिए?मायावती की सरकार में हर दूसरी दलित युवती थाने में शिकायत लेके खड़ी रहती थी कि फलां यादव जी, फलां लाला जी, फलां ठाकुर साहब , फलां पंडित जी, फलांखान साहब, फलां चौधरी साहब के लडको ने उसका रेप किया... चार्जशीट लगने पे लाखो रुपया मिलता था मुआवजे के नाम पेऔर फैंसले में मोटी रकम..99 % बलात्कार और हरिजन एक्ट के मामले बसपा सरकार में मुस्लिमो, सवर्णों, पिछडो पे फर्जी दर्ज हुए.. कोई बताएगा उन सबको किस आधार पे फांसी दे दी जाये?होटल के कमरों में 1000 रूपये घंटे भर को खर्च करके लाखो लड़के लड़कियां सेक्स में डूबे है लेकिन छापा पुलिस का हो या परिवार का अंत में जेल लड़का ही जाता है बलात्कार में लड़की तो अपनेघर चली जाती है और 6 महीने बाद शादी केसमय जयमाला और फेरो पे इतनी शरीफ नज़र आती है जैसे उससे चरित्रवान पूरी दुनिया में कोई न हो... मैं किसी को लिंग भेद के आधार पे चरित्रवान या चरित्र हीन नहीं कह सकता लेकिन ये तो बड़ा सवाल है कि होटल में दोनों ने अपनी मर्ज़ी से चेक-इन किया तो फिर लड़का बलात्कारी कैसे हो गया? एक खता के दो जिम्मेदारो को अलग अलग नजरिये से देखना कहाँ का इन्साफ है? एक को फांसी और दुसरे को सहानुभूति? राजनितिक रंजिशो में लाखो मुक़दमे देशमें फर्जी रूप से बलात्कार के दर्ज कराये गए है वो नौजवान आज तक जेल में बिना जमानत के तड़प रहे है.. उनके परिवार समाज के ताने सुन रहे है.. वो लाखो नौजवान फांसी के अधिकारी कैसे है?नेता जी ने सिर्फ इतना ही कहा कि बलात्कार के मामले में फांसी न हो, क्यूंकि वो भी जानते है कि भारत के युवाओं के खिलाफ बलात्कार को हथियार बनाकर उनका भविष्य बर्बाद किया जाता है। लडको से गलती हो जाती है के पीछे उनका आशय बलात्कार करने वाली गलती से नहीं, उसको नेता जी तो क्या कोई भी गलती नहीं कहेगा क्यूंकि बलात्कार गलती नहीं दरिंदगी है, नेता जी का आशय उस गलती से है जो लड़का प्यार में करता है, भावना में करता है, आकर्षण में करता है, लड़की के आग्रह पे करता है, उसकी सहमती से करता है, लेकिन उसको बलात्कार का नाम दे दिया जाता है..."
-वरुण यादव के पेज से

अब आप लोग ही बताओ नेताजी ने क्या गलत कहा
  https://www.facebook.com/varun.yadav.5205622

मित्रों 
माननीय मुलायम सिंह यादव् ने जो कुछ भी कहा था उस पर देश की एक सजग महिला ने उनको एक खुला पत्र लिखा था जिस पर मैंने उन्हें तुरंत टिप्पणी भी की थी उसे संलग्न कर रहा हूँ आप जरूर पढ़िए ! पर यह बात यूनाइटेड नेशन के मंच पर जा सकती है, पर देश हज़ारों वर्षों से जो गैर बराबरी भ्रष्टाचार की आग से जल रहा है उस पर कोई चर्चा नहीं है , निश्चित रूप से सोसियल मीडिया ने बहुत आजादी दी है अपनी बात रखने की अन्यथा आधी बातें ही हमारे सामने आतीं !

आज मैं उन्ही सजग महिला के 'पेज' पर गया इस संद्दर्भ को तलाशने के लिए वहां उनके पक्ष की टिप्पणियाँ तो थीं पर मेरी टिप्पणी गायब थीं, ऐसी ही ताकतें अदना सी बात को पहाड़ बना देती हैं और सच को निगल जाती हैं। 

कुछ ऐसा खेल भी  यूनाइटेड नेशन के मंच पर खेला जा रहा है। 


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