28/08/2016

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की फ़ेसबुक पर

इन्ही सारे मुद्दों को लेकर हमने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जो पिछड़े वर्ग से आते हैं से सवाल किया (पत्र लिखकर वह  पत्र यहाँ दे रहा हूँ जिसमें मंडल कमीशन की संस्तुतियों का मामला है.)

मित्रों 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की फ़ेसबुक पर हमने यह पत्र लिखा है !

"मा.मुख्यमंत्री जी !
महोदय,
महामना मंडल की जयन्ती पर सामाजिक न्याय के लिये बी पी मंडल का योगदान ज्यादा है या जनेश्वर मिश्रा का ? यह तय तो करना होगा सवर्णों की प्राथमिकतायें कॉंग्रेस और भाजपा है न कि सपा और बसपा ? इसलिये समझ तो यही बननी चाहिये जिसके लिये यदि कुछ भी करना था तो पहला दायित्व तो यह बनता है कि मंडल चौक या पार्क लखनऊ की सरज़मीं पर बनना चाहिये, समाजवादियों की लिस्ट में नाम होने न होने से वोट नहीं मिलती।
यहॉ पर हो क्या रहा है ? ये कर क्या रहे हैं और हम क्या कर रहे हैं ? इसीलिये जब सब्र का पहाड़ टूट गया सो लिख रहा हूँ । क्योंकि हमने ज.मिश्र की पिछड़ों के प्रति कुंण्ठा भी देखी है और पिछड़ों के पुरोधा मंडल का प्रेम और प्रोत्साहन भी !
पिछडों दलितों के महान आकाओं क्यों गर्त में ले जा रहे हो सामाजिक बदलाव को? बी पी मंडल का योगदान ज्यादा है या जनेश्वर मिश्रा का ? यह लिखने का मूल आशय यही है कि हम किधर जा रहे हैं, यहॉ यह कहना वास्तव में इसलिये अनिवार्य है कि समाजवाद में प्रभाववाद कहॉ से आ जाता है? जिसको देखिये वही समाजवादी हो जा रहा है और पूँजीवादी, ब्राह्मणवादी, सामंत, दुराचारी और अपराधी तो है ही ।
मेरे विचार से यदि बी पी मंडल के स्मृति में चौक या पार्क लखनऊ की सरज़मीं पर बनता, उसी में राम स्वरूप वर्मा , राम सेवक यादव और नेता जी व चन्द्रजीत यादव और कुछ मुस्लिम समाजवादियों तथा दलितों को लगाना चाहिये, क्योंकि वोट पिछड़ो से लेनी है तो उनके आइकॉन भी चिन्हित करने होंगे, केवल समाजवादियों की लिस्ट में नाम लिख जाने समाजवादी नहीं हो जाता और न ही उससे वोट ही मिलती है !
नेता जी भी यही कहते रहे हैं कि देश के सारे मन्दिर हम सोने के बनवा दें तो भी हमें वह वोट नहीं करेंगे ?
अब ये कर क्या रहे हैं और हमसे उम्मीद क्या कर रहे हैं ?

पिछडों दलितों के महान आकाओं क्यों गर्त में ले जा रहे हो सामाजिक न्याय की अवधारणा व बदलाव को?
हम राज्य करने नहीं आ रहे है पर ये जानते हैं कि राजा को चापलूस घेर लेता है और तब तक घेरे रहता है जब तक उसका राज्य नहीं चला जाता, युवाओं के साथ तो और भी दिक़्क़त है, राहुल गांधी से बड़ा उदाहरण कहॉ मिलेगा, पूरा जहाज़ डूबो दिया, जबकि अन्ना, स्वामी राम देव, केजरीवाल, किरने बेदी यहॉ तक की भूषण परिवार और योगेन्द्र यादव सबको मोदी जी ने गच्चा जनता के बूते ही दे दिया*****!

इसीलिये अगुवा के अनुभवी होने का मतलब होता है, यद्यपि युवा को आगे करने का पक्षधर मैं भी हूँ पर उनकी योग्यता की बात नहीं अनुभव की बात करता हूँ , तो पाता हूँ कि वो गच्चा ही देते हैं क्योंकि वे ज़्यादा उत्साही हो जाते हैं ।
कहीं न कहीं पिछड़ों के प्लेसमेण्ट में मोदी जी को उसका प्रतीकात्मक स्वरूप पिछड़ा ही तो है, यहॉ भी वह सदियों के बदमासियों की तरह गच्चा दे दिया है ! जबकि हमने बिहार को भी देखा है, लालू के राज्य को रोकने के लिये वहॉ के स्वार्थी भूमिहारों के साथ भाजपा ने भी नीतिश का साथ दिया, पर जैसे ही उनके साथ भाजपा ने अपना छुपा एजेण्डा से राज्य की सत्ता हथियाना चाहा लालू ने नीतिश की ही नही अपनी भी सत्ता में वापसी कर ली ।
यही है मंडल महिमा !
इसीलिये मंडल बहुत बडे है !
सादर
डा०लाल रत्नाकर

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