29/09/2017

सामयिक आलेख - समाजवादी पार्टी

नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी ! 
अखिलेश यादव जी को नेतृत्व सौंप देने के बाद पछताना ठीक नही.....
-चंद्र भूषण सिंह यादव 

(भाई  श्री चंद्र भूषण सिंह यादव लिखने के मामले में बहुत ही तत्पर रहते हैं और देश की विभिन्न परिस्थितियों पर इनका सामयिक आलेख हमें उससे राहत न देता हो पर विवरण जरूर दे देता है। सूचना क्रांति के दौर में यह उपयोगिता भाई चंद्र भूषण सिंह यादव के जरिये  हम तक पहुंचती ही रहती है। मैं तो समाजवादी पार्टी कोआजकल इन्ही के जरिये जानता हूँ।  श्री अखिलेश यादव जी इनकी बातों से कितने सहमत होंगें यह तो वह और यही जाने।  

यह सामयिक आलेख - समाजवादी पार्टी  के बारे में कितना प्रासांगिक है  वक़्त बताएगा  मुझे तो पहले भी जो जानकारी थी उसपर इनसे लम्भी वार्ता भी किया था लेकिन मुझे लगता है यह अपने राजनितिक समीकरणों के चलते उनसे वह सन्देश यह नहीं दे पाए थे, आजकल इनको वह कितना तरजीह वे दे रहे हैं मुझे उसका अंदाज़ा नहीं है।  पर एक बात अब भी है की श्री अखिलेश जी जिस राजनीती की दिशा में जा रहे हैं वह उन्हें नेता जी  (श्री मुलायम सिंह यादव ) की राजनीती से आगे ले जाती हुयी नहीं दिख रही है। 
--डॉ.लाल रतनाकर )                                           

श्री मुलायम सिंह यादव
(पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी /संरक्षक)
नेताजी !
समय सदैव एक सा नही रहता। जो व्यक्ति आज सुपर स्टार है वह कल भी सुपर स्टार बना रहेगा,यह सम्भव नही है। स्थिति-परिस्थिति बदलती रहती है।आज जो शिखर पर है वह कल भी शिखर पर कायम रहेगा,यह कत्तई सम्भव नही है।नेताजी!आपने 78 बसन्त देखे हैं।तमाम उतार-चढ़ाव झेले हैं। एक से एक प्रभावशाली लोगों को बनते-बिगड़ते देखा है फिर नाहक का क्लेश क्यो लिए हुए हैं?

नेताजी !
आपने गांधी जी को देखा है। जिस गांधी ने कांग्रेस को देश मे जंग का हथियार बनाया।जिस गांधी के एक इशारे पर क्रांति की चिनगारी जली और एक इशारे पर बुझी वह गांधी भी कालांतर में कितने कमजोर हो गए थे,यह आपने देखा है।जब सत्ता और संगठन पर नेहरू-पटेल काबिज हो गए तो गांधी जी यह कहने के बावजूद कि मेरी लाश पर भारत-पाकिस्तान बनेगा,गांधी जी की कुछ न चली और देश बंट गया।गांधी जी के प्रति नेहरू और पटेल इतने अगम्भीर हो गए थे कि उनके सुरक्षा तक की कोई सुधि न रही गांधी जी द्वारा निर्मित सरकार के अंदर और प्रार्थना सभा मे वे गोली खाने को मजबूर हुए। गांधी जी ने चुपचाप कांग्रेस के चवन्निया मेम्बरशिप से त्यागपत्र देकर नेहरू-पटेल के जिम्मे कंग्रेस छोड़ दिया।गांधी जी समझ गए कि अब वे बूढ़े हो गए हैं,नेतृत्व नए हाथों में चला गया है इसलिए चुपचाप रहकर खुद की इज्जत बनाये रखी जाए।गांधी जी की वह चुप्पी ही आज उन्हें राष्ट्रपिता बनाये हुए है।यदि गांधी जी ने समय की नजाकत न समझी होती और नेहरू-पटेल से बगावत कर दिए होते तो गांधी आज भारतीय जनमानस के मानस पटल पर अमिट रूप में अंकित न रहते।

नेताजी ! 
कांग्रेस की इमरजेंसी और इंदिरा जी के क्रूर शासन के बिरुद्ध सम्पूर्ण विपक्ष को एकजुट करने वाले जयप्रकाश नारायण जी गांधी जी के बाद देश के दूसरे ऐसे महापुरुष हैं जिन्होंने सत्ता अपने द्वारा तैयार सँघर्ष की जमीन से लिया पर खुद पद न लेकर दूसरे लोगो को सत्ता सौंप दी लेकिन आप गवाह हैं कि सत्ता पाए लोगो ने जेपी के जनता के नाम सम्बोधन में उल्लिखित किसी बात को पूर्ण नही किया और जेपी खुद की आहुति से निकली सत्ता द्वारा तिरस्कृत हुए परन्तु उन्होंने जब नेतृत्व दूसरों को दे दिया था तो उसे सहज तरीके से स्वीकार कर लिया तभी वे आज भी गैर कांग्रेसी धारा के बीच स्तुत्य हैं और यूपी/बिहार में जेपी का नाम लिए बिना गैर कांग्रेसी धारा की कल्पना नही की जा सकती है।

नेताजी !
आप ने 1992 में समाजवादी पार्टी बनाई और उसे यूपी में शिखर पर पंहुचाया।तमाम दिग्गज लोगो को चरखा दांव लगाते हुए आप सैफई के मुलायम से दुनिया के शीर्ष नेताओं के बीच जोखिम उठाने वाले बहादुर मुलायम के रूप में पहचान बनाये।नेताजी! आपने 2012 में चाहे जिन परिस्थितियों में अपने सुलायक बेटे अखिलेश यादव जी को खुद के नाम पर प्राप्त सत्ता सौंप दी।अखिलेश यादव जी टीपू से टीपू सुल्तान बन गये और यूपी को अपने कौशल से तरक्की की तरफ ले गए। 2016 के अंत मे आप द्वारा पता नही किन कारणों से स्पष्ट रुख न अपनाए जाने से पार्टी में विवाद बढ़ा और वह विवाद 01 जनवरी 2017 को अपने चरम पर आ गया और भारी मन से समाजवादी पार्टी को आपको राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर अखिलेश यादव जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना पड़ा था।नेताजी! कैसी परिस्थिति जन्म ले ली कि वह टीपू आपके पद को ले लिया जो मुख्यमंत्री रहते सार्वजनिक तौर पर डांट सुन मुस्कुराता रहता था, हाथ से माइक छीन लिए जाने के बावजूद उफ न किया था,मंच से फफक के रो पड़ा था पर आपको कभी उलाहना न दिया था,बचपन मे खुद का नाम अखिलेश रखा था पर आपके समक्ष खड़े होने की हिम्मत न किया था।नेताजी! आपने न चाहते हुए अखिलेश जी से पदोन्नति में आरक्षण का विरोध करवाया,त्रिस्तरीय आरक्षण वापस करवाया पर अखिलेश जी ने अपने राजनैतिक नफा-नुकसान अथवा अपने वर्ग के हित-अनहित का ख्याल किये बिना आपकी बात को मानकर अपनी शाख को दांव पर लगा दिया।नेताजी!अखिलेश जी भले ही मुख्यमंत्री थे पर उनकी हर फाइल आपके नजरो के सामने से होकर गुजरती थी।
अपने मन का सचिव तक नही रख सके थे अखिलेश जी।नेताजी! आपने अनीता सिंह जी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी की हर कार्यबृत्ति की स्क्रीनिंग हेतु नियुक्त कर रखा था।नेताजी!अखिलेश जी ने जनेश्वर मिश्र पार्क,एक्सप्रेस वे,जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र,मेट्रो,लोक भवन सहित सम्पूर्ण महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण आप से ही करवाया फिर भी वे आप द्वारा डांट खाते रहे।नेताजी!ऐसा बेटा कहाँ मिलेगा जो आपकी डांट सुनकर मुस्कुराता रहे और प्रतिक्रिया में कहे कि मुझे पता ही नही चलता कि नेताजी कब राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका में तो कब पिता की भूमिका में आ जाते हैं?नेताजी!कुल के बाद जब आपने 2012 में अखिलेश यादव जी को नेतृत्व सौंप दिए तो फिर अब उस नेतृत्वकर्ता अखिलेश यादव जी को ही सजाने-संवारने का काम होना चाहिए न कि रोज-रोज की यह किचकिच कि अब थूका कि तब थूका।नेताजी!अब थूकने का काम बंद होना चाहिए।आपने समर्थ हाथों में जब नेतृत्व सौंप दिया है तो गांधी और जयप्रकाश की तरह भूतकाल की घटनाओं को देखते हुए यथार्थ को समझते हुए अखिलेश यादव जी को अपना स्नेहिल आशीर्वाद दें तथा कुछ लोगो की रोज-रोज की खुजली को मिटा दें।नेताजी!हम जिसे इतिहास कह रहे हैं उसे आपने देखा,जिया और भोगा है।इतिहास गवाह है कि जिस गांधी और जयप्रकाश ने कांग्रेस या जनता पार्टी को जन्म देकर प्राण दिया वही उसके फलदार होने पर किनारे कर दिए गए लेकिन उन लोगो ने खुद को संभाला और देश की राजनीति में आज बिना किसी पद पर रहे पूजनीय इतिहास बना कर चले गए हैं।

नेताजी !
देश बड़े नाजुक दौर से गुजर रहा है।हम सब की छोटी सी चूक हमे गर्त में पँहुचा सकती है।हम सबको समय की नजाकत को भांपते हुए अखिलेश यादव के नेतृत्व को मजबूत करते हुए खुश होना चाहिए कि इतना सुलायक पुत्र है आपके पास पर नेताजी शरीफ से शरीफ आदमी बेवजह डंडा करने से विद्रोह कर जाता है जो होता तो आत्मघाती ही है।

नेताजी !
अब आपको इतिहास बनाने हेतु प्रयत्नशील होना चाहिए।लेखन,उद्बोधन आदि में नीतिगत बातें आनी चाहिए।सामाजिक न्याय का एजेंडा प्रभावशाली भूमिका में होना चाहिए।नेताजी!अखिलेश यादव जी आपके लिए एक आदर्श पुत्र हैं जो आपका नाम लेते ही आंखों से डबडबा जाते हैं।नेताजी!आप भी गांधी जी और जेपी जी की तरह सत्ता को अखिलेश यादव जी को सौंपने के बाद नीति,कार्यक्रम,विचार आदि पर जमकर प्रशिक्षण चलाइये।भारतीय जनता पार्टी का मोहरा बन व बना रहे लोगो से सतर्क हो अपना इतिहास बनाईये और यूपी से देश मे परिवर्तन का आगाज करिए।

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