27 सित॰ 2009


रामनवमी और विजय दशमी -


जिस राम को बनवास और उनके बदले सौतेली माँ द्वारा अपने पुत्र को राजपाट,और भरत जैसे पुत्र और भाई का सामंजस्य जिस देश का चरित्र रहा हो उस देश में यही राष्ट्रीय पर्व का अधिकारी बनाता है | यह विजय दशमी का त्यौहार उन तमाम बंधू बांधवों द्वारा जिसमे नाना प्रकार के दूत योद्धा नीतिकार सहायक रहे वह विजय पर्व ही हो सकता है क्योंकि -जिन राक्षसों से राम को लड़ना पड़ा था वह बहुत ही बुद्धिमान ब्राह्मण थे .उनको उस समय राक्षस क्यों कहा गया होगा इसके पीछे जरुर  र्कोई न कोई साजिश थी |
ब्राह्मण और राक्षश दो धाराओं को मिला देना अच्छी बात भले हो पर ये अवधारणा बिलकुल गलत है | क्योंकि भारतीय समाज में यह जानते हुए की रावन रावन है हर वर्ष इसको धूमधाम से याद किया जाता है | इतिहास के गर्भ में अन्य बहुत सारी अवधार्नाये है पर इन पर्वों से जिनकी कमाई होती है उनके लिए इनका न होना मायने रखता है ''मॉल और मेले''दोनों कांसेप्ट साथ साथ यही अमेरिका भी बनेगा और 'भारत' भी रहेगा यथा हम सब कुछ झेलेंगे -



श्रद्धालुओं की भीड़ में कई महिलाओं की चेन लूटी


''सीकरी खुर्द स्थित महामाया देवी मंदिर स्थल परिसर में नवरात्र की अष्टमी के दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ में तीन महिलाओं की चेन लूट ली गई। दो दिन के भीतर झपटमारों ने पांच महिलाओं से चेन व कुंडल लूट लिए। पुलिस ने किसी भी मामले को दर्ज नहीं किया है।
रविवार की सुबह एक घंटे में मंदिर परिसर में तीन महिलाओं से चेन लूट ली गई। सुबह सात बजे सीकरी खुर्द की रहने वाली सीमा पत्‍‌नी विकास पूजा अर्चना कर लौट रही थी, उसी दौरान भीड़ में झपटमारों ने उसके गले से ढाई तोले की चेन लूट ली। इसके कुछ देर बाद ही बदमाशों ने हरमुखपुरी में रहने वाली त्रिलोक की पत्‍‌नी रामरती के गले से सोने की चेन लूट ली। ये महिलाएं पुलिस को वारदात के बारे में ही बता रही थीं कि तभी टी.पी. नगर मेरठ में रहने वाले ट्रांसपोर्ट व्यवसायी कुलदीप की पत्‍‌नी सीमा के गले से भी चेन झपट ली गई।''
इनका क्या दोष था यह तो परिष्कृत भावः से पर्व की महत्ता को पूरा करने गयी थी इन्हें क्या पता चेन स्नेचर भी वहां मौजूद है |
अकेले यही नहीं मेले का दर्द और आनंद लगभग सभी लोंगों को एक समान मिलता होगा यह कहना अनुचित होगा | 
डॉ.लाल रत्नाकर

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