01/02/2010

साथियों,
मै यहाँ 'Facebook' पर हुई चर्चा का उल्लेख कर रहा हूँ -

28 जनवरी को जोड़ा गया ·  · 
Suman Yadav
Suman Yadav 
Whatsoever her political character is, she really understands the contradiction of other feudal parties. Despite lot of pump and show of prince Rahul Congress could not gain a single point and Mulayam is destined to loss everything. victory to her in this regard. Muslims, Harijans, Brahmans trinity will win them..
शुक्र को 11:14 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
प्रिंस राहुल की मैनेजरी राजनीति के झासे में तीनो ही नही आने वाले, यदि चीजे ठीक से चलती रहीं। ब्राह्मणो और मुलमानो का भी हित मायावती के साथ ही जुडा हुआ है। यूपी का ब्राह्मण कमो वेश दलित की श्रेणी मे है, काँग्रेस से उसको कोई आशा नही है और भाजपा बनियो की पार्टी है। मुसलमान भाजपा के खिलाफ सहुलियत से रहेगा । जय हो ।
शुक्र को 11:21 बजे · रिपोर्ट करें
Ekta Tripathi
Ekta Tripathi 
जय हो जातिवाद का वर्गीय समीकरण बदल गया है। और राष्ट्रीय स्तर पर इसे बदल जाना चाहिये। मुसलमान जिसे हासिये पर काँग्रेस और भाजपा दोनो ने मिलकर डाल रक्खा है वे भी समझ रहे है कि उनके हित ज्यादा सुरक्षित मयावती के साथ ही हैं।
शुक्र को 11:27 बजे · रिपोर्ट करें
Pranav Gupta
Pranav Gupta 
This will give us the way for the other dialectics of Marxism..we will then excess it with full blow.
शुक्र को 11:29 बजे · रिपोर्ट करें
Rajesh Shukla
Rajesh Shukla 
Great war she is about to wage, just some good intellectuals are not with her, to suggest her what to do more in a revolutionary way at this juncture of Corporate fascism.
शुक्र को 11:38 बजे · रिपोर्ट करें
Rajesh Shukla
Rajesh Shukla 
Suman, this is not only political economic question for Muslims and Hrijans but also a question of cultural identity .. for example see from the main stream culture Muslims are almost out, where is their cultural identity which is richest in the world? Congress took vote from them but did not offer anything except this that they are saving them from fascists who want to make India a Hindu nation.
शुक्र को 11:48 बजे · रिपोर्ट करें
Bhole Nath
Bhole Nath 
sir, fuck the petty bourgeois siting in the media and the corporate culture they are promoting..Muslim and Harijans must come forward to demand their representation in the culture industry, without it their right is not going to be fulfilled. Brahmanas and Khatriyas too must support it as they too have lost their stake in it. Corporate culture ... और देखें
शुक्र को 11:58 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
सही कह रहें -चलिये इसे लडें ताकी चक्र पुरा हो। आह! मुसलमानो का वह तहजीब आँखे तरस हई हैं देखने को और हरिजनो को नया बनाना है जो कुछ सैवेज है उनके पास उससे आगे एक साँस्कृतिक पहचान। सच है फक् बुर्जुआ पैरासाईट्स !
शुक्र को 12:05 बजे · रिपोर्ट करें
Umesh Kumar
Umesh Kumar 
Flag march of Army was also wrong so is statue force of Ms Maya
शुक्र को 12:28 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
statue force of Ms Maya is not wrong as she feels threat from Mulayam gundas who can harm the newly created pride of Dalits. while Taj hotel is pride of an individual TATA with whom national pride was falsely associated by the bourgeois five star hotel goers.
शुक्र को 12:34 बजे · रिपोर्ट करें
Dr.Lal Ratnakar
Dr.Lal Ratnakar 
मायावती वही कर रही है दरअसल जो एक दलित नेता को करना चाहिए पर गलती ये है की यह सब द्विजों की देख रेख मे हो रहा है,जिसका खामियाजा शूद्र को उठाना होगा यथा शूद्रों की भावनाएं इन तमाम स्मारकों के प्रति जीतनी उदार और उत्साही होनी चाहिए थी वह नहीं है उलटे उन्हें उल्टा सीधा कह कर 'बरबाद' काम की संज्ञा दी जा रही है |
डॉ.लाल रत्नाकर
शुक्र को 15:30 बजे · 
Suman Yadav
Suman Yadav 
मुझे लगता है अकेले दलित उत्तरप्रदेश मे कुछ नही कर सकते जब तक द्विजो और मुसलमानो का साथ उन्हे नही मिलता। उन्हे लडाई तो साथ ही मिलकर लडनी पडेगी।
शुक्र को 18:01 बजे · रिपोर्ट करें
Dr.Lal Ratnakar
Dr.Lal Ratnakar 
बहस के स्तर पर राजनितिक परिचर्चा करना आज बेमानी सा हो गया है, समग्र सुविधा भोगी राजनैतिक स्थितियां ही प्रधान हो गयी है, जहाँ भारतीय राजनीति जा रही है वहां बहुत कुछ सामान्य होने नहीं जा रहा है बल्कि बहुत ही खतरनाक होने की संभावना बन गयी है, परिवारवाद जातिवाद से बड़ा जहर है जातिवाद साम्प्रदायिकता से ज्यादा खतरनाक है पर निक्कम्माबाद सारे वादों से खतर... और देखें
शुक्र को 22:31 बजे · 
Rajeev Tibrewal
Rajeev Tibrewal 
टाटा का ताज समूह होटल एवं अन्य व्यवसाय भारत सरकार तथा सम्बंधित राज्य सरकार को टेक्स के रूप इतना धन देता है की यदि उसकी संपत्ति की रक्षा करने के लिए मुंबई पुलिस के जवान लगाये जाते हैं तो इसमे किसी को आपत्ति नही होनी चाहिए. जहाँ तक मायावतीजी द्वारा लगाई मूर्तियों की रक्षा हेतु पुलिस फ़ोर्स का गठन किया गया है वो देश के उस सक्षम वर्ग के मेहनत से कमाए पै... और देखें
बीते कल 12:07 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
@इसे इसके इतर देखने की कोशिस की जिये । यह दलितो की एक अस्मिता की भी रचना है जो किसी सरकार ने नही किया। अम्बेडकर चाहते थे दलितो की अपनी एक सांस्कृतिक अस्मिता हो जो हिन्दुओं से अलग हो क्योंकि उनका हिन्दू बने रहना उनके पिछडेपन के लिये घातक है। वे बौधस्ट हो रहे है अपनी जनजातीय तथा अपनी परम्परागत संस्कृति के प्रति अब सतर्क हो रहे हैं। उनमें एक सास्कृतिक...और देखें
बीते कल 12:32 बजे · रिपोर्ट करें
Rajeev Tibrewal
Rajeev Tibrewal 
देश का दुर्भाग्य है की अब दलितों को भी हिन्दू मुसलमान के चश्मे से देखा जाता है. दलित वर्ग शास्वत हिन्दू ही है, हाँ ये अलग बात हे कि आंबेडकर ने बोद्ध धर्म अपनालिया हो और इसमे कोई बुराई भी नही है.प्रतेक व्यक्ति को अपना धर्म मानने कि स्वतंत्रता है,लेकिन इसका मतलब यह तो नही हुआ कि आंबेडकर जो धरम माने वही सभी दलितों को मानना चाहिए.आज भी आपको कई उदाहरण म... और देखें
बीते कल 13:00 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
पहले वह दलित नेता है दलितो ने उसे बडा बनाया तो दलितो के लिये वह कर रही है। दलित हिन्दू कभी नही रहा वह दलित रहा है। मायावती ने जो साँस्कृतिक स्वाभिमान की बात की है चाहे वह बुत से शुरू हुआ हो उसका समर्थन किया जाना चाहिये। कीडे मकोडो की तरह ट्रीट किये जाने वाले दलित हिन्दू क्यो हों जिन्हे किसी पवित्र जगह मे घुसने की इजाजद नही थी वह किस तरह हिन्दू हुआ ... और देखें
बीते कल 13:36 बजे · रिपोर्ट करें
Singh Umrao Jatav
Singh Umrao Jatav 
i am dalit. with some reservations i am in total agreement suman ji
आज 04:19 बजे · रिपोर्ट करें
Dr.Lal Ratnakar
Dr.Lal Ratnakar 
आज बात दलित की नहीं हो रही है आज सत्ता की बात है मायावती का विजन दलित उत्थान का नहीं है मायावती सभी दलितों से महान बनने की प्रक्रिया मे लगी है, जिन दलित नेताओ की प्रतिमाएं मायावती स्थापित करा रही है वह उन्हें ही भयावह बना दिए है की उनकी रक्षा के लिए उन्हें फौज बनानी पड़ रही है, मायावती जी शायद भूल रही है की इंदिरा गाँधी के घर मे उन्ही के रक्षकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी, इसका कारन भी जातीय और धार्मिक उन्माद ही था |
सुमन यादव को दलित स्मिता इन पत्थरो के बुतों मे नज़र आ रही है जिसे "भ.बुद्ध ने, स्वामी दयानंद ने , अनेक दलित नेताओ ने बहुत मुश्किल से खत्म कराया था , जिसे बहन जी ब्रह्मण चतुराई के बसिभूत होकर बुत बनाने मे सारी दौलत समय बर्बाद कर रही है यह सच है की बुद्धिजम दुनिया के अनेक देशों ने स्वीकार किया और आज उनकी जगह हर क्षेत्र मे नज़र आती है पर भारत मे ?
उत्तर प्रदेश मे सामाजिक चेतना बढ़ने वाले बुतों की रक्षा उन बुतों के दुश्मन कैसे करेंगे उनकी,इस फौज द्वारा किससे रक्षा कराइ जानी है, जो दरअसल बुत तोड़ते और तोरवाते है वह तो आजकल मायावती के साथ ही है, शायद मायावती जी दलितों को ही उस फौज मे रखना चाह रही हों पर आज जो उनके साथ है उन्हें हर जगह बराबर का हक चाहिए तो वह तो रहेंगे ही, जब दलित को अकल आएगी की अब इन बुतों को तोड़ना चाहिए तो यही द्विज फिर इनके काम आयेंगे और मायावती जी के बुत प्रेम के कारन फिर ब्रह्मणवाद इसका आविर्भाव करेगा तब दलित इनकी चल समझेगा और उनकी नेता द्वारा सारा समय अपने बुतों मे बरबाद करने मे जाया होगा , सामाजिक सरोकार बढ़ाने की बजाय ब्रह्मण सामाजिक सरोकार घटाता है "क्योंकि एन कें प्रकारेण" ऊपर रहना चाहता है .
क्योंकि लबे समय से ब्रह्मिन उत्तर प्रदेश की राजनीती से बाहर था उसे 'सत्ता चाहिए थी' सो समझ से काम लिया 'गाय की पूंछ पकड़ कर कसाई की तरह घुस आया' है . आज हर दलित उसकी चालाकी समझ रहा है पर उसकी मुखिया को क्यों समझ नहीं आ रहा है , जैसे मुलायम को नहीं समझ आ रहा था 'अमर' ये किसी दलित और पिछड़े के हितैषी नहीं हो सकते |
डॉ.लाल रत्नाकर... और देखें
आज 08:49 बजे · 
Shivani Lochab
Shivani Lochab 
I think suman's view is more rational. @lal ratnakar seems to be reactionary which will not works in the political geometry. Mayavati knows it fully that without 29% Brahmans support she can not do anything. She was reactionary in the beginning but now she understands the social engineering.
आज 09:33 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
मेरा मानना है कि कोई भी प्रतिक्रियावादी राजनीति अपने स्वरूप मे जनतंत्र विरोधी होती है। और सामाजिक समीकरण में आपको यह देखना ही पडेगा कि कौन सा वर्ग आप जिस वर्ग के लिये लड रहे है उसके साथ है। भूत मे क्या हुआ यह मुद्दा नही है वर्तमान मुद्दा है और वर्तमान मे ब्राह्मण बहुसंख्यक भी कमोवेश दलित वर्ग मे आ चुका है मै उन चन्द ब्राह्मणो की बात नही कर रही हूँ ... और देखें
आज 10:47 बजे · रिपोर्ट करें
Dr.Lal Ratnakar
Dr.Lal Ratnakar 
जीतनी आसानी से सारा समीकरण आप ने ठीक कर दिया है उतना है नहीं,मंडल के जिस ब्रहमास्त्र को इस्तेमाल कर देश की शकल बदलने की बात हो रही थी वह कितना हुआ, आप भी देख रही है आगे क्या होना है ? मायावती मुख्यमंत्री के रूप मे जीतनी सफल है वह आप देख ही रही है,प्रधानमंत्री यदि एसे ही बनना है तो देश का भला हो चुका.अतिवाद किसी का ठीक नहीं होता ब्राहमणों ने सदियों से अतिबाद ही किया है - दरिद्र होने पर भिक्षावृति और समर्थ होने पर अत्याचार' दया तो है ही नहीं ? 
आज 11:31 बजे · 
Saumya Mishra
Saumya Mishra 
yah galat kah rahe ho janab ..we bhiksha vritti se pare kabhi nahi gaye ..ve raja bhi banne ki kabiliyat rakhte the..jahan tak atyachar ki baat hai unse jyada anyo ne kiya ..aaz bhi kar rahe hai ..baniyo ka atyachar, mayavati ka atyachar, lalu ka atyachar, mulayam a atyachar..shura upar nahin uth paya uske vajah aaz bhi dikhti hai !! vah pet se upar uthna hi nahin chahta ..use upar uthane ki jaroorat hai ..yah jatiya dushmani se jara upar uthiye phir kuch jyada dikayee parega.
आज 11:42 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
रत्नाकर जी आप जातिय विद्वेष वाले आदमी लग रहे हो --तो आप हमारे लिस्ट से बाहर रहें तो ही ठीक है। धन्यवाद
आज 11:44 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
वर्गीय चेतना की हमलोग कर रहे है , हम लोग एक वृहद सर्वहारा वर्ग की बात कर रहे हैं और आप जाति की बात कर रहे हो यह बहुत बडा अन्तर है।
आज 11:47 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
जब हम बनियो की बात करते है तो हमारा तात्पर्य पूँजीवाद से है न कि किसी कम्यूनिटी से।
आज 11:49 बजे · रिपोर्ट करें
Pranav Gupta
Pranav Gupta 
suman, better would be to talk only about capitalists rather baniyas because i think a class would identify themselves with it. I understand why you use it but i would suggest 'vyapari' rather hindi 'baniya' if you still want to use it.
आज 11:55 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
true pranava thanks for suggestions !
आज 11:58 बजे · रिपोर्ट करें
Suman Yadav
Suman Yadav 
@Sumya, which is why we are trying to deconstruct Hinduism itself, its entire metaphysics on which whole drama of castism were played.. Gita is the classic scripture that must be rejected and criticized first. And fortunately it Vedavyasa a non-brahmin who did it. so i think the entire criticism must be directed against Veda Vyasa's Vedanta and Puranas.
आज 12:05 बजे · रिपोर्ट करें
Pranav Gupta
Pranav Gupta 
yes exactly..and i think rajesh sir is doing well on this point and seriously working on it. we should follow his analysis of Vedanta metaphysics of exploitation of the masses. Gita is one among many texts which were exclusively written to establish castism on a new ground.
आज 12:10 बजे · रिपोर्ट करें
Dr.Lal Ratnakar
Dr.Lal Ratnakar 
सुमन जीआप का अंदाज़ा ठीक नहीं है जातीय विद्वेष और ब्रह्मिन्वाद भी 'द्विज और शूद्र' की विषमता का जनक कौन है ?रही बात आप की लिस्ट की तो आपको मुबारक हो आप की नहीं पुरे सर्वहारा को दिशा देने के लिए 'मायावती'का मार्ग ही आपको अच्छा लग रहा है -साधुवाद |
आज 12:22 बजे · 
Saumya Mishra
Saumya Mishra 
For Veda Vyasa sin the entire Brahmana community has been crucified. they were given nothing except puja path and mandir. Trade for Vaisyas, rule for Khatriyas so at that time too it was ruling class and trader class who exploited the dalits. how much Brahmans could have been exploited dalits through mandir and pujapath?? yes its true that since castism was firmly established they did social discrimination according to rule.
आज 12:26 बजे · रिपोर्ट करें
Bhole Nath
Bhole Nath 
which is why religion is opium for the majority of every community. Vedavyasa formed a class of exploiters unlike today. In Dalits too there are dalit exploiters of majority of dalits, in Brahmins they were in past doing the same, in the name cast resurrection they did it cleverly. its every where. Marx did not use word casts but class. ... और देखें
आज 12:58 बजे · रिपोर्ट करें
Satya P. Gautam
Satya P. Gautam 
There are certain qualities( guna) which are ascribable only to individuals, and not to communities; e.g. being a coward or foolish or wise is an attribute of an individual. Every community has its own wise and brave members, but no community is wise or foolish. The discussion gets confused and misdirected when we astray from clear thinking.
Our ... और देखें
आज 13:21 बजे · रिपोर्ट करें
Satya P. Gautam
Satya P. Gautam 
*Haryana Sahitya Akadami, Panchkula.
sorry for thetypographical error. above.
आज 13:35 बजे · रिपोर्ट करें
Pranav Gupta
Pranav Gupta 
If we have chosen the position in life in which we can most of all work for mankind, no burdens can bow us down, because they are sacrifices for the benefit of all; then we shall experience no petty, limited, selfish joy, but our happiness will belong to millions, our deeds will live on quietly but perpetually at work, and over our ashes will be ... और देखें
आज 14:24 बजे · रिपोर्ट करें
Pranav Gupta
Pranav Gupta 
and I am more convinced with this "The weapon of criticism cannot, of course, replace criticism of the weapon, material force must be overthrown by material force" there is no other options ..the other option is always suggested by the petty- bourgeois and bourgeois as they know that with the other means they would not be replaced.
आज 14:28 बजे · 

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