25/11/2010

www.raviwar.com से साभार -
डॉ.लाल रत्नाकर 

59 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले

नई दिल्ली. 25 नवंबर 2010


बिहार विधानसभा में चुन कर आये नये विधायकों को लेकर यह आम राय ज़रुर बनी है कि जनता ने विकास को आधार बना कर नेताओं को चुना है लेकिन इन ‘माननीय’ में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन पर हत्या, डकैती जैसे आपराधिक मामले दर्ज हैं. 2005 के चुनाव में 117 ऐसे अपराध के आरोपी विधायक बन कर आये थे. ये कुल विधानसभा के 35 प्रतिशत थे. 

ताज़ा चुनाव में ऐसे लोगों की संख्या 141 है, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. यानी नयी विधानसभा में 59 प्रतिशत विधायक ऐसे होंगे, जो भले ‘माननीय’ हो गये हों, अदालतों में ये अभियुक्त के तौर पर ही जाने जायेंगे.

नेशनल इलेक्शन वॉच द्वारा किये गये अध्ययन में यह आंकड़े सामने आये हैं. आंकड़ों के अनुसार 141 में से 82 विधायक ऐसे हैं, जिनपर गंभीर अपराध के आरोप हैं. 2005 में ऐसे विधायकों की संख्या 68 थी.

जिन विधायकों पर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने के मुकदमे हैं, उनमें सर्वाधिक 58 विधायक भाजपा के हैं. भाजपा के कुल विधायकों की संख्या 90 है. इसी तरह जनता दल युनाइटेड के 114 में से 58 विधायकों पर आपराधिक मामले दायर हैं. राजद के 22 में से 13 विधायक, कांग्रेस के 4 में से तीन विधायकों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं. लोजपा के 3 में से 3 और भाकपा के एकमात्र विधायक को भी आपराधिक मामलों में अदालतों के चक्कर लगाने पड़ेंगे. 6 निर्दलिय विधायकों में से 5 के खिलाफ अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं. झामुमो के एकमात्र विधायक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.

नेशनल इलेक्शन वॉच के आंकड़ों के अनुसार बिहार विधानसभा में भाजपा के 64 प्रतिशत, जदयु के 51 प्रतिशत, राजद के 59 प्रतिशत, कांग्रेस के 75 प्रतिशत, लोजपा और भाकपा के 100 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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