29 दिस॰ 2017

भविष्य की सम्भावनाये और उत्तर प्रदेश की राजनीती ?


भाई श्री चंद्रभूषण सिंह यादव जी के आलेख को उनके फेसबुक पेज से यहां ले रहा हूँ क्योंकि उनके सवाल भावी राजनीती के लिए जरुरी हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी सोच की बजाय भैया भाभी फैक्टर प्रभावी हो गया है और इस प्रभाव में अल्पमतों क पार्टी बहुमत में ही नहीं प्रचंड बहुमत में उत्तर प्रदेश में आ गयी है। 
यह बात अभी अधूरी है जब तक यह पड़ताल न हो की क्या उत्तर प्रदेश के भैया भाभी के यहाँ से स्वर्ण राजनीती के षडयंत्रकारी अभी भी वहीँ विराजमान हैं ? भाई चंद्रभूषण से मेरा सवाल इन्ही तथ्यों को लेकर है क्योंकि उनका आना जाना अंदर तक है। 
-डॉ.लाल रत्नाकर 



-चंद्र भूषण सिंह यादव : समाजवादी कार्यकर्ता और समाजवादी धारा के प्रबुद्ध स्कॉलर
इनकी इस राय को कैसे झुठलाया जा सकता है -
"क्या पिछली 5 साल की सरकार ने पिछडो / वंचितों को सर्वाधिक नुकसान नही पंहुचाया है ? क्या उसी के कारण इनका (सपा और बसपा) का सत्ता से जाना सही नही है ? आप / कोई कैसे आंख मूंद सकते हैं इन ज्वलन्त सवालों से?"
-चंद्र भूषण सिंह यादव 

"क्या पिछली 5 साल की सरकार ने पिछडो / वंचितों का सर्वाधिक नुकसान नही पंहुचाया है ? क्या उसी के कारण सत्ता जाना सही नही है ? आप कैसे आंख मूंद सकते हैं इन ज्वलन्त सवालों से?"
-चंद्र भूषण सिंह यादव 

एक विमर्श-
"हिंदुत्व की राह पर चलेगी सपा"

-सवाल खबर पर नही वरन हमारी मंशा पर है....


उत्तरप्रदेश विधानसभा व विधानपरिषद में चले सत्तापक्ष व विपक्ष के तकरार में हिन्दू धर्म से मुतल्लिक सवालों पर असली-नकली हिन्दू समर्थक बनने की होड़ को देखते हुए किसी अखबार ने यह समीक्षा लिख डाली कि "हिंदुत्व की राह पर चलेगी सपा, भाजपा को साबित करेगी हिन्दू विरोधी",मैंने इस समीक्षात्मक खबर पर जो पोस्ट डाला है उस पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।


मेरे लिखने का जो आशय है वह केवल अखबार में छपी खबर नही बल्कि विगत 5-6 वर्षो में सपा की बनी छबि व कार्य प्रणाली है।यदि किसी साथी को मेरे द्वारा लिखे गए व उठाये गए सवालों में कोई त्रुटि नजर आ रही हो तो वे बताएं।



मैंने जो बातें और शंकाये जताई हैं क्या वे गलत हैं?क्या पिछली 5 साल की सरकार ने पिछडो/वंचितों का सर्वाधिक नुकसान नही पंहुचाया है?क्या उसी के कारण सत्ता जाना सही नही है?आप कैसे आंख मूंद सकते हैं इन ज्वलन्त सवालों से?


रही बात "आबादी के अनुपात में आरक्षण" के मुद्दे पर अखिलेश जी द्वारा बोलने की तो मुझे कबड्डी का खेल याद आता है।कबड्डी के खेल में जो रनर होता है वह केवल डेड लाइन छूता नही है बल्कि कइयों को मारकर आता है जबकि जो कमजोर खिलाड़ी होता है वह जैसे-तैसे डेड लाइन छूकर खुद मरने य पकड़े जाने के डर से भाग आता है।अखिलेश जी बेशक 2-3 बार आबादी के अनुपात में आरक्षण की बात किये हैं पर ठीक वैसे ही जैसे कबड्डी का कमजोर खिलाड़ी डेड लाइन छूकर भाग आता है।क्या इस आबादी के अनुपात में आरक्षण के सवाल को प्रदेश सम्मेलन या राष्ट्रीय सम्मेलन के राजनैतिक/आर्थिक प्रस्ताव में स्थान दिया गया?क्या इस मुद्दे को किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या सभा आदि में मजबूती से रखा गया?क्या प्रमोशन में आरक्षण के विरोध की तरह संसद,सड़क,सम्मेलन,रैली आदि में प्रमुखता से इस पर बोला गया?क्या कभी इस मुद्दे पर कोई प्रेस कांफ्रेंस किया गया?क्या कभी इस पर कोई प्रेस नोट जारी हुआ?

क्या समाजवादी पार्टी ने जातिवार जनगणना के सवाल पर कोई आंदोलन किया?आज हमारी दुर्गति उच्च व सर्बोच्च न्यायालय में हमारे न्यायाधीश न होने को लेकर है।यदि दलित चीफ जस्टिश न होते तो ताज कॉरिडोर में मायावती जी जेल नही होती क्या?यदि पिछड़े चीफ जस्टिश एमएच कानिया न होते तो मण्डल लागू होता क्या?क्या इस सवाल पर कोई आंदोलन हुवा,रणनीति बनी?

मण्डल कमीशन को पूर्णतया लागू करवाने की जिम्मेदारी किसकी है?क्या मण्डल को पूर्णतया लागू करने का अभियान चला या अब भी सोचा जा रहा है?आखिर कौन सी हमारी बात उठाने वाला कोई नही रह जायेगा?
विधान सभा,व विधान परिषद में पिछडो,दलितों,अल्पसंख्यको के मुद्दों पर कितनी बहस सपा ने चलाई है?क्या स्ट्रेटजी सपा ने बनाई थी,यही कि हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा को घेरना है?आखिर सपा आबादी के अनुपात में आरक्षण के सवाल पर ही सदन में भाजपा को क्यो नही घेरी?

भाजपा ने धम्म यात्रा निकाला।इंग्लैंड के बाबा साहब का आवास खरीद स्मारक बना दिया,यूपी में हर कार्यालय में अम्बेडकर साहब का चित्र लगाने का फरमान जारी कर दिया और सपा अपने कार्यालय में अम्बेडकर साहब की एक अदद मूर्ति भी नही लगा सकी।अम्बेदकर जयंती व निर्वाण दिवस पर सपा द्वारा कोई भव्य कार्यक्रम हुआ हो तो बताएं?किन मुद्दों की बात कर रहे हैं आप?

बार-बार यही रट क्यो लगी हुई है कि मैं भी गोभक्त हूँ,मैं भी हनुमान भक्त हूँ?राजनीति वंचितों को हक दिलवाने के लिए होता है या गोभक्ति,हनुमान भक्ति दिखाने के लिए?भक्ति अपने घर मे करते रहिए या भाजपाइयों को करने दीजिए,आप तो पिछडो,दलितों,अल्पसंख्यको,वंचितों,सामाजिक न्याय,धर्मनिरपेक्षता पर सोचिए।क्यो खामख्वाह उन्ही के एजेंडे में बंधे जा रहे हैं?

मुझे समाजवादी पुरखो ने बताया है कि इमरजेंसी के खिलाफ हुए जन विद्रोह के समय जब जयप्रकाश नारायण जी देवरिया गए थे तो कुछ लोगो ने उनसे "देवरहवा बाबा"से मिलने की बात कही थी।जयप्रकाश नारायण जी ने उस कथित साधू से मिलने से इनकार कर दिया था।यह समाजवादी चरित्र है जबकि इंदिरा जी उस देवरहवा बाबा के वहां माथा पटक आयी थीं।केवल जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र बना देने से समाजवाद नही आ जायेगा,वैसा चरित्र बनाना पड़ेगा।जहां ऊंचा देखा वहीं माथा पटक दिया,यह समाजवादी चरित्र थोड़े न है।
मुद्दों पर संघर्ष हो।कबड्डी के खेल की तरह मजबूर खिलाड़ी बन डेड लाइन छूने पर शाबाशी देने की बजाय मजबूत प्लेयर बन कई को डेड करने में वंचित समाज की भलाई और सपा का हित है।

गलतियों को छुपाये नही बल्कि गलती पर चोट करें।आत्म समीक्षा हो।जहां कमजोरी हो उसमे सुधार हो।हमे मुख्यमंत्री थोड़े न बनना है।मुख्यमंत्री तो अखिलेश जी को ही बनना है।हम तो उन्ही के लिए चिंतित हैं पर एक जिम्मेदार साथी की तरह न कि चाटुकार स्व हितसाधक की तरह। लोहिया जी ने कहा था कि "सुधरो या टूटो।"

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गजब हैं आप भी श्री अखिलेश यादव जी !

भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला आप सपाई हिंदुत्व से करेंगे ?

भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला आप सपाई हिंदुत्व से करेंगे ?


क्या अखिलेश जी !आप भी हद कर देते हैं।अब आप भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला 2019 में सपाई हिंदुत्व से करेंगे?आपकी कार्यप्रणाली और आपके नेता प्रतिपक्ष श्री रामगोविंद चौधरी जी के व्यक्तव्यों को देखकर एजेंसी को यह समीक्षात्मक खबर छापनी पड़ी है कि सपा हिंदुत्व की राह चलेगी।मैंने आपसे मुतल्लिक यह बयान जनेश्वर मिश्र पार्क घूमते समय पढा।मै आपसे सम्बंधित इस बयान "हिंदुत्व की राह पर चलेगी सपा, भाजपा को साबित करेगी हिन्दू विरोधी" पढ़कर बड़ी देर तक हंसा फिर आंखे डबडबा गयीं कि आखिर क्या हश्र होने वाला है पिछड़ो/दलितों/अल्पसंख्यको की राजनीति का?क्या अब कोई दूसरा अम्बेडकर,कांशीराम,लोहिया,पेरियार, ललई सिंह यादव,फुले,छत्रपति शाहू जी,वीपी सिंह,रामस्वरूप वर्मा,जगदेव कुशवाहा आदि नही जन्मेगा?



क्या अब बहुजन की राजनीति करने वाले लोग आप जैसे ही होंगे?क्या अब आरक्षण,सामाजिक न्याय,भागीदारी का सवाल इतिहास बन जायेगा?क्या अब सत्ता के लिए सभी के सभी हिन्दू-हिन्दू ही रटेंगे?क्या अब विचारधारा के लिए कोई जोखिम उठाने की जहमत नही मोल लेगा?क्या कोई अब अम्बेडकर की तरह "आरक्षण" {अनुच्छेद 340,341,342,15(4),16(4)} के प्राविधान जैसा कुछ करने वाला न होगा?क्या अब सवर्ण लोहिया की तरह कोई यह न बोलेगा कि "सोशलिस्टों ने बांधी गांठ,पिछड़े पावें सौ में साठ"?क्या अब कोई कांशीराम की तरह यह नही कहेगा कि "जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी"?क्या अब कोई वीपी सिंह की तरह "मण्डल" जैसा कोई कानून लागू करने की हिम्मत नही करेगा?


अखिलेश जी! आप विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर इंजीनियर व्यक्ति हैं पर आप बिल्ली के रास्ता काटने से डर जांय, सत्ता जाने के डर से नोएडा न जांय,खुद को सबसे बड़ा हनुमान भक्त बताये,हिंदुत्व की डगर अपनाएं,गोभक्त बन जांय तो मुझे लगता है कि अब समाजवाद,लोहियावाद का यह सबसे बुरा दिन होगा।
अखिलेश जी!आप हिंदुत्व की राह चलेंगे पर जब आप मुख्यमंत्री आवास खाली करेंगे तो वह आप जैसे हिन्दू के रहने से अपवित्र होने के कारण गंगाजल व गोमूत्र से उसे धुला जाएगा।क्या आपको अभी भी हिंदुत्व में कुछ शेष बचा दिख रहा है क्या?

अखिलेश जी!आप हिंदुत्व की राह चलेंगे।जानते हैं हिंदुत्व मतलब क्या होता है?हिंदुत्व का मतलब प्रभु वर्ग के लिए सुरक्षा,सम्मान,सम्पत्ति,शिक्षा,ब्यापार,सत्ता आदि की गारन्टी।

अखिलेश जी!आपने अपनी पिछली 5 साल की सरकार में हिंदुत्व पर चलने में कोई कोर-कसर छोड़ा था क्या?आपने हिंदुत्व के लिए सम्पूर्ण पिछड़ों को समाजवादी पेंशन,लैपटॉप,कन्या विद्याधन,जनेश्वर मिश्र व लोहिया गांव व आवास में आरक्षण से विरत कर सामान्य कटेगरी में डाल दिया था।आपने हिंदुत्व को खुश रखने के लिए पिछडो के पीसीएस में त्रिस्तरीय आरक्षण को खत्म कर दिया था।आपने हिंदुत्व की हिफाजत के लिए पदोन्नति में आरक्षण की ऐसी की तैसी कर डाली थी।आपने सरकारी खर्चे से तीर्थयात्राएं करवायीं थीं।पिछडो की बैक लाग नियुक्ति नही की गई।सिद्धार्थ विश्वविद्यालय-सिद्धार्थनगर में सारी नियुक्तियां ब्राह्मण की कर दी गईं।आरक्षित पदों में 1.5 या इससे आगे 1.99 तक को 2 की बजाय एक ही पद मानने का सर्कुलर आपकी सरकार ने ला दिया था। अयोध्या,मथुरा,बनारस,कुम्भ आदि में सरकारी धन हिंदुत्व हित मे पानी की तरह बहाया था लेकिन अखिलेश जी! आपको अभिजात्य वर्गो ने कितना वोट दिया?आपने पिछडो और दलितों का जितना नुकसान अपने सरकार में किया उससे लाभान्वित कितना अगड़ा आपको वोट दिया?क्या इतना सब करने के बावजूद आप अहीर से कुछ और बन सके?

अखिलेश जी!आपने अभिजात्य समाज को 5 साल सर पर बिठाए रखा,अभी भी आपके अगल-बगल मौजूद ये अभिजात्य लोग आपको हिंदुत्व की राह चल करके सत्ता दिलाने का स्वप्न दिखा रहे हैं।अखिलेश जी! आप मृग मरीचिका से वाकिफ होंगे क्योंकि लायन सफारी बनाने वाले लायन के डियर डीयर की कहानी जरूर सुने होंगे।अखिलेश जी!रेगिस्तान में तपती गर्मी में जैसे हिरन गर्मी की ऊष्मा से उपजे रेखाओं को पानी समझ दौड़ता रहता है पर वह पानी नही पाता वैसे ही आपके लिए हिंदुत्व मृग मरीचिका साबित होगा और आप 2019 एवं 2022 में हिंदुत्व रूपी मृग मरीचिका में झुलस के रह जाएंगे पर सत्ता रूपी पानी नही मिलेगी।

अखिलेश जी! मैंने सुना है कि लोग गलतियों से सीखते हैं पर आप पता नही क्यो गलतियों से सीखने की बजाय उसे ही दुहराते जा रहे हैं।अखिलेश जी!आपने 5 साल की अपनी सरकार में पिछड़ा शब्द का नाम तक नही लिया,दलित को अपने दरवाजे से खदेड़ दिया,अल्पसंख्यको के मसायल को हल करने से बचते रहे लेकिन क्या आप यह सब करने के बावजूद 2012 में सरकार बनाने के बाद शहरों में अधिकाधिक अभिजात्य वर्गो की उपस्थिति वाले नगर निकाय चुनावों में कुछ कर पाए,2014 लोकसभा चुनाव में अभिजात्य वर्गो का दुलारा बन पाए,2017 विधानसभा चुनाव में सवर्ण परस्ती की हद करने के बावजूद सवर्ण वोट पाए या अभी 2017 में सम्पन्न नगर निकाय चुनाव में इन अभिजात्य वर्ग के वोटों को अपने पाले में अपनी सवर्ण परस्ती,नोटबन्दी,जीएसटी आदि के बावजूद अपनी तरफ ला पाए?

अखिलेश जी! अभी गुजरात चुनाव सम्पन्न हुआ है। राहुल गांधी जी गुजरात मे हिंदुत्व का काट हिंदुत्व से करने चले थे।राहुल जी के मंदिर-मन्दिर परिक्रमा तथा नोटबन्दी,जीएसटी,व्यवसायिक मंदी आदि के बावजूद भाजपा का हिंदुत्व जीत गया क्योंकि हिंदुत्व का पेटेंट अहीर,चमार या पारसी/ईसाई आदि से जन्मे स्वयम्भू जनेऊधारी राहुल गांधी जी के पास नही है,वह नागपुर के सावरकर/गोलवरकर व भागवत को प्राप्त है।अखिलेश जी!आप भी गुजरात चुनाव मे हिंदुत्व की ही राह चले,आदिवासी/पिछड़े/दलित/अल्पसंख्यक बस्ती में जाने की बजाय द्वारिकाधीश की घण्टी बजाया,परिणाम क्या आया नोटा से भी कम वोट पाए आपके पांचो उम्मीदवार।

अखिलेश जी!आप भाजपा को हिंदुत्व विरोधी साबित करेंगे? क्या है आपके पास?कोई वैचारिक पाठशाला है आपके पास?कोई कैडराइज फोर्स है आपके पास सिवाय दिशाहीन जवानी कुर्बान गैंग के?बालू की भीत पर बिना विचार,कैडर के चले हैं भाजपा को हिंदुत्व विरोधी सिद्ध करने आप?

अखिलेश जी!आप जान रहे होंगे कि भाजपा के पास कट्टर 10 करोड़ हिन्दू सदस्य हैं।केंद्र के साथ 19 राज्यो में उनकी सरकार है।प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,सभी राज्यपाल,लोकसभा / राज्यसभा सभापति उनके कैडराइज हिन्दू स्वयंसेवक हैं। भाजपा के पास 1631 विधायक,283 सांसद हिंदुत्व वाले हैं।भारतीय जनता पार्टी की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व की यूनिवर्सिटी है जिसके पास भारतीय मजदूर संघ,राष्ट्रीय सेविका समिति,सेवा भारती,दुर्गा वाहिनी,बजरंग दल,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,विश्व हिंदू परिषद,स्वदेशी जागरण मंच,सरस्वती शिशु मंदिर, विद्या भारती,बनवासी कल्याण आश्रम,मुस्लिम राष्ट्रीय मंच,अनुसूचित जाति मोर्चा,लघु उद्योग भारती,भारतीय विचार केंद्र,विश्व सम्बाद केंद्र,गायत्री पीठ,सन्त अखाड़ा परिषद,सिख संगठन,विवेकानन्द केंद्र,महिला मोर्चा आदि सैकड़ो अनुसांगिक संगठन हैं अफलेटेड महाविद्यालयों की तरह हैं।

अखिलेश जी!भाजपा के पास 28500 सरस्वती विद्या मंदिर,2 लाख 80 हजार आचार्य,49 लाख छात्र,600 प्रकाशन समूह,1लाख पूर्व सैनिक,6 लाख 90 हजार कारसेवा करने वाले जंगजू बजरंगी व विहिप के सदस्य हैं।भाजपा के पास 4000 अविवाहित पूर्णकालिक/ईमानदार/मिशनरी हिंदुत्व को समर्पित स्वयंसेवक हैं जिन्होंने अपना सारा जीवन भाजपा/संघ को दान दे रखा है।भाजपा की मातृ संस्था रोजाना सुबह हथियार सहित निश्चित ड्रेस में पूर्ण अनुशासन के साथ 56 हजार 859 शाखाये लगाती है जहां 55 लाख 20 हजार स्वयंसेवक रोजाना भाजपा/संघ के लिए मरने-जीने की कसमें खाते हैं।

अखिलेश जी!देश भर के लाखों मंदिरों के समस्त साधु,सन्त,महात्मा,शंकराचार्य,जगतगुरु भाजपा के साथ हैं।सारी प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,सभी उद्योगपति भाजपा के साथ हैं।देश का सम्पूर्ण सवर्ण,प्रभु वर्ग,अभिजात्य तबका भाजपा के साथ है फिर आप किस गफलत के शिकार हैं?कौन आप जैसे "अहीर" के हिंदुत्व की बात सुनेगा। किसके जरिये भाजपा के इस जाल से आप मुकाबला करेंगे?

अखिलेश जी ! मुझे समझ नही आता है कि आप राहुल गांधी जी की गुजरात वाली गलती क्यो दुहराने पर आमादा हैं।अखिलेश जी! आपको मेरी बात कितनी अच्छी लगेगी यह तो मैं नही जानता हूँ लेकिन मुझे आप के वैचारिक दरिद्रता पर रोना आता है।जिसके सवर्ण पुरखो ने हिंदुत्व के मुकाबले सोशल जस्टिश,भागीदारी,आरक्षण जैसे अकाट्य,अमोघ हथियार दे रखे हो वह हिंदुत्व का काट हिंदुत्व में ढूंढ रहा हो तो रोना ही आएगा।

अखिलेश जी! देश बड़े भयावह दौर में है।संविधान बदलने की कोशिशें जारी हो गयी हैं।आरक्षण के खात्मे व दलितों/पिछडो की उन्नति को रोकने का प्रयत्न जोरदार तरीके से चल पड़ा है।ईवीएम के जरिये मतदान को बेमतलब बनाया जा रहा है।लोकतंत्र का गला घोंटने का दौर चल पड़ा है।आप यदि सचमुच चिंतित हैं देश के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक ढांचे की बचाने के प्रति तो अखिलेश जी!बहुजन बुद्धिजीवियों को आमंत्रित करिए,चाटुकारों को किनारे करिए।

अखिलेश जी! 2019 मे भाजपा को शिकस्त देना जरूरी है जो सामाजिक न्याय के एजेंडे से ही पूरा होगा।जातिवार जनगढ़ना, आबादी के अनुपात में आरक्षण,प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण,उच्च न्यायपालिका में आरक्षण,पदोन्नति में आरक्षण आदि सवाल जब बलवती तरीके से उठेंगे तो सवर्ण हकमार हिन्दुओ को छोड़ करके 85 प्रतिशत पिछड़ा/दलित हिन्दू तथा अल्पसंख्यक खुद ब खुद हिंदुत्व की ऐसी की तैसी कर डालेगा।
अखिलेश जी!अपनी इन बयानबाजियों से सेक्युलर व सोशल जस्टिश समर्थक ताकतों को निराश न करिए बल्कि बहुजन बुद्धिजीवियों को बुलाइये,परामर्श कीजिये और कम्युनल/अनजस्टिश लोगो से बचिए वरना वे खुद तो नही डूबेंगे पर आपको और समस्त बहुजन नेतृत्व व उनके वर्गीय हितों को नेस्तनाबूद कर डालेंगे।

अखिलेश जी!मै आपका कोई प्रतिद्वंदी नही हूँ।मैं आपको गद्दी पर बैठे हुए देखना चाहता हूं।आप जैसा सहृदय व्यक्ति मुख्यमंत्री क्या प्रधानमंत्री बने ऐसी मेरी चाहत है लेकिन अखिलेश जी!विचारधारा के प्रति कठोरता होनी चाहिए,सहृदयता का फार्मूला विचारधारा के साथ नही चल सकता।मुझे जब लगता है वैचारिक विचलन या फिसलन हो रही है तो मैं आगामी दुर्घटना का आभास समझते हुए लिख डालता हूँ जो शायद नश्तर की तरह चुभता लगता व दिखता है पर किसी घाव के इलाज हेतु नश्तर चलाना मजबूरी होती है।वैचारिक दृढ़ता के साथ 2019 मे कम्युनल ताकतों से मुकाबला हो इसी उम्मीद के साथ-
जय भीम! जय मण्डल !!
जय भारत!!!

1 टिप्पणी:

ओमप्रकाश कश्यप ने कहा…

बहुत अच्छा आलेख....

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