31/10/2010

दरअसल जातिवाद उनमे नहीं जिन्हें दबाकर रक्खा गया है,
जातिवाद उनमे है जिन्होंने सदियों से जाती के नाम पर सदिओं से सब कुछ दबा रक्खा है.
डॉ.लाल रत्नाकर 
आज़ादी के मायने का अर्थ रोकने वाले देखिये एक अधिवेसन करने जा रहे है जो जातीय संगठन का है उन्हें जातिवाद का जहर फैलता नज़र आ रहा है "दिल्ली में आयोजित होने वाले अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा को लेकर विचार विमर्श करने के लिए गाजियाबाद आए थे और नीचे की खबर छपी है जब की कई एसे बड़े कार्यक्रम शहर में हुए उनकी खबर के लिए इन अखबारों के पास जगह नहीं होती इनके राष्ट्रीय अध्यक्ष कहते है कि पूरी दुनिया में फैल रहे नफरत के जहर को समाप्त करने के लिए सर्वधर्म समभाव को स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। इस समय कहीं भाषा के नाम पर तो कहीं जाति के नाम पर तो कहीं क्षेत्र के नाम पर इंसानियत की तस्वीर धुंधली होती नजर आ रही है। विश्व ब्राह्मण संगठन के लोग इस नफरत की आग को बुझाने का काम करेंगे। वाह साहब इनका नया नाटक देखिये ये आग लगाने वाले अब आग बुझाने की बात करते है .
यह भी समय का ही एक चक्र है की वही जातियां जिन्होंने अपने हित में पूरे देश को केवल कचरा बना कर रख दिया, यह नाटक कब बंद होगा इसकी कोई तारीख तो तय नहीं की जा सकती है, पर मुल्क के गरीबों मजलूमों के निक्कम्मे और बेहुदे नेता जो इन्ही के इशारों पर पूरे दलित और पिछड़े आन्दोलनों को बार बार नुकसान पहुंचा रहे है, और असली खतरा इन्हीं से है !
पूरे पूरे दलित और पिछड़े चिन्तक परेशान है उक्त निक्कम्मे तथाकथित गुंडे नुमा छुटभैया नासमझ नेता नुमा लफंगों से, यह पूरे दलित और पिछड़े चिंतकों की ही जिम्मेदारी बनती है की इन धन लोलुप उपर्युक्त प्रकार के नेताओं का समाज बहिष्कार करे, यद्यपि यह काम बहुत मुश्किल है. 

डा. सेशा साई का स्वागत किया

Oct 30, 07:24 pm
गाजियाबाद, जासंकें : विश्व ब्राह्मण संगठन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. पी. वी. सेशा साई के महानगर आगमन पर अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डा. बी.के. शर्मा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। साई दिल्ली में आयोजित होने वाले अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा को लेकर विचार विमर्श करने के लिए गाजियाबाद आए थे।
इस मौके पर साई ने कहा कि पूरी दुनिया में फैल रहे नफरत के जहर को समाप्त करने के लिए सर्वधर्म समभाव को स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। इस समय कहीं भाषा के नाम पर तो कहीं जाति के नाम पर तो कहीं क्षेत्र के नाम पर इंसानियत की तस्वीर धुंधली होती नजर आ रही है। विश्व ब्राह्मण संगठन के लोग इस नफरत की आग को बुझाने का काम करेंगे। स्वागत करने वालों में संगठन के प्रदेश सचिव राजेंद्र प्रसाद शर्मा, प्रदेश महासचिव पं. महेश चन्द्र वशिष्ठ, प्रशांत, दिनेश शर्मा भी शामिल थे।

2 टिप्‍पणियां:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

जातिवाद उनमे है जिन्होंने सदियों से जाती के नाम पर सदिओं से सब कुछ दबा रक्खा है.
@ जातिवाद भारत में तो सबमे है बेशक कोई अपने आपको जातिवादी न होने ढोंग करे | यदि निचली जातियों में भी जातिवाद का पता करना हो तो किसी दलित को उससे निचली जाति के दलित को अपनी बेटी ब्याहने को कहते ही पता चल जायेगा | हाँ अपने ऊपर की किसी जाति के साथ सम्बन्ध बनाने में हर कोई लालायित रहता है | वे वामपंथी भी अपने धर्म या जातिवाद से बाहर नहीं निकलते जो अक्सर धर्म व जातिवाद के खिलाफ गरियाते रहते है |

Aavaj ने कहा…

शेखावत साहब यद्यपि आपका कहना सही है,पर एक बात जरूर है की आपने सबसे सड़ी हुयी नस्ल की बात की वामपंथी ने तो इस देश का बेडा गरक कर दिया है.
'मुहँ में राम बगल में छूरी वाली कहावत को' चरितार्थ किये है .जिसको आप अपने से ऊपर 'बेटी देने वाले भी जातिवादी कैसे हुए आप अपनी जाती के गरीब की न तो बेटी लेते है और न ही देते है.
अब सवाल यह है की इस जाती रूपी जहर को कैसे मारा जाय, शेखावत से तो यह होगा नहीं पर यह करे कौन.

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